(डॉ. रामेश्वर दयाल)

Famous Food Joints In Delhi-NCR: अगर हम समोसे को देश का राष्ट्रीय स्ट्रीट फूड मान लें तो मैगी को सर्वजन का स्ट्रीट फूड मानने में संकोच नहीं करना चाहिए. मैगी फूड एक ऐसा आइटम हो चुका है जो धुंधुआते-बर्फीले पहाड़ों पर भी मिलेगा, समुद्र की अठखेलियां करती लहरों के पास भी इसका ठिया होगा तो धुर रेतीले इलाकों की ढाणी में भी खुशबू बिखेरता दिख जाएगा. अगर आप किसी जंगली इलाके से गुजर रहे हों तो इस बात की पूरी संभावना है कि किसी ढाबे पर भी इसके दर्शन हो जाएंगे. अजीब सी कशिश है मैगी के नूडल्स में और दिमाग की नसों में नशा से भर देता है इसका मसाला.

सवा सौ साल पहले बनी मैगी का स्वाद आज भी लुभाता है
‘बस 2 मिनट में खाने के लिए तैयार होने वाले मैगी नूडल्स का इतिहास काफी पुराना है. इसका निर्माण स्विस निवासी जूलियस माइकल जोहानस मैगी ने किया था. अपने नाम से बनाए इस फूड को सबसे पहले उन्होंने वर्ष 1897 में जर्मनी में बेचा. इसके बाद उन्होंने स्विटरजरलैंड में फूड चेन खोली और मैगी की मार्केटिंग शुरू की. समय बीतता रहा और पूरी दुनिया में यह फैलती चली गई. आपको हैरानी होगी कि भारत में मैगी की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी. इसके कुछ सालों बाद मैगी ने मसाला, चिकन व टमाटर स्वाद वाले वेरिएंट भी बेचना शुरू किए.

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विशेष बात यह है कि मैगी कभी भी 2 मिनट में तैयार नहीं होती है, लेकिन कंपनी ने अपने प्रचार में 2 मिनट में तैयार के रूप में इस प्रोडक्ट को बेचा, नाम कमाया और पैसा भी. मैगी की विशेषता यह है कि इसे वेजिटेरिएन, नॉन वेजिटेरियन और एगीटेरियन तीनों रूप में खाया जा सकता है. इसी के चलते इसके अनेक स्वाद बन गए हैं. आज हम आपको ऐसे ही मैगी के एक ऐसे ठिए पर लिए चल रहे हैं, जहां मैगी के स्वाद की इतनी अधिक वैरायटी है, जो दिल्ली में शायद ही कहीं और मिले.

50 से अधिक स्वाद में मिल रही है यहां पर मैगी
यह बात जगजाहिर है कि मैगी सर्वप्रिय व्यंजन है, लेकिन युवाओं में कुछ ज्यादा ही लोकप्रिय है. हम जिस ठिए पर आपको ले चल रहे हैं, वह युवाओं के गढ़ दिल्ली यूनिवर्सिटी में है. यहां के मौरिस नगर चौक पर आपको ‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’ का ठिया दिख जाएगा, जहां से आजकल 50 से अधिक स्वाद की मैगी मिल रही है. इनमें सिंपल मसाला मैगी से लेकर चीज़, टोमेटा, तंदूरी, पनीर, चिली, मन्यूरियन, हॉट एंड सॉर से निकले कई स्वाद हैं.

आप यह न समझें कि नाम के लिए वैरायटी बना दी गई है. आप खाकर देखेंगे तो पता चल जाएगा कि जिस नाम से मैगी है, वही स्वाद उसमें मिलेगा. वैसे यहां पर सबसे अधिक मशहूर ऑल इन वन और तंदूरी पास्ता है. कॉलेज के युवा इसको सबसे अधिक तरजीह देते हैं. इसमें इतना ‘माल’ डाला जाता है कि एक मैगी में ही आपका पेट भर जाएगा. यहां मिलने वाली मैगी की कीमत 40 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है.

विशेष प्रकार के मसाले मैगी के स्वाद को लाजवाब बनाते हैं
असल में इतनी वैरायटी की मैगी का स्वाद इसलिए उभरकर आता है, कि इनके लिए विशेष प्रकार के मसाले बनाए गए हैं. यही मसाले स्वाद भी उभारते हैं और स्वाद में भेद भी पैदा करते हैं. चूंकि यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के आसपास है, इसलिए यहां युवा आते हैं और ऑर्डर देकर गपशप मारते हैं. मैगी हाथ में आते ही वे खड़े होकर खाते हैं, या फुटपाथ पर बैठकर दुनिया-जहान की बातें करते हुए मैगी का मजा लेते हैं. इस ठिए में मैगी के स्वाद का खजाना इतना अधिक है कि बाहर के युवा भी कारों, बाइक में बैठकर इस प्वाइंट पर आते हैं और मैगी खाकर मजे उठाते हैं. इस ठिए पर खानपान के और भी डिश हैं, लेकिन युवाओं का मन तो मैगी में ही रमता है.

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टॉम अंकल के दो बेटों ने की मेहनत और कई स्वाद बनाए
ठिए पर मैगी बेचने की शुरुआत रमेश कटारिया (टीटू) ने की थी. वह डीयू इलाके में आ तो वर्ष 1978 में गए थे, लेकिन शुरू में उन्होंने खालसा कॉलेज के सामने रेहड़ी पर नींबू लैमन बेचना शुरू किया. कॉलेज के लड़के पहले उन्हें टीटू भैया कहते थे, बाद में छात्रों ने उनका नाम टॉम अंकल रख दिया. वर्ष 1995 में उन्हें यह ठिया मिला और वहां उन्होंने पकौड़े के साथ साथ मैगी बेचना भी शुरू कर दी. छात्रों को मजा आने लगा. आज इस ठिए की जिम्मेदारी उनके बेटे संदीप व गगनदीप कटारिया के पास है. उनका कहना है कि हम महीने दो महीने में नया स्वाद ‘पैदा’ करते रहते हैं, इसलिए युवाओं को हमारी दुकान रास आ रही है. सुबह 11 बजे ठिए पर मैगी मिलना शुरू हो जाती है और रात 10 बजे तक ठिया गुलजार रहता है. रविवार को अवकाश रहता है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: जीटीबी नगर/विश्वविद्यालय

Tags: Food, Lifestyle



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