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क्या आप सोच सकते हैं कि प्लास्टिक से स्वादिष्ट कुकीज बन सकती हैं. अमेरिका के दक्षिणी इलिनोइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह कमाल कर दिखाया है. नासा के सहयोग से उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो प्लास्टिक और खेती के कचरे को खाने में बदल देती है. इसके लिए उन्होंने यीस्ट का इस्तेमाल किया है.

प्लास्टिक की बोतल से बनी कुकीज खाएंगे आप? नासा का यह सीक्रेट प्रोजेक्ट क्या हैZoom

यह कुकी बेकार हो चुके पौधों के मटीरियल और प्लास्टिक से बनाई गई है. इससे पनडुब्बियों से लेकर अंतरिक्ष यानों तक, हर जगह इंसानों का पेट भरा जा सकता है. (Image Credit: SIU Carbondale Communications)

नई दिल्ली: प्लास्टिक आज हमारी धरती के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुका है. यह आसानी से गलता नहीं है और हमारे शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है. लेकिन दक्षिणी इलिनोइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक बड़ा चमत्कार किया है. उन्होंने नासा के सपोर्ट वाले एक प्रोजेक्ट के तहत प्लास्टिक को खाने लायक बना दिया है. वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक और खेती के कचरे को स्वादिष्ट 3डी प्रिंटेड कुकीज में बदल दिया है. इस प्रोसेस में यीस्ट का इस्तेमाल किया गया है जो प्लास्टिक को प्रोटीन में बदल देता है. अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की मीटिंग में इस तकनीक को दुनिया के सामने पेश किया गया. यह इनोवेशन न सिर्फ अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स के काम आएगा बल्कि दुनिया की भूख मिटाने में भी मदद करेगा.

आखिर प्लास्टिक को खाने में कैसे बदला जा रहा है?

यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है. लेकिन यह सौ फीसदी सच है. इस प्रोजेक्ट को लीड करने वाले माइक्रोबायोलॉजिस्ट लाहिरू जयकोडी ने कहा, ‘प्लास्टिक और खाना दोनों कार्बन से बने हैं’. इसी लॉजिक पर काम करते हुए टीम ने पीईटी प्लास्टिक पर फोकस किया. इसी प्लास्टिक से पानी की बोतलें बनती हैं. इस प्लास्टिक में कार्बन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इसलिए इसे प्रोटीन वाले मॉलिक्यूल्स में बदलना मुमकिन है. इसके लिए लैब में केमिकल एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक नेचुरल तरीका चुना. उन्होंने इसके लिए यीस्ट यानी खमीर का सहारा लिया.

क्या यीस्ट सच में प्लास्टिक को हजम कर सकता है?

वैज्ञानिकों ने बेकिंग में इस्तेमाल होने वाले यीस्ट को रिप्रोग्राम किया. उन्होंने इसे इस तरह तैयार किया कि यह प्लास्टिक और खेती के कचरे को खा सके. सबसे पहले प्लास्टिक और कॉर्न स्टॉक्स जैसे कचरे को बहुत हाई टेम्परेचर पर गर्म किया जाता है. इस प्रोसेस को ऑक्सीडेटिव हाइड्रोथर्मल डिसॉल्यूशन कहा जाता है. इसके बाद यह कचरा छोटे टुकड़ों में टूट जाता है. फिर इस सलूशन में रिप्रोग्राम किया गया यीस्ट डाल दिया जाता है. यह यीस्ट इस कचरे को खाकर फैट, एसिड और प्रोटीन जैसे फूड मॉलिक्यूल्स बनाता है.

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…

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