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Famous Laccha Kalakand in Pali: राजस्थान के पाली में मशहूर कृष्ण कलाकंद का ‘लच्छा कलाकंद’ और ‘लच्छा रबड़ी’ पूरे देश में अपनी मिठास घोल रहा है. 50 साल पुरानी यह दुकान शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची से मुंह में घुल जाने वाली मिठाई तैयार करती है. साधारण कलाकंद से अलग, इसकी खासियत इसका मलाईदार लच्छा और दानेदार टेक्सचर है. गुलाब हलवे के बाद अब यह लच्छा कलाकंद पाली की नई पहचान बन गया है. पिता द्वारा शुरू की गई इस अद्भुत स्वाद की विरासत को आज उनके बेटे पूरी शुद्धता और पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं, जो लाजवाब है.

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Pali: राजस्थान का पाली शहर हमेशा से अपने विश्व प्रसिद्ध गुलाब हलवे के लिए जाना जाता है. लेकिन अब यहाँ की गलियों से एक और अनोखा स्वाद निकलकर पूरे देश में अपनी खास पहचान बना रहा है. हम बात कर रहे हैं पाली के बेहद मशहूर ‘लच्छा कलाकंद’ और ‘लच्छा रबड़ी’ की. अगर आप पाली घूमने आए हैं और आपने कृष्ण कलाकंद की दुकान पर जाकर इस लाजवाब मिठाई का स्वाद नहीं चखा, तो यकीन मानिए आपकी मिठास की यह खोज पूरी तरह से अधूरी है. यह कोई साधारण मिठाई नहीं है, बल्कि शुद्धता और परंपरा का एक ऐसा सुखद संगम है जो सीधे दिल में उतर जाता है.

पाली के इस खास जायके का इतिहास करीब पांच दशक पुराना है. पिछले 50 सालों से यह दुकान स्वाद के शौकीनों और मिठाई प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई है. इस मीठे सफर की शुरुआत पिता ने की थी, जिन्होंने अपनी अथक मेहनत और शुद्धता के दम पर इस कलाकंद को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया. आज उनके बेटे उसी गर्व, निष्ठा और परंपरा के साथ इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. यह सिर्फ एक दुकान नहीं है, बल्कि पाली के लोगों के लिए एक भावना बन चुकी है. बिना किसी बड़े विज्ञापन या दिखावे के, सिर्फ अपने असली स्वाद और पिता के जमाने से चले आ रहे जायके के कारण यह कलाकंद आज पाली की सीमाओं को पार कर पूरे देश के लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.

मुंह में जाते ही घुल जाने वाला अद्भुत स्वाद
कृष्ण कलाकंद की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा ‘लच्छा’ है. यह बाजार में मिलने वाले साधारण कलाकंद की तरह बिल्कुल नहीं होता है. शुद्ध गाय या भैंस के दूध, बिल्कुल सही मात्रा में शक्कर और इलायची के सुगंधित मेल से तैयार यह कलाकंद जैसे ही मुंह में जाता है, वैसे ही मलाई की तरह घुल जाता है. इसकी मिठास कभी भी गले में नहीं चुभती, बल्कि एक सुखद एहसास देती है. इसके अलावा यहाँ मिलने वाली ‘लच्छा रबड़ी’ का भी कोई मुकाबला नहीं है. जब गाढ़ी रबड़ी के ऊपर से ताजी मलाई का लच्छा डाला जाता है, तो इसका स्वाद और भी दोगुना हो जाता है.

कैसे तैयार होता है यह खास लच्छा कलाकंद
इस कलाकंद को बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और धैर्य से भरी है. इसे मशीनों से नहीं, बल्कि हाथों की मेहनत से तैयार किया जाता है. बड़े कड़ाहों में शुद्ध दूध को घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. इस लंबी प्रक्रिया में दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होता है और उसमें प्राकृतिक दाने और लच्छे बनने लगते हैं. यही लच्छेदार टेक्सचर इसे बाजार में मिलने वाले अन्य कलाकंद से बिल्कुल अलग बनाता है. शक्कर और इलायची का संतुलित मिश्रण इसके स्वाद को और भी शाही बना देता है.

गुलाब हलवे के बाद पाली की नई पहचान
देशभर के लोग अब सिर्फ गुलाब हलवे के लिए ही नहीं, बल्कि लच्छा कलाकंद के लिए भी पाली का रुख कर रहे हैं. यह मिठाई अब शादियों, त्योहारों और खास मौकों की शान बन चुकी है. पाली शहर में आने वाला हर पर्यटक अब इस दुकान का पता पूछता हुआ नजर आता है. शुद्धता की गारंटी और लाजवाब स्वाद के कारण इस कलाकंद को लोग अपने परिवार और दोस्तों के लिए पैक करवा कर भी ले जाते हैं. अगर आपको असली राजस्थानी मिठास का अनुभव करना है, तो एक बार इस लच्छा कलाकंद को जरूर आजमाएं. इसका स्वाद आपको बार-बार पाली खींच लाएगा.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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