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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की लंबी बुंदिया एक ऐसी पारंपरिक मिठाई है, जो कभी शादियों और सामाजिक आयोजनों का अहम हिस्सा हुआ करती थी. बेसन और चीनी से तैयार होने वाली यह मिठाई अपने अनोखे स्वाद और खास बनाने की प्रक्रिया के लिए जानी जाती है. बदलते दौर में भले ही इसकी लोकप्रियता कुछ कम हुई हो, लेकिन आज भी यह मिठाई लोगों को पुराने दिनों की याद दिला देती है.
बहराइच. हम बात कर रहे हैं बेसन और चीनी से बनने वाली खास मिठाई लम्बी बुंदिया की जिसको यूपी में खूब पसंद किया जाता है, जो बच्चों संग सभी को पसंद आती है. जिसको कुछ खास तरीके से बहराइच जिले में बनाकर तैयार किया जाता है. पहले जमाने के लोग इसका सेवन शादियों में परंपरागत किया करते थे, बदलते वक्त के साथ अब धीरे-धीरे लोग इस परंपरा को भी भूल चुके हैं.
हम जिस लंबी बुंदियो की बात कर रहे हैं इसको खास तरीके से आधी उंगली के बराबर बेसन को मोटा सेव बनाकर फ्राई किया जाता है, और फिर ठंडा हो जाने के बाद चीनी पानी से चासनी बनाई जाती है. फिर एक लोहे की कढ़ाई में बेसन के इस सेव को डालकर धीरे-धीरे उस पर चाशनी चढ़ाई जाती है, जिसको चढ़ाने में दो लोगों की आवश्यकता पड़ती है.
एक लोग कढ़ाई में बेसन के सेव के ऊपर धीरे-धीरे चाशनी डालता जाता है तो दूसरे लोग कढ़ाई को निरंतर बार-बार हिला कर बुंदिया को पलड़ता जाता है, जिससे चाशनी पूरी तरीके से हर एक पर अच्छे से चढ़ जाए, यह प्रक्रिया आधे से 1 घंटे की होती है, तब जाकर या बुंदिया तैयार होती है.
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आज के इस महंगाई के युग में भी इसकी कीमत मात्र ₹60 प्रति केजी के हिसाब से है, यानी कि इसका स्वाद आप ₹60 प्रति केजी के हिसाब से ले सकते हैं.
वहीं अगर आप दुकानदार है या बिक्री के लिए लेते हैं तो एक कुंटल आपको मात्र 5500 का मिल जाता है. जिसको बहराइच जिले में साबिर अली नाम के शख्स पिछले कई सालों से बनाने का काम करते हैं जिनकी दुकान बहराइच शहर के किनारे दरगाह शरीफ के पास पुराना स्टेट बैंक के सामने मौजूद है.
बुजुर्ग बताते हैं पहले शादियों में परंपरागत इसका सेवन कराया जाता था जिसको रसावल के नाम से भी जाना जाता था अब जो रस्म बदलकर गांव देहात में भात खाने की हो गई है, यह रस्म पहले रसावल और दूध खाने की हुआ करती थी. बदलते वक्त के साथ-साथ अब लोग या बात भूल भी चुके हैं. अब ग्रामीण इलाकों में इसका सेवन खाकर पानी पीने के रूप में किया जाता है.