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Best Protein Option: ज्यादातर लोग जानते हैं कि चने शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन बेहतरीन सोर्स माने जाते हैं. लेकिन कौन-सा चना खाना चाहिए इसके बारे में अगर आप नहीं जानते हैं, तो ये लेख आपके लिए है. यहां जानिए काले चने में ज्यादा प्रोटीन होता है या फिर काबुली चने में.

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Black Chickpeas Vs Kabuli Chickpeas: चने को नाश्ते, सलाद, करी, चाट और कई तरह के व्यंजनों में खाया जाता है. बाजार में मुख्य रूप से काला चना जिसे देसी चना भी कहते हैं और काबुली चना मिलते हैं. दोनों ही प्रोटीन और फाइबर के अच्छे सोर्स हैं, लेकिन इनके पोषण में कुछ अंतर हो सकता है. खासकर जब बात प्रोटीन की हो, तो केवल चने का रंग देखकर यह तय करना सही नहीं है कि कौन ज्यादा फायदेमंद है.

चने की किस्म, उसे कच्चा या पकाकर खाने की स्थिति और मात्रा से पोषण की गणना बदल सकती है. ICMR-NIN की डाइटरी गाइडलाइंस भी दालों और बीन्स को भारतीय डाइट में प्रोटीन का अहम सोर्स बताती हैं. साथ ही, अनाज और दालों को साथ खाने से भोजन में प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलती है.

काला चना और काबुली चना में क्या अंतर है?
काला चना छोटे, गहरे रंग के और सख्त होते हैं. वहीं काबुली चना आकार में बड़ा और हल्के क्रीम रंग का होता है. दोनों एक ही प्रजाति की अलग-अलग किस्में हैं. लेकिन प्रोटीन की मात्रा किस्म और प्रोसेसिंग के अनुसार बदलती है. इसलिए काले और काबुली चने में भी प्रोटीन की मात्रा अलग-अलग होती है.

किसमें ज्यादा प्रोटीन?
USDA FoodData Central के आंकड़ों के अनुसार, सामान्य कच्चे/सूखे काबुली चने में करीब 20.5 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम पाया जाता है. पकाने के बाद यही मात्रा करीब 8.9 ग्राम प्रति 100 ग्राम हो जाती है. वहीं, देसी या काले चने में भी अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है. इसलिए केवल “किसमें ज्यादा प्रोटीन” के आधार पर एक चने को विजेता कहना सही नहीं .

काला चना किसके लिए बेहतर?
अगर आप फाइबर और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाले भोजन की तलाश में हैं, तो काला चना अच्छा विकल्प हो सकता है. इसे अंकुरित करके, उबालकर या सलाद के रूप में खाया जा सकता है.

काबुली चना कब चुनें?
काबुली चना भी प्रोटीन और फाइबर वाला पौष्टिक विकल्प है. छोले, सलाद और हम्मस जैसे व्यंजनों में इसका इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है. अगर आपको इसका स्वाद और बनावट पसंद है, तो इसे डाइट में शामिल करना बिल्कुल सही है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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