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Purvi Champaran Famous Dhaba: मोतिहारी अरेराज रोड पर रूपेश दुबे का अनोखा झोपड़ी कैफे है, जो अपने स्वाद के साथ-साथ खास इंटीरियर के लिए भी जाना जाता है. उनका यह आइडिया दुबई और नेपाल के होटलों का मिक्स है. रुपेश दोनों जगहों पर काम कर चुके हैं.
पूर्वी चंपारण/आदित्य गौरव: बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी-अरेराज रोड पर एक ऐसा अनोखा कैफे है, जो अपने खास बनावट और स्वादिष्ट फूड आइटम्स के लिए पूरे जिले में जाना जा रहा है. खास बात यह है कि यह कैफे ग्रामीण इलाके में है, लेकिन अपनी गुणवत्ता के कारण ग्राहकों का ध्यान खींचने में सफल रहा है. यहां मुख्य रूप से पूरे जिले से लोग चंपारण के हांडी मटन, कबाब और ताश-भुजा खाने के लिए पहुंचते हैं.
जो यहां आता है, इनका स्वाद जरूर चखता है
बता दें कि इस कैफे से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर बिहार का काशी कहे जाने वाले सोमेश्वर महादेव का भी भव्य मंदिर है, जहां दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने आते हैं. इस कैफे के मालिक रुपेश दुबे का कहना है कि जो भी पर्यटक या सैलानी अरेराज आते हैं, वे उनके यहां खाना जरूर खाते हैं और जो लोग चंपारण के बाहर से आते हैं, वे उनके यहां चंपारण के बेहतरीन व्यंजनों का लुत्फ जरूर उठाते हैं.
मन में थी व्यापार खड़ा करने की इच्छा
रूपेश दुबे आज अपने क्षेत्र को एक खास कैफे देकर बेहद खुश हैं और वे अपनी संघर्ष की कहानी भी साझा करते हैं. रूपेश बताते हैं कि वे पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड के अंतर्गत किरतपुर मठिया गांव के रहने वाले हैं. उनका कहना है कि पहले वे गल्फ कंट्री में कंस्ट्रक्शन लाइन में सुपरवाइजर के पद पर काम करते थे. उन्हें वहां ठीक-ठाक पैसा भी मिल जाता था, लेकिन उनके मन में हमेशा ही अपना व्यापार खड़ा करने का विचार आता था. साथ ही वे अपने क्षेत्र में कुछ अलग करना चाहते थे.
वर्षों की जमापूंजी से खड़ा किया कैफे
जब वे दुबई की चमक-धमक वाले होटल देखते, तो उनके मन में भी होटल खोलने का विचार आता और नेपाल में उन्होंने झोपड़ी वाले होटल भी देखे थे. फिर क्या था? उन्होंने दोनों कॉन्सेप्ट को मिलाकर अपना एक अलग कॉन्सेप्ट तैयार कर लिया और अपने गांव के पास ही अपने वर्षों की जमापूंजी के सहारे एक खास चमक-धमक वाला और झोपड़ी के चैंबर वाला कैफे खोल लिया.
अब गांव के लोगों को झोपड़ी के साथ-साथ शहर की खास लाइटिंग का मेल पसंद आने लगा और धीरे-धीरे उनके कैफे ने रफ्तार पकड़ ली. रूपेश बताते हैं कि आज वे बहुत खुश हैं कि उन्होंने अपने क्षेत्र को एक खास कैफे दिया है, जहां दूर-दूर से पर्यटक और सैलानी भी खाने आते हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें