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Tasty Pakora Recipe: मानसून का मौसम आते ही चाय और पकौड़ों का स्वाद लोगों की पहली पसंद बन जाता है. कोई पालक के पकौड़े बनाता है तो कोई प्याज के पकौड़ों का लुत्फ उठाता है. अगर आप भी बारिश की फुहारों के बीच कुछ नया और स्वादिष्ट ट्राई करना चाहते हैं, तो पहाड़ों में बनने वाली अरबी (पिनालू) के पत्तों की पकौड़ी आपके टी-टाइम को खास बना सकती है. खास मसालों और पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले ये पकौड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से बेहद स्वादिष्ट होते हैं. गर्मागर्म चाय के साथ इनका जायका ऐसा लगता है कि एक बार खाने के बाद लोग बार-बार इसकी फरमाइश करने लगते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बनाना भी काफी आसान है. आइए जानते हैं अरबी के पत्तों की स्वादिष्ट पहाड़ी पकौड़ी बनाने का पारंपरिक तरीका.
बागेश्वर: मानसून के मौसम में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अरबी के ताजे पत्ते बड़ी मात्रा में उगते हैं. स्थानीय भाषा में इन्हें पिनालू के पत्ते कहा जाता है. बारिश के दौरान इन पत्तों में ताजगी और स्वाद अधिक होता है, इसलिए लोग इनसे तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं. खासकर कुरकुरे पकौड़े पहाड़ों के घरों में बेहद पसंद किए जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ये पारंपरिक व्यंजन वर्षों से बनाया जाता रहा है. शाम की चाय के साथ इन पकौड़ों का स्वाद लोगों को खूब भाता है. कुशल गृहणी किरन पांडे ने लोकल 18 को बताया मानसून के दिनों में परिवार के सदस्य और मेहमान विशेष रूप से इन पकौड़ों की मांग करते हैं.
स्वादिष्ट पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले अच्छे और ताजे पत्तों का चयन करना जरूरी होता है. इसके लिए हरे, कोमल और बड़े आकार के पत्ते पकौड़ों के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं. पत्तों के डंठल और मोटी नसों को निकालकर उन्हें अच्छी तरह साफ किया जाता है. इससे पकौड़ों का स्वाद बेहतर होता है, और रोल बनाना भी आसान हो जाता है. ग्रामीण महिलाएं पत्तों को कई बार पानी से धोने की सलाह देती हैं, ताकि उन पर लगी मिट्टी और धूल पूरी तरह हट जाए. साफ और ताजे पत्तों का इस्तेमाल करने से पकौड़ों में प्राकृतिक स्वाद बना रहता है. यही छोटी-छोटी सावधानियां इस पारंपरिक व्यंजन को और भी स्वादिष्ट बना देती हैं.
गुहिया के पत्तों के पकौड़ों की सबसे बड़ी खासियत उनका मसालेदार बैटर होता है. इसे तैयार करने के लिए बेसन और चावल का आटा मिलाया जाता है, जिससे पकौड़े कुरकुरे बनते हैं. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, हींग, अजवाइन, नमक और गरम मसाला मिलाया जाता है. सभी सामग्री को अच्छी तरह फेंटकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है. बैटर जितना संतुलित होगा, पकौड़ों का स्वाद उतना ही बेहतर होगा. मसालों की खुशबू और अरबी के पत्तों का स्वाद मिलकर एक अलग ही जायका तैयार करते हैं. ये व्यंजन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है.
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अरबी के पत्तों में प्राकृतिक रूप से कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो कई बार गले में खुजली या खराश पैदा कर सकते हैं. इसी वजह से पारंपरिक तरीके में बैटर तैयार करते समय इमली का गूदा या नींबू का रस मिलाया जाता है. खट्टापन इन तत्वों के प्रभाव को कम करने में मदद करता है. पहाड़ों में बुजुर्ग महिलाएं वर्षों से इस घरेलू उपाय का उपयोग करती आ रही हैं. इसके अलावा इमली और नींबू पकौड़ों के स्वाद को भी बढ़ाते हैं. इनकी वजह से पकौड़ों में हल्का खट्टापन आता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है. इसलिए पिनालू के पत्तों के पकौड़े बनाते समय इस महत्वपूर्ण सामग्री को कभी नहीं छोड़ा जाता है.
पकौड़ों को सीधे तलने के बजाय पहले स्टीम करना किया जाता है. बैटर लगाने के बाद पत्तों को रोल का आकार देकर लगभग 20 मिनट तक भाप में पकाया जाता है. इससे मसाले और पत्ते आपस में अच्छी तरह मिल जाते हैं. स्टीम किए गए रोल को ठंडा होने के बाद गोल स्लाइस में काटा जाता है. इस प्रक्रिया से पकौड़ों की बनावट बेहतर होती है, वे अंदर से मुलायम बने रहते हैं. स्टीमिंग से स्वाद और पोषण दोनों सुरक्षित रहते हैं. यही पारंपरिक तरीका इन पकौड़ों को सामान्य पकौड़ों से अलग बनाता है, लोगों को खास स्वाद का अनुभव कराता है.
स्टीम किए गए स्लाइस को सरसों के तेल में हल्का फ्राई किया जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में सरसों का तेल लंबे समय से पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है. यह पकौड़ों को खास खुशबू और स्वाद देता है. शैलो फ्राई करने से पकौड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम बने रहते हैं. कई परिवार इन्हें तवे पर भी सेंकते हैं, ताकि तेल की मात्रा कम रहे. पकौड़ों का सुनहरा रंग और कुरकुरी परत इन्हें और आकर्षक बनाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी इसी पारंपरिक तरीके से पिनालू के पत्तों के पकौड़े तैयार करते हैं. यह तरीका स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखता है.
मानसून के मौसम में जब बाहर बारिश हो रही हो, तब गर्मागर्म पकौड़े और चाय का स्वाद दोगुना हो जाता है. गुहिया के पत्तों के पकौड़े उत्तराखंड में शाम के नाश्ते के रूप में काफी लोकप्रिय हैं. लोग इन्हें हरी चटनी, टमाटर की चटनी या दही के साथ भी खाना पसंद करते हैं. घर में मेहमान आने पर भी यह व्यंजन खास तौर पर बनाया जाता है. बच्चों और युवाओं को इसका कुरकुरापन खूब पसंद आता है. एक बार इन पकौड़ों का स्वाद चखने के बाद लोग दोबारा इन्हें खाने की इच्छा जरूर जताते हैं. मानसून में इनकी मांग बढ़ जाती है.
डॉ ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि अरबी के पत्ते केवल स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं. इनमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं. ये पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. संतुलित मात्रा में सेवन करने पर ये स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं. पहाड़ों में लोग लंबे समय से इन पत्तों का उपयोग पारंपरिक भोजन के रूप में करते आ रहे हैं. प्राकृतिक रूप से उपलब्ध यह सब्जी स्थानीय खानपान और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. स्वाद और पोषण का यह अनोखा मेल मानसून के मौसम में लोगों की पहली पसंद बन जाता है.