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Bilaspur News: चरोटा भाजी और दाल की मिक्स सब्जी तैयार करने के लिए सबसे पहले भाजी को अच्छी तरह साफ कर बारीक काटा जाता है. इसके बाद अरहर की दाल को कुछ देर भिगोकर हल्दी और नमक के साथ कुकर में पकाया जाता है.
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति में कई ऐसी पारंपरिक डिश शामिल हैं, जो स्वाद और स्वास्थ्य का बेहतरीन मेल प्रस्तुत करती हैं. इन्हीं में से एक है चरोटा भाजी और दाल की सब्जी. ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों से पसंद की जाने वाली यह देसी डिश बरसात के मौसम में विशेष रूप से बनाई जाती है. प्राकृतिक रूप से उगने वाली चरोटा भाजी और प्रोटीन से भरपूर दाल का संयोजन न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है. यही कारण है कि यह व्यंजन आज भी छत्तीसगढ़ के घरों और गांवों की रसोई में अपनी खास पहचान बनाए हुए है.
चरोटा भाजी छत्तीसगढ़ के खेतों और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों में मिलने वाली एक लोकप्रिय पत्तेदार हरी सब्जी है. इसका स्वाद हल्का कसैला होने के बावजूद बेहद स्वादिष्ट माना जाता है. स्थानीय लोग इसे लहसुन, मिर्च और हल्के मसालों के साथ पकाना पसंद करते हैं, जिससे इसकी प्राकृतिक खुशबू और पौष्टिकता बरकरार रहती है.
आसान है चरोटा भाजी और दाल की रेसिपी
चरोटा भाजी और दाल की मिक्स सब्जी तैयार करने के लिए सबसे पहले चरोटा भाजी को अच्छी तरह साफ कर बारीक काट लिया जाता है. इसके बाद अरहर दाल को कुछ देर भिगोकर हल्दी और नमक के साथ कुकर में पकाया जाता है. एक कड़ाही में तेल गर्म कर जीरा या राई, लहसुन, हरी मिर्च और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है. फिर प्याज और टमाटर को भूनकर उसमें कटी हुई चरोटा भाजी डाली जाती है. कुछ देर पकाने के बाद तैयार दाल मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. अंत में हरा धनिया डालकर इसे चावल या रोटी के साथ परोसा जाता है.
पोषण से भरपूर पारंपरिक व्यंजन
विशेषज्ञों के अनुसार, चरोटा भाजी में आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. वहीं दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत मानी जाती है. दोनों का मिश्रण एक संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार करता है.
हर उम्र के लोगों की पसंद
ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यंजन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बना हुआ है. कम मसालों में तैयार होने के कारण यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि इसे पारंपरिक भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
खाद्य संस्कृति को जीवित रखने की पहल
बदलती जीवनशैली और फास्टफूड के बढ़ते चलन के बीच पारंपरिक व्यंजनों का महत्व और भी बढ़ गया है. चरोटा भाजी और दाल की सब्जी जैसी रेसिपी न केवल स्वाद का आनंद देती हैं बल्कि लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और मिट्टी से भी जोड़ती हैं. ऐसे में स्थानीय व्यंजनों को अपनाकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.