Saoji Chicken Recipe: नागपुर और विदर्भ की बात हो और सावजी खाने का नाम न आए, ऐसा शायद ही हो सकता है. अपने बेहद तीखे स्वाद, गहरे रंग की ग्रेवी और खुशबूदार मसालों के लिए मशहूर सावजी खाना इन दिनों अचानक चर्चा में आ गया है. महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की सावजी खाने को लेकर की गई टिप्पणी के बाद इस पर विवाद शुरू हो गया. विदर्भ में कई लोगों और संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई और सावजी खाने को क्षेत्र की पारंपरिक खाद्य संस्कृति और पहचान से जुड़ा बताया. ऐसे में बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर सावजी खाना होता क्या है और इसका स्वाद इतना अलग क्यों माना जाता है.

दरअसल सावजी स्टाइल में चिकन और मटन दोनों बनाए जाते हैं और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका मसाला है. साबुत मसालों, सूखे नारियल, खसखस, प्याज, अदरक-लहसुन और सूखी लाल मिर्च को भूनकर तैयार किया गया मसाला इसकी ग्रेवी को गहरा स्वाद देता है. अलग-अलग परिवारों और रसोइयों में इसकी रेसिपी में थोड़ा बदलाव मिल सकता है, लेकिन इसका तीखा और मसालेदार अंदाज इसकी पहचान बना हुआ है. अगर आप भी इस समय चर्चा में आई इस नागपुरी डिश का स्वाद घर पर लेना चाहते हैं, तो सावजी चिकन की यह रेसिपी ट्राई कर सकते हैं.

आखिर क्या है सावजी खाना?
सावजी या साओजी विदर्भ, खासकर नागपुर से जुड़ी एक पारंपरिक फूड स्टाइल है. इसकी पहचान तेज मसालों और गहरे स्वाद वाली ग्रेवी से होती है. चिकन और मटन इसके सबसे लोकप्रिय रूपों में शामिल हैं. सावजी चिकन में कई साबुत मसालों को भूनकर पीसा जाता है और फिर प्याज, अदरक-लहसुन और नारियल के साथ पकाया जाता है. इसे आमतौर पर ज्वार की भाकरी या रोटी के साथ परोसा जाता है.

सावजी चिकन बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
घर पर सावजी चिकन बनाने के लिए लगभग 750 ग्राम चिकन लें. इसके साथ 2 से 3 प्याज, अदरक-लहसुन, सूखा नारियल, हरा धनिया, तेल और स्वाद अनुसार नमक की जरूरत होगी. मसाले के लिए साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, हरी और काली इलायची, तेजपत्ता, चक्र फूल, जावित्री, पत्थर फूल, खसखस और सूखी लाल मिर्च रख सकते हैं. पारंपरिक रेसिपी के अलग-अलग रूपों में मसालों की मात्रा और कुछ सामग्री बदल सकती है.

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सबसे पहले तैयार करें सावजी मसाला
सावजी चिकन का असली स्वाद उसके मसाले से आता है. इसके लिए एक पैन को गर्म करें और उसमें बहुत थोडा तेल डालें. अब साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, इलायची, तेजपत्ता, जावित्री, चक्र फूल, पत्थर फूल, खसखस और सूखी लाल मिर्च डालें. इन्हें धीमी से मध्यम आंच पर अच्छी तरह भूनें. जब मसालों से अच्छी खुशबू आने लगे तो इसमें सूखा नारियल डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. मसालों को जलने न दें, वरना स्वाद कडवा हो सकता है. इसके बाद गैस बंद करके मिश्रण को ठंडा होने दें.

प्याज के साथ तैयार करें गाढा मसाला
अब पैन में थोडा तेल डालकर कटे हुए प्याज, अदरक और लहसुन को अच्छी तरह भूनें. प्याज को हल्का भूरा होने तक पकाने से ग्रेवी का रंग और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं. प्याज ठंडा होने के बाद इसे भुने हुए साबुत मसालों के साथ मिक्सर में डालें. थोडा हरा धनिया और जरूरत के अनुसार पानी डालकर इसका बारीक पेस्ट तैयार कर लें. इस मसाले को बहुत पतला करने से बचें.

मसाले को तेल छोडने तक भूनें
अब मोटे तले की कढाई में तेल गर्म करें और तैयार सावजी मसाला डाल दें. इसे मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें. जरूरत के अनुसार लाल मिर्च पाउडर और हल्दी भी डाल सकते हैं. सावजी खाने की खासियत इसका तीखापन है, लेकिन घर पर बनाते समय मिर्च की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा रखना बेहतर रहेगा. मसाले को तब तक भूनें जब तक वह अच्छी तरह पक न जाए और किनारों से तेल दिखाई देने लगे.

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अब डालें चिकन और धीमी आंच पर पकाएं
मसाला अच्छी तरह भुनने के बाद साफ किए हुए चिकन के टुकडे डालें. चिकन को मसाले में अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर टुकडे पर मसाले की परत चढ जाए. अब नमक डालकर कुछ मिनट तक चिकन को मसाले के साथ भूनें. इसके बाद जरूरत के हिसाब से गर्म पानी डालें और कढाई को ढक दें. मध्यम से धीमी आंच पर चिकन को अच्छी तरह गलने तक पकाएं. नागपुर स्टाइल सावजी चिकन की ग्रेवी आम चिकन करी के मुकाबले ज्यादा मसालेदार और गहरे स्वाद वाली होती है.

ग्रेवी का स्वाद ऐसे करें सेट
चिकन पकने के बाद ग्रेवी की कंसिस्टेंसी देखें. अगर आपको गाढी ग्रेवी पसंद है तो इसे कुछ मिनट बिना ढक्कन के पकने दें. वहीं भाकरी या चावल के साथ थोडी ज्यादा ग्रेवी चाहिए तो थोडा गर्म पानी मिलाया जा सकता है. आखिर में हरा धनिया डालें और गैस बंद कर दें. कुछ मिनट इसे ढककर रखने से मसालों का स्वाद चिकन में और अच्छी तरह मिल जाता है.

ज्वार की भाकरी के साथ लें असली स्वाद
सावजी चिकन को गर्मागर्म ज्वार की भाकरी के साथ परोसना लोकप्रिय तरीका है. इसके अलावा इसे रोटी या चावल के साथ भी खाया जा सकता है. अगर आपको बहुत ज्यादा तीखा खाना पसंद नहीं है तो लाल मिर्च की मात्रा कम रखें. इससे सावजी मसाले की खुशबू और स्वाद भी मिलेगा और डिश जरूरत से ज्यादा तीखी भी नहीं होगी.

विवाद के बीच क्यों चर्चा में है सावजी खाना?
हालिया विवाद सावजी खाने के स्वाद और उसके सांस्कृतिक महत्व को लेकर चर्चा का कारण बन गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की सावजी भोजन को लेकर टिप्पणी पर विदर्भ के कुछ संगठनों और नेताओं ने आपत्ति जताई. उनका कहना है कि सावजी भोजन विदर्भ की खाद्य संस्कृति और स्थानीय पहचान का हिस्सा है. विवाद अपनी जगह है, लेकिन इस चर्चा ने नागपुर की इस पारंपरिक मसालेदार डिश को एक बार फिर सुर्खियों में जरूर ला दिया है.



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