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1972 का समय था. अमेरिका और चीन के बीच शीत युद्ध का तनाव पसरा हुआ था. तत्कालीन अमेरिकी प्रेसीडेंट रिचर्ड निक्सन चीन के दौरे पर गए. मुख्य दावत में जब उनके सामने खास बत्तख की डिश परोसी गई तो उनका चेहरा खाते ही खिल उठा. संतुष्टि चेहरे पर आई. कहा जाता है कि इस डिश ने अमेरिका और चीन के संबंधों को ठीक करने में फूड डिप्लोमेसी के तौर पर खास भूमिका निभाई.
कहा जाता है कि जब 1970 के दशक के शुरू में अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में शीत युद्ध का तनाव था. अमेरिकी प्रेसीडेंट रिचर्ड निक्सन चीन पहुंचे हुए थे. ऐसे में चीन ने उन्हें और उनके साथ आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को खाने में एक ऐसी डिश परोसी कि हर किसी के चेहरे पर एक मुस्कुराहट और खुशी का भाव आ गया. देखते ही देखते माहौल बदल गया. चीन की फूड डिप्लोमेसी काम कर गई. आखिर वो कौन सी डिश है, जो उसके बाद हर अमेरिकी प्रेसीडेंट को चीन की यात्रा में परोसी जाती है. (Photo Courtesy -SCMP)
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड डक चीन की दो दिनों की राजकीय यात्रा पर हैं. उम्मीद है कि चीन जब उनके स्वागत में दावत देगा तो इसमें भी ये नामी डिश जरूर होगी, जिसने अब तक अमेरिका के हर प्रेसीडेंट को खुश किया और इसका दीवाना बनाया. डिश इतनी खास है कि ना केवल इसको बनाना बहुत डेलिगेट होता है बल्कि ये बनने में भी समय लेती है. जरा सी भी गड़बड़ी इस डिश को खराब कर सकती है. (FILE PHOTO)
इस डिश का नाम है पेकिंग डक. ये रिचर्ड निक्सन को 1972 में चीन की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान राजकीय भोज में परोसी गई. इस भोज के बाद लोगों की जुबान पर केवल इसी डिश का नाम था. इसी वजह से इसे “डक डिप्लोमेसी” के नाम से भी जाना जाता है. ये देखते ही देखते लोकप्रिय हो गई. पूर्व अमेरिकी प्रेसीडेंट जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश तो इसके इस कदर दीवाने हैं कि उन्होंने वर्जीनिया के एक चाइनीज रेस्तरां में 50 से अधिक बार इसका भोजन किया. उन्हें यह इतना पसंद था कि वे शायद ही कभी मेनू देखते थे. रेस्तरां के कर्मचारी पहले से ही जानते थे कि उन्हें क्या चाहिए. (Photo Coutesy SCMP)
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कहा जाता है कि पेकिंग डक ने सही मायनों में फूड डिप्लोमेसी का काम किया. उसने शीत युद्ध के तनाव के बीच रिश्तों को सामान्य करने में मदद की. निक्सन ने इसके बाद कई मौकों पर इसका आनंद लिया. उसके बाद जब भी कोई अमेरिकी प्रेसीडेंट चीन आता है तो उसके स्वागत भोज के मेन्यू में इसे जरूर रखा जाता है. 2017 में जब ट्रंप बीजिंग पहुंचे तो माना जाता है कि इसे भी शामिल किया गया. (NEWS18 AI IMAGE)
रसोइये इस प्रसिद्ध व्यंजन को बनाने के लिए बत्तख को रातभर लटकाकर रखते हैं. फिर उसकी त्वचा के नीचे हवा भरते हैं. इससे भूनने की प्रक्रिया के दौरान वसा अधिक बाहर निकल आती है, जिसके परिणामस्वरूप बाहर से त्वचा बेहद कुरकुरी और अंदर से मांस गर्म और मुलायम हो जाता है. फिर इसकी डेलीकेसी अलग ही तरह की हो जाती है. (Photo Coutesy SCMP)
इस व्यंजन के इतना स्वादिष्ट होने का एक और कारण यह है कि रसोइये इसे लटकाने की स्थिति से उतारने के बाद मसालों और मीठे सिरप में लपेटते हैं. इसके बाद, पेकिंग डक को तुरंत फलों की लकड़ी से भरे ओवन में डाल दिया जाता है. ओवन से निकालने के बाद शेफ़ तुरंत उसे खाने वालों की मेज़ पर लाते हैं. उनके सामने ही उसे काटते हैं. फिर वे उसकी खाल को, उस पर लगे मांस के छोटे टुकड़ों के साथ, छोटे आटे के पैनकेक, हरे प्याज़ और होइसिन सॉस के साथ परोसते हैं. (Photo Coutesy SCMP)
पीकिंग डक को खास होने के कई कारण हैं – इसकी बनावट, तैयारी की तकनीक और स्वाद का संतुलन, ये सभी मिलकर इसे डिफरेंट बनाते हैं. बत्तख का चयन, मारिनेशन, सॉफ्ट-एयर ड्रायिंग (हवा में सुखाना) और लकड़ी कोयले पर इसकी धीमी भुनाई जैसी प्रक्रियाएं स्वाद और टेक्सचर दोनों पर असर डालती हैं. (Photo Coutesy SCMP)
राष्ट्रपति निक्सन की 1972 की यात्रा से पहले अमेरिका में कई चीनी रेस्तरां थे. लेकिन वो सभी चीन का ऐसा भोजन परोसते जो अमेरिका स्वाद के अनुरुप होते थे. यानि ये कह सकते हैं कि चाइनीज डिश को काफी हद अमेरिकी तौर तरीके से ही बनाते और परोसते हैं. जब निक्सन के चाइनीज भोज को टीवी पर अमेरिका में लोगों ने देखा तो चाइनीज खानपान को खासी चर्चा और लोकप्रियता मिलनी शुरू हुई. इसके बाद अमेरिकियों ने चाइनीज खान-पान की आदतों को अपनाना शुरू कर दिया. (Photo Coutesy SCMP)
पेकिंग डक का इतिहास सदियों पुराना है. ये चीन के शाही युग तक फैला हुआ है. माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति मिंग राजवंश (1368-1644) के दौरान बीजिंग की शाही रसोई में हुई थी. यह व्यंजन सम्राटों का पसंदीदा था, जो अपनी कुरकुरी त्वचा और रसीले मांस के लिए प्रसिद्ध था. इसे तैयार करना एक परिष्कृत कला थी. ये नुस्खा लंबे समय तक राजमहल का एक गुप्त रहस्य बना रहा. फिर ये आम जनता में फैल गया. चीनी गैस्ट्रोनॉमी का केंद्रबिंदु बन गया. (news18 ai image)
तो अब आखिर में सवाल उठता है कि भारत में पेकिंग डक कहां मिलती है. बड़े शहरों के हाई‑एंड चीनी रेस्टोरेंट्स में ये मिल जाती है. 5 स्टार और बड़े 4 स्टार होटल के चीनी रेस्टोरेंट में मेन्यू पर या विशेष ऑर्डर पर परोसा जा सकता है. चूंकि ये बनने में कई घंटे लेता है लिहाजा इसे स्पेशल आर्डर पर बनाया जाता है. कोलकाता के चाइना टाउन के कुछ हाई‑एंड चीनी आउटलेट का पेकिंग डक प्रसिद्ध है. मुंबई में बैंड्रा‑जुहू और कुछ होटल‑रेस्टोरेंट्स के हाई‑एंड चीनी मेन्यू में पेकिंग डक लोकप्रिय है. (news18 ai image)