बिहार के सीतामढ़ी जिले का रूनी सैदपुर अपनी खास और पारंपरिक बालूशाही के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। इस बालूशाही की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में मैदे की जगह शुद्ध मलाई या खोए का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह अंदर से बेहद जालीदार और मुंह में घुल जाने वाली बनती है। अगर आप भी हलवाई जैसी खस्ता और रसीली बालूशाही घर पर बनाना चाहते हैं, तो यहां बताई गई रेसिपी को नोट कर सकते हैं।
सामग्री
- मलाई / ताजी क्रीम: 1 कप (गाढ़ी और ताजी)
- मैदा: 2 कप (पारंपरिक रूप से मलाई मुख्य घटक है, लेकिन बाइंडिंग के लिए मैदे का प्रयोग होता है)
- शुद्ध घी: 2 बड़े चम्मच (मोहन के लिए) और तलने के लिए
- चीनी: 2 कप (चाशनी के लिए)
- पानी: 1 कप
- इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच
- केसर के धागे: 5-6
- कटे हुए पिस्ता-बादाम: सजावट के लिए
बनाने का तरीका
स्टेप 1: एक बड़े बर्तन में ताजी मलाई लें। इसमें पिघला हुआ घी मिलाएं और अच्छी तरह फेंटें ताकि यह क्रीमी हो जाए।
स्टेप 2: अब इसमें मैदा थोड़ा-थोड़ा करके डालें। ध्यान रहे, इसे कड़ाई से नहीं बल्कि हल्के हाथों से मिलाना है ताकि इसमें परतें बनी रहें। यदि जरूरत हो तो बहुत थोड़ा सा पानी या दूध छिड़क सकते हैं। आटे को ज्यादा चिकना नहीं करना है।
स्टेप 3: गुंथे हुए मिश्रण से नींबू के आकार की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं। अंगूठे की मदद से इनके बीच में हल्का सा गड्ढा कर दें, ताकि चाशनी अंदर तक जा सके।
स्टेप 4: एक कढ़ाई में घी या रिफाइंड तेल हल्का गुनगुना गर्म करें। इसमें बालूशाही डालें और आंच को बिल्कुल धीमा रखें। इसे धीमी आंच पर ही पकने दें ताकि यह अंदर तक अच्छे से सिक जाए। जब यह सुनहरी और खस्ता हो जाए, तो इन्हें बाहर निकाल लें।
स्टेप 5: एक अलग बर्तन में चीनी और पानी मिलाकर एक तार की चाशनी तैयार करें। इसमें इलायची पाउडर और केसर डालें। तली हुई गरम बालूशाही को हल्की गर्म चाशनी में 5 से 7 मिनट के लिए डुबोकर रखें, ताकि रस अंदर तक चला जाए।