नागौर: राजस्थान की रसोई अपने पारंपरिक और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले स्नैक्स के लिए प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है मूंग मसाला मठरी, जो गेहूं के आटे और पीली मूंग दाल से तैयार होता है. यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता है. खास बात यह है कि यह मठरी बाहर से बेहद करारी और अंदर से हल्की नरम बनती है. चाय के साथ इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. बारिश के मौसम, त्योहारों, पारिवारिक मेलों और मेहमाननवाजी में राजस्थान के कई घरों में इसे पहले से बनाकर रखा जाता है.
इन सामग्रियों की पड़ेगी जरूरत
गृहिणी निरमा देवी ने बताया कि मूंग मसाला मठरी बनाने के लिए 2 कप गेहूं का आटा, आधा कप पीली मूंग दाल, घी, अजवाइन, दरदरी काली मिर्च, हल्दी पाउडर, नमक, एक बड़ा चम्मच कसूरी मेथी, एक छोटा चम्मच चाट मसाला और तलने के लिए तेल की आवश्यकता होती है. इसके अलावा सबसे पहले पीली मूंग दाल को करीब दो घंटे तक पानी में भिगोकर दरदरा पीस लें. अब गेहूं के आटे में घी डालकर अच्छी तरह हाथों से मिलाएं, ताकि मोयन बराबर बैठ जाए. इसके बाद अजवाइन, काली मिर्च, हल्दी, नमक और कसूरी मेथी डालकर अच्छी तरह मिला लें. इस चरण में चाट मसाला नहीं डालना है.
घर पर ऐसे तैयार करें मूंग मसाला मठरी
अब तैयार किए गए मूंग दाल के पेस्ट को आटे में मिलाएं और गुनगुने पानी की मदद से थोड़ा सख्त आटा गूंथ लें. आटे को लगभग 10 मिनट तक ढककर रख दें, ताकि सभी मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए. इसके बाद छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें थोड़ा मोटा बेलें. इसके बाद कांटे की मदद से मठरी में छोटे-छोटे छेद करें, जिससे तलते समय वह फूले नहीं और अच्छी तरह करारी बने. तैयार मठरियों को लगभग एक घंटे तक हल्का सूखने दें.
मठरियों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें
कढ़ाही में तेल गर्म कर धीमी आंच पर मठरियों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें. तेज आंच पर तलने से मठरी ऊपर से तो लाल हो सकती है, लेकिन अंदर तक करारी नहीं बनती. इसलिए थोड़ा ध्यान रखते हुए धीमी आंच पर तले. यही इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत है. इसके बाद जब मठरियां सुनहरी हो जाएं तो उन्हें निकालकर ऊपर से हल्का चाट मसाला छिड़क दें. पूरी तरह ठंडी होने के बाद इन्हें एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें. यह मठरी कई दिनों तक स्वाद और कुरकुरापन बनाए रखती है.