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Penne Fried Meat Recipe: पेनी फ्राई मीट खाने में बहुत स्वादिष्ट लगता है. इसे बनाना भी आसान है. बता दें कि डोका (घोंघा) में एक ही खोल में दो तरह का मीट होता है. इसमें एक हार्ड मीट होता है, जिसकी ग्रेवी बनाई जाती है और दूसरे सॉफ्ट हिस्से को फ्राई करके खाया जाता है, जो नमक-मसाले के साथ तैयार किया जाता है. जानते हैं आसान रेसिपी.
पेनी मीट को फ्राई करने के लिए सबसे पहले बाजार से खरीदकर डोका लाने या खुद जलाशय से निकालने के बाद उसके दोनों हिस्सों को अलग कर लें. इसके बाद सॉफ्ट हिस्से को अच्छी तरह धो लें. इसमें नमक, मिर्च, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और जिंजर-गार्लिक पेस्ट मिलाएं और किनारे रख दें.
आगे पकाने के लिए पेनी मीट में सभी मसाले मिलाने के बाद इसे करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें. इधर कढ़ाई में तेल गर्म करें. इसमें थोड़ा सा जीरा चटकने के बाद मैरिनेट किए हुए पेनी मीट को हल्की आंच पर 10 से 15 मिनट तक भूनें. इसके बाद यह तैयार हो जाएगा.
डोका का पेनी वाला हिस्सा बहुत सॉफ्ट होता है, जिससे यह 10 से 15 मिनट में आसानी से पक जाता है. तेल में अच्छे से फ्राई करने पर यह मीट क्रंची हो जाता है. इसे रोटी के साथ खा सकते हैं या यहां मिथिलांचल में इसे भुना चूड़ा के साथ भी लोग चाव से खाते हैं. इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है है.
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डोका के पेनी मीट को बहुत सारे लोग बच्चों को भी खिलाते हैं, ताकि वे तंदुरुस्त रहें. खासकर गर्भवती महिलाओं को भी इसे खिलाया जाता है, क्योंकि इसे फायदेमंद माना जाता है. यह मिट्टी में रहता है और मिट्टी खाता है. यहां के बड़े-बुजुर्ग मानते हैं कि इसे खाने से कैंसर जैसी बीमारियां दूर रहती हैं.
मिथिलांचल के लोगों की मानें तो यह बारिश के समय ही ज्यादा मिलता है और शुद्ध माना जाता है. यहां के लोग गर्भवती महिलाओं को डोका (घोंघा) जरूर खिलाते हैं. उनका मानना है कि इससे आने वाले बच्चे की आंखें डोका की तरह बड़ी-बड़ी होंगी और वह स्वस्थ रहेगा.
डोका को शुद्ध माना जाता है. इसके अंदर का मीट निकालने के बाद बचे हुए छिलके (शेल) की पूजा भी की जाती है. मधुश्रावणी-पंचमी में कुलदेवी के घर में इस छिलके को चिपकाया जाता है, मान्यता है कि इससे लोगों की रक्षा होती है.