गर्मियों के मौसम में सतुआ का शर्बत सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. ठंडे पानी में सत्तू, मिश्री या नमक मिलाकर तैयार किया गया यह पेय शरीर को तुरंत ठंडक देता है और लू से बचाने में मदद करता है. जिसने अब आधुनिक दौर में ‘सुपरफूड’ के रूप में भी अपनी खास पहचान बना ली है. खास बात यह है कि बघेलखंडी सतुआ स्वाद, बनाने की विधि और उपयोग के तरीके में अन्य क्षेत्रों, खासकर बिहार के सत्तू से अलग नजर आता है. यहां सतुआ तैयार करने के लिए चने के साथ जौ या मक्का को भूनकर पीसा जाता है, जिससे इसमें हल्का स्मोकी और देसी फ्लेवर आ जाता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी इसे पारंपरिक तरीके से घरों में तैयार किया जाता है, जिससे इसका असली स्वाद और पोषण बरकरार रहता है. इसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर मौजूद होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देते हैं.