ऐपल (Apple) की भारत में कमाई को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय ग्राहकों की पसंद और उनके खर्च करने का तरीका कितनी तेजी से बदल रहा है. अब लोग महंगे स्मार्टफोन और प्रीमियम गैजेट्स पर ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं. यही वजह है कि दिग्गज टेक कंपनी ऐपल इंडिया की कमाई आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी (FMCG – रोजमर्रा का सामान बनाने वाली) कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड से दोगुनी होने का अनुमान लगाया गया है.
कोटक म्यूचुअल फंड (Kotak Mutual Fund) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 (वित्त वर्ष 2025-26) में ऐपल इंडिया (Apple India) की कुल कमाई 1.42 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. इसके मुकाबले हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड यानी एचयूएल (HUL) की कमाई 64,468 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. यह डेटा कंपनियों की तरफ से दी गई जानकारी और एवेंडस स्पार्क (Avendus Spark) के अनुमानों पर आधारित है. बीते पांच सालों में ऐपल की कमाई में 6.2 गुना की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो एचयूएल के मुकाबले बहुत ज्यादा है.
क्यों बदल रही है भारतीयों की पसंद
अगर हम पांच साल पहले (वित्त वर्ष 2020-21) के आंकड़ों को देखें, तो उस समय कहानी बिल्कुल अलग थी. तब आईफोन (iPhone) बनाने वाली कंपनी ऐपल की भारत में कमाई महज 22,845 करोड़ रुपये थी, जो एचयूएल की 47,028 करोड़ रुपये की कमाई के आधे से भी कम थी. लेकिन अब पासा पूरी तरह पलट चुका है.
कोटक म्यूचुअल फंड का कहना है कि ऐपल की इस रफ्तार से साफ है कि भारत में अमीर और पैसे वाले ग्राहकों का दबदबा बढ़ रहा है. रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प बात कही गई है कि ऐपल ने यह मुकाम तब हासिल किया है, जब वह देश के बेहद छोटे और अमीर हिस्से को ही अपनी सेवाएं देती है. आज के समय में महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट्स खरीदना एक ट्रेंड बन चुका है, खासकर स्मार्टफोन के मामले में यह बदलाव बहुत साफ नजर आ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों में देश के अंदर बिकने वाले कुल मोबाइल फोन की संख्या में तो कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन 30,000 रुपये से महंगे प्रीमियम स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 20 परसेंट से बढ़कर 26 परसेंट हो गई है. साल 2020 से 2025 के बीच महंगे फोन की बिक्री हर साल करीब 5.9 परसेंट की रफ्तार से बढ़ी है. दूसरी तरफ, आम लोगों के बजट वाले सस्ते फोन का मार्केट 1.2 परसेंट घट गया है. इससे पता चलता है कि अमीर ग्राहकों और आम ग्राहकों के खर्च करने के तौर-तरीकों में एक बड़ा अंतर आ चुका है.
मार्केट में ऐपल का जलवा
काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के आखिर तक ऐपल ने भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में अपनी अब तक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. कुल बिकने वाले फोन में ऐपल की हिस्सेदारी 9 परसेंट थी, लेकिन अगर कमाई या वैल्यू के हिसाब से देखें, तो पूरे मार्केट के 28 परसेंट हिस्से पर ऐपल का कब्जा था. साल 2026 की पहली तिमाही यानी शुरुआती तीन महीनों में भी ऐपल ने इस 9 परसेंट की हिस्सेदारी को बरकरार रखा है.
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कोई ग्राहक आईफोन खरीदता है, तो वह धीरे-धीरे ऐपल के पूरे इकोसिस्टम से जुड़ जाता है. आईफोन की वजह से कंपनी की अन्य सर्विसेज, मैकबुक (Mac) और आईपैड (iPad) की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है.
आईफोन के अलावा ऐपल अब भारत के पर्सनल कंप्यूटर और टैबलेट मार्केट में भी तेजी से पैर पसार रही है. जानकारों को उम्मीद है कि इस साल मैकबुक और आईपैड की कमाई में जोरदार बढ़त देखने को मिलेगी. इसकी बड़ी वजह कॉलेज के छात्रों और बड़ी कंपनियों की तरफ से बढ़ती मांग, ऐपल के नए स्टोर्स का खुलना और पुराने मॉडल्स पर मिलने वाला डिस्काउंट है. ऐपल अपनी रणनीति के तहत पुराने मैकबुक मॉडल्स को कम कीमत पर बेच रही है, जिससे इसकी बिक्री काफी बढ़ गई है. टैबलेट मार्केट में आईपैड को सैमसंग और दूसरी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है, इसके बावजूद महंगे और प्रीमियम सेगमेंट में आज भी आईपैड का ही दबदबा है.
बदल रहा कमाई और खर्च का तरीका
कोटक म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट इस बात की तरफ भी इशारा करती है कि भारत में अब कमाई और खर्च का पूरा तरीका बदल रहा है. देश में मार्केट की ग्रोथ अब उस अमीर वर्ग के भरोसे चल रही है, जो महंगे स्मार्टफोन, ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन, म्यूजिक कॉन्सर्ट, घूमना-फिरना और डिजिटल सर्विसेज पर दिल खोलकर पैसा खर्च कर रहा है.
पिछले दो दशकों के आंकड़ों को देखें, तो भारतीय परिवारों के कुल खर्च में खाने-पीने की चीजों पर होने वाला खर्च लगातार कम हुआ है. इसकी जगह अब मोबाइल, गाड़ियां, मकान का किराया और मनोरंजन जैसी चीजों पर लोग ज्यादा पैसे लगा रहे हैं. यह बदलाव दिखाता है कि देश की तरक्की और लोगों की आकांक्षाएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन इसके साथ ही समाज में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई भी चौड़ी होती जा रही है.