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आम का अचार बनाने का सही तरीका…न लगेगी फफूंदी, न सालभर तक बिगड़ेगा स्वाद

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Aam Ka Achar Ka Recipe: गर्मियों के मौसम में अगर खाने की थाली में चटपटा और खुशबूदार आम का अचार न हो, तो स्वाद अधूरा सा लगता है. खासकर पहाड़ी क्षेत्र का पारंपरिक कच्चे आम का अचार अपने खास जायके और लंबे समय तक तरोताजा रहने के गुण के लिए जाना जाता है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपका अचार सालों-साल बिना खराब हुए चले और उसमें वही गांव-घर वाला प्रामाणिक स्वाद आए, तो स्थानीय गृहिणी सुनीता टम्टा का यह पारंपरिक तरीका आपके बहुत काम आ सकता है. आइए जानते हैं पहाड़ी कच्चे आम का अचार बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि.

स्थानीय गृहिणी सुनीता टम्टा बताती हैं कि अचार के लिए हमेशा ताजे, सख्त और बिना दाग वाले कच्चे पहाड़ी आम चुनें. पहाड़ी आम में प्राकृतिक खट्टापन अधिक होता है, जिससे अचार का स्वाद बेहतरीन बनता है. लगभग 1 किलो आम पर्याप्त रहते हैं. आम अधिक पके हुए नहीं होने चाहिए, क्योंकि मुलायम फल जल्दी खराब हो सकते हैं. आम तोड़ने के बाद उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद सूती कपड़े से पोछकर पूरी तरह सुखा लें, ताकि उनमें नमी बिल्कुल न रहे. नमी रहने से अचार में फफूंदी लगने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए यह पहला और सबसे जरूरी कदम माना जाता है.

साफ और सूखे आमों को मनचाहे आकार के टुकड़ों में काट लें. अब इनमें स्वादानुसार नमक और लगभग दो चम्मच हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला दें. इस मिश्रण को 4 से 6 घंटे या रातभर ढक्कर रखें. इससे आम का अतिरिक्त पानी निकल जाता है और मसाले अच्छी तरह अंदर तक पहुंचते हैं. बाद में निकले हुए पानी को अलग कर दें. इस प्रक्रिया से अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और उसमें खराबी आने की संभावना कम हो जाती है. कई ग्रामीण परिवार आज भी इसी पारंपरिक विधि का पालन करते हैं.

अचार का असली स्वाद उसके मसालों में छिपा होता है. इसके लिए सौंफ, मेथी दाना, साबुत धनिया और राई को हल्की आंच पर अलग-अलग भून लें. इन्हें ज्यादा नहीं भूनना चाहिए, वरना स्वाद बदल सकता है. ठंडा होने के बाद इन मसालों को दरदरा पीस लें. इसमें लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, कलौंजी, चुटकीभर हींग और स्वादानुसार नमक मिलाएं. दरदरे मसाले अचार को पारंपरिक स्वाद देते हैं. पहाड़ों में कई परिवार अपने घर में ही मसाले पीसकर अचार तैयार करते हैं, जिससे उसकी खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं.

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लगभग 250 मिलीलीटर सरसों के तेल को कड़ाही में अच्छी तरह गर्म करें. जब तेल से धुआं निकलने लगे तो गैस बंद कर दें और उसे पूरी तरह ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद यह तेल अचार में मिलाया जाता है. सरसों का तेल प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का काम करता है और अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है. गर्म तेल सीधे आम में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे आम गल सकते हैं. ठंडा तेल मसालों के साथ अच्छी तरह मिलकर अचार का स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ा देता है.

अब तैयार मसाले, ठंडा सरसों का तेल और कटे हुए आम के टुकड़ों को बड़े बर्तन में अच्छी तरह मिला लें. ध्यान रखें कि हर टुकड़े पर मसालों की परत समान रूप से चढ़ जाए. यदि जरूरत लगे तो थोड़ा अतिरिक्त तेल भी मिलाया जा सकता है. अचार में तेल की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि सभी टुकड़े अच्छी तरह तेल में ढके रहें. इससे हवा का संपर्क कम होता है और अचार जल्दी खराब नहीं होता है. इस चरण में साफ और सूखे बर्तन का उपयोग करना बेहद जरूरी होता है.

तैयार अचार को साफ और पूरी तरह सूखे कांच के जार (Marthaban) में भरें. ऊपर से थोड़ा सरसों का तेल डाल दें ताकि मसाले और आम पूरी तरह तेल में डूबे रहें. इसके बाद जार को लगातार 3 से 4 दिन तक तेज धूप में रखें. शाम को जार को अंदर रख दें और अगले दिन फिर धूप में रखें. धूप मिलने से मसाले अच्छी तरह पकते हैं और आम में उनका स्वाद उतर जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी यही पारंपरिक तरीका सबसे अधिक अपनाया जाता है.

अचार निकालते समय हमेशा साफ और सूखे चम्मच का ही इस्तेमाल करें. गीला चम्मच या हाथ लगाने से अचार में फफूंदी लग सकती है. समय-समय पर देखें कि आम के सभी टुकड़े तेल में डूबे रहें. यदि तेल कम लगे तो थोड़ा गर्म करके ठंडा किया हुआ सरसों का तेल ऊपर से डाल दें. अचार को ठंडी और सूखी जगह पर रखें. सही देखभाल के साथ यह अचार कई महीनों तक स्वादिष्ट बना रहता है और इसके स्वाद में भी समय के साथ निखार आता है.

पारंपरिक पहाड़ी कच्चे आम का अचार केवल स्वाद बढ़ाने वाला व्यंजन नहीं, बल्कि पाचन के लिए भी उपयोगी माना जाता है. कच्चे आम में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. वहीं सौंफ, मेथी, राई और हींग जैसे मसाले पाचन में मदद करते हैं. हालांकि अचार में नमक और तेल की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है. पहाड़ों में दाल-भात, मंडुवे की रोटी और पराठों के साथ यह अचार आज भी भोजन का अहम हिस्सा बना हुआ है.

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