Last Updated:
Tu Meri Poori Kahani Movie Review: महेश भट्ट की फिल्मों पर गहरी नजर है और वे समझते हैं कि बदलते दौर में दर्शकों की क्या चाहत है. इसलिए उन्होंने बिना किसी बड़े सितारे के एक ऐसी फिल्म बनाई है जो आपके दिल को छू लेगी. ‘तू मेरी पूरी कहानी’ एक अच्छी कहानी है, जो आपको भावुक भी करती है और आपके अंदर उत्साह से भी भर देती है.
विक्रम भट्ट की फिल्म ‘तू मेरी पूरी कहानी’ सिनेमाघरों में हुई रिलीज.
तू मेरी पूरी कहानी 3
Starring: तिग्मांशु धूलिया, जूही बब्बर, हिरण्य ओझा, अरहान पटेल, शम्मी दुहान और अन्यDirector: सुहरिता दासMusic: अनु मलिक
आज के दौर में जब हिंदी सिनेमा अक्सर बड़े सितारों और चकाचौंध भरे प्रमोशन पर निर्भर हो चुका है, ‘तू मेरी पूरी कहानी’ अपने सादगीभरे मगर गहरे असर से अलग खड़ी दिखाई देती है. महेश भट्ट की परंपरा और अनु मलिक के संगीत का संगम, साथ में नई प्रतिभाओं का आत्मविश्वासी प्रदर्शन… यह फिल्म एक सुखद ताजगी लाती है. यह कोई बहुत बड़े कास्ट वाली फिल्म तो नहीं है, लेकिन फिल्म की कहानी अच्छी है और इमोशन से भरी हुई है, जो आपके दिल के साथ-साथ दिमाग को भी छूती है. तो चलिए, आपको बताते हैं कैसी फिल्म की कहानी.
फिल्म में अनिका (हिरण्या ओझा) एक महत्वाकांक्षी लड़की है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए परिवार की परंपराओं और समाज की बंदिशों से भिड़ती है. उसकी राह में आता है रोहन (अर्हन पटेल), जो संगीत का दीवाना है और अपनी आवाज से लोगों के दिल जीत लेता है. दोनों की मोहब्बत शुरुआत में सरल लगती है, लेकिन फिर सामने आता है समाज का दबाव, पिता (तिग्मांशु धूलिया) का सख्त रवैया, और एक खतरनाक जुनूनी खलनायक राज (शम्मी दुहान). कहानी बार-बार आपको सोचने पर मजबूर करती है- क्या इंसान को मोहब्बत को चुनना चाहिए या शोहरत को?
एक्टिंग की बात करें तो हिरण्या ओझा ‘अनिका’ के किरदार में जो निडरता दिखाई देती है, वह काबिल-ए-तारीफ है. एक पल वह विद्रोही लगती हैं और दूसरे ही पल बेहद मासूम. ‘रोहन’ के रूप में अर्हन पटेल का अभिनय सच्चाई से भरा है, खासकर वो सीन जहां उनका किरदार अपने परिवार की परेशानियों से जूझ रहा होता है. राज के रूप में शम्मी दुहान का जुनून डराता भी है और आकर्षित भी करता है. उनका अभिनय फिल्म का सरप्राइज पैकेज है. तिग्मांशु धूलिया और जूही बब्बर अपने छोटे-छोटे लेकिन गहरे दृश्यों में पूरी ईमानदारी से खरे उतरे हैं.
अब बात करें निर्देशन की तो, सुहरिता दास का निर्देशन यह साबित करता है कि एक नई निर्देशिका भी रिश्तों की जटिलताओं को बेहद संवेदनशील और प्रामाणिक तरीके से पेश कर सकती है. उन्होंने फिल्म को न केवल भावनाओं से भरा बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाला बनाया है. खासकर क्लाइमैक्स का टकराव- वह क्षण सिर्फ फिल्म का अंत नहीं, बल्कि एक नायिका की आत्मा की जीत है. वहीं, अनु मलिक का संगीत फिल्म की धड़कन है. टाइटल सॉन्ग ‘तू मेरी पूरी कहानी’ आपको लंबे समय तक गुनगुनाने पर मजबूर करता है. ‘ये इश्क है’ राघव चैतन्य की आवाज में ताजगी और खुरदुरापन लेकर आता है.
वहीं, बैकग्राउंड स्कोर भी उतना ही प्रभावशाली है, जो हर दृश्य की आत्मा को और मजबूत करता है. फिल्म की सिनेमाटोग्राफी खूबसूरती से भावनाओं को कैद करती है. कैमरे की मूवमेंट्स और फ्रेमिंग कई जगहों पर कहानी कहने का ही हिस्सा बन जाती हैं. एडिटिंग थोड़ी और तेज होती तो फिल्म का असर और गहरा हो सकता था, लेकिन यह कमी फिल्म की आत्मा को प्रभावित नहीं करती. महेश भट्ट का असर हर दृश्य में झलकता है. रिश्तों की कशमकश, मोहब्बत और दर्द की गहराई… सब वही पुराना भट्ट अंदाज याद दिलाते हैं, जिसने दर्शकों को आशिकी और सड़क जैसी फिल्मों में मोह लिया था. विक्रम भट्ट का मार्गदर्शन भी साफ महसूस होता है.
फिल्म की कमियों की बात करें तो इसका पहला भाग धीमी गति से बहता हुआ प्रतीत होता है, जो आपको थोड़ा बोरियत महसूस कराता है, लेकिन दूसरे भाग में इसकी गति बेहतर होती जाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते आप न सिर्फ भावुक हो जाते हैं, बल्कि अपनी सीट से उठ भी नहीं पाते. कुल मिलाकर देखा जाए तो आप इस फिल्म को अपने पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में जाकर देख सकते हैं. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार.
About the Author
Pratik Shekhar is leading the entertainment section in News18 Hindi. He has been working in digital media for the last 12 years. After studying from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Co…और पढ़ें