नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ अपनी विशाल स्टारकास्ट और स्केल को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। 23 दमदार एक्टर्स एस फिल्म में अहम रोल निभाएंगे। रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता), यश (रावण), सनी देओल (हनुमान) और रवि दुबे (लक्ष्मण) जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी इस फिल्म में अब एक और सशक्त नाम जुड़ गया है। अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए मशहूर अभिनेत्री शीबा चड्ढा इस पौराणिक गाथा में ‘मंथरा’ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी। परंपरागत रूप से मंथरा को केवल एक कुटिल और षड्यंत्रकारी दासी के रूप में देखा जाता है, लेकिन शीबा इस किरदार को एक नए नजरिए से पेश करने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि मंथरा के फैसलों के पीछे भी भावनाएं और ठोस वजहें थीं, जिन्हें पर्दे पर भावनात्मक गहराई के साथ उकेरा जाना बेहद जरूरी है।
जब ललिता पवार ने अमर कर दिया यह रोल
शीबा चड्ढा से पहले भारतीय टेलीविजन के इतिहास में ‘मंथरा’ का नाम आते ही रामानंद सागर की ‘रामायण’ की दिग्गज अभिनेत्री ललिता पवार का चेहरा सामने आ जाता है। ललिता पवार ने इस नकारात्मक किरदार को इतनी शिद्दत और जीवंतता से पर्दे पर उतारा था कि दर्शक उन्हें असल जिंदगी में भी उसी नजर से देखने लगे थे। उन्होंने 9 साल की उम्र में 1928 की मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ से अपना सफर शुरू किया था और बाल कलाकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी।
एक थप्पड़ ने तोड़ा हीरोइन बनने का सपना, फट गई थी आंख की नस
1916 में नासिक में जन्मीं ललिता पवार जिनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन है, मुख्यधारा की फिल्मों में एक खूबसूरत और सफल हीरोइन बनने का सपना लेकर आई थीं, लेकिन 1942 में फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ के सेट पर हुए एक दर्दनाक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। एक सीन की शूटिंग के दौरान सह-कलाकार का थप्पड़ इतना जोरदार पड़ा कि वे सीधे फर्श पर गिर पड़ीं। इस हादसे में उनकी आंख की नस फट गई और चेहरे के एक हिस्से को लकवा मार गया। इस भयावह मोड़ के बाद ललिता पवार का हीरोइन बनने का सपना हमेशा के लिए टूट गया। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और कई सालों के इलाज के बाद खुद को नकारात्मक और सख्त किरदारों में ढालकर सिनेमा में धमाकेदार वापसी की।
खलनायिका बनकर रचा इतिहास और 700 फिल्मों का शानदार सफर
हादसे के बाद ललिता पवार ने खुद को विलेन और सख्त मिजाज सास की भूमिकाओं के लिए तैयार किया। उन्होंने अपने करियर में हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं की 700 से भी अधिक फिल्मों में काम किया। बड़े पर्दे पर अत्याचारी सास का किरदार निभाने से लेकर रामानंद सागर की ‘रामायण’ में ‘मंथरा’ बनकर घर-घर में प्रसिद्ध होने तक, ललिता पवार ने अभिनय के हर रूप को साबित किया। जीवन के अंतिम दौर में मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद 1998 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘बधाई दो’, ‘पगलैट’ और ‘बैंडिश डाकुओं’ जैसी फिल्मों में अपनी कला का लोहा मनवा चुकीं शीबा चड्ढा, ललिता पवार द्वारा अमर किए गए इस ऐतिहासिक किरदार को नितेश तिवारी की आधुनिक ‘रामायण’ में किस नए रूप में प्रस्तुत करती हैं।