कॉमेडी का एक नया और फ्रेश चेहरा भारतीय सिनेमा में जब भी दोस्ती और कॉमेडी की बात होती है, तो पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा की जोड़ी का नाम जेहन में अपने आप आ जाता है. 16 जनवरी 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म ‘राहु केतु’ इसी लोकप्रिय जोड़ी की केमिस्ट्री पर सवार होकर दर्शकों को ठहाकों के सफर पर ले जाती है. यह फिल्म महज एक साधारण कॉमेडी नहीं है, बल्कि इसमें फैंटेसी, सिचुएशनल ह्यूमर और दोस्ती का एक अनूठा संगम है. फिल्म के पहले ही फ्रेम से यह स्पष्ट हो जाता है कि निर्देशक विपुल विज ने एक ऐसी दुनिया रची है, जहां लॉजिक से ज्यादा जादू और हंसी का राज चलता है.

हिमाचल की वादियों में जादुई अफरातफरी कहानी का आधार हिमाचल प्रदेश का एक शांत और खूबसूरत शहर है. यहां हमारी मुलाकात होती है चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्डा) से, जो पेशे से एक लेखक हैं लेकिन उनकी कलम और किस्मत दोनों ही उनका साथ नहीं दे रही हैं. चूरू लाल के जीवन में मोड़ तब आता है जब वहां रहस्यमय ‘फूफाजी’ (पीयूष मिश्रा) का आगमन होता है. फूफाजी के पास एक पुरानी और जादुई किताब है, जो कहानी में अलौकिक तत्व जोड़ती है.

इस किताब के प्रभाव से ‘राहु’ और ‘केतु’ नाम के दो किरदारों का जन्म होता है. ये दोनों मासूमियत और शरारत का ऐसा मिश्रण हैं कि जहां भी कदम रखते हैं, वहां मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है. शहर के लोग उन्हें ‘अपशकुन’ की नजर से देखने लगते हैं, लेकिन दर्शकों के लिए यही मुसीबतें हंसी का सबसे बड़ा स्रोत बन जाती हैं. इसी बीच कहानी में मीनू (शालिनी पांडे) और एक सनकी अपराधी मोर्देखाई (चंकी पांडे) का प्रवेश होता है, जिससे फिल्म की रफ्तार और रोमांच दोगुना हो जाता है.

वरुण और पुलकित की ‘पावर-पैक’ परफॉर्मेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टार कास्ट है. वरुण शर्मा, जिन्हें हम ‘चूचा’ जैसे किरदारों के लिए जानते हैं, यहां ‘राहु’ के रूप में एक बार फिर अपनी नैसर्गिक कॉमिक टाइमिंग से दिल जीत लेते हैं. उनके चेहरे के भाव और संवाद अदायगी का अंदाज ऐसा है कि वे बिना कुछ बोले भी आपको हंसाने की क्षमता रखते हैं. वहीं, ‘केतु’ के रूप में पुलकित सम्राट काफी सहज और ऊर्जावान नजर आए हैं. पुलकित और वरुण के बीच का भाईचारा और उनकी ‘ब्रोमैंस’ फिल्म की रीढ़ है.

शालिनी पांडे ने मीनू के किरदार में अपनी ताजगी और सादगी से फिल्म में एक संतुलन बनाए रखा है. पीयूष मिश्रा, जो अपनी गंभीर अदाकारी के लिए जाने जाते हैं, यहां ‘फूफाजी’ के रूप में एक अलग ही रंग में नजर आए. वे रहस्यमयी भी हैं और मजाकिया भी. चंकी पांडे ने ‘मोर्देखाई’ के रूप में एक ऐसा विलेन पेश किया है जिससे आपको डर कम और हंसी ज्यादा आती है. साथ ही अमित सियाल, मनु ऋषि चड्डा और सुमित गुलाटी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपने सहायक किरदारों के जरिए कहानी को हर मोड़ पर मजबूती प्रदान की है.

एक सधा हुआ प्रयास बतौर निर्देशक विपुल विज ने अपनी पहली फिल्म में ही यह साबित कर दिया है कि वे कॉमेडी की लय को बखूबी समझते हैं. ‘राहु केतु’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां हंसी जबरदस्ती ठूंसी नहीं गई है, बल्कि वह उन अजीबोगरीब स्थितियों से पैदा होती है जिनमें पात्र फंस जाते हैं. फिल्म का संपादन चुस्त है, हालांकि मध्यांतर के बाद कुछ दृश्य थोड़े लंबे महसूस हो सकते हैं, लेकिन कलाकारों का अभिनय उस ठहराव को हावी नहीं होने देता. तकनीकी रूप से फिल्म काफी समृद्ध है. हिमाचल की वादियों को सिनेमैटोग्राफर ने बहुत ही खूबसूरती से कैमरे में कैद किया है, जिससे फिल्म विजुअली बहुत ‘फ्रेश’ लगती है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के जादुई और रहस्यमयी मिजाज के साथ पूरी तरह न्याय करता है.

आज के दौर की जरूरी कॉमेडी आजकल के दौर में जहां डार्क थ्रिलर और भारी-भरकम एक्शन फिल्मों की भरमार है, वहां ‘राहु केतु’ एक ठंडी हवा के झोंके की तरह आती है. फिल्म का लेखन आज के ‘लाउड’ कॉमेडी ट्रेंड से अलग हटकर है. यहां संवादों से ज्यादा ‘बॉडी लैंग्वेज’ और सिचुएशंस पर ध्यान दिया गया है. फिल्म यह संदेश भी हल्के-फुल्के अंदाज में दे जाती है कि कभी-कभी जिन्हें हम अपनी बदकिस्मती समझते हैं, वे ही हमारे जीवन के सबसे यादगार हिस्से बन जाते हैं.

‘राहु केतु’ एक शुद्ध पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है. इसमें कोई अश्लीलता नहीं है और यह हर उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त है. यदि आप अपनी रोजमर्रा की चिंताओं को भूलकर दो घंटे खिलखिलाना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है. पुलकित और वरुण की बेमिसाल जुगलबंदी और फिल्म का जादुई परिवेश आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगा. अपने पूरे परिवार के साथ इस वीकेंड पर ‘राहु केतु’ का लुत्फ उठाएं, यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3 स्टार.



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