World Pulses Day 2022: हर वर्ष विश्व में 10 फरवरी को ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ (World Pulses Day) मनाया जाता है. इस दिन को यानी ‘वर्ल्ड पल्स डे’ को मनाने का उद्देश्य लोगों को दालों के महत्व को समझाना और ये बताना है कि दालें पोषण और खाद्य सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण (Important) हैं.
आइये जानते हैं कि ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ का इतिहास और महत्व (Significance) क्या है. साथ ही ये भी जानते हैं कि आखिर दलहन होता क्या है.
अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस का इतिहास (World Pulses Day History)
‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ पहली बार वर्ष 2016 में मनाया गया था, बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था. तब से इस दिन को ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ (World Pulses Day) के रूप में मनाया जा रहा है.
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इस वर्ष के लिए थीम
साल 2022 के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ की थीम निर्धारित की गयी है- ‘युवाओं को टिकाऊ कृषि खाद्य प्रणाली प्राप्त करने में सशक्त बनाने के लिए दालें’ (Pulses to empower youth in achieving sustainable agrifood systems). इस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रम व सेमिनार इसी विषय पर केंद्रित रहेंगे.
वर्ल्ड पल्स डे का महत्व (World Pulse Day Significance)
आज के दौर के लाइफस्टाइल में लोग फास्ट फूड और फ्रोजन फ़ूड को ज्यादा महत्व देने लगे हैं. जिसके चलते हमारी डाइट में दालों का इस्तेमाल कम होता जा रहा है. इससे पूरा पोषण शरीर को नहीं मिल पा रहा है और इसका दुष्प्रभाव लोगों, विशेषकर बच्चों एवं युवा वर्ग की हेल्थ पर पड़ रहा है. लोगों के स्वास्थ और खाद्य सुरक्षा के लिए दालें कितनी आवश्यक हैं. इस बात को लोगों तक पहुंचाने और दालों को खाने में शामिल करने के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ही अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस को मनाया जाता है.
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जानें दलहन होता क्या है
सीधी और सरल भाषा में अगर कहा जाये, तो दाल पैदा करने वाली फसल को दलहन कहा जाता है. यानी दलहन उस अनाज को कहते हैं जिससे दाल तैयार होती है. भारत में चना, मसूर, राजमा, मटर, कुल्थी, मूंग और उड़द जैसी कई तरह की दालों की पैदावार होती है, जो कि प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं. दालें हमारी डाइट का सबसे खास हिस्सा हैं और इनकी खासियत ये होती है कि आंच पर पकने के बाद भी दालों के पौष्टिक तत्व सुरक्षित रहते हैं.
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