Last Updated:

भारत के पहाड़ी इलाकों में एक ऐसी अनोखी चाय पी जाती है जिसमें चीनी नहीं बल्कि नमक और मक्खन डाला जाता है. लद्दाख, तिब्बत और हिमालयी क्षेत्रों में सदियों से पी जाने वाली यह बटर टी न सिर्फ ठंड से बचाने में मदद करती है बल्कि शरीर को ऊर्जा भी देती है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

भारत में ज्यादातर लोग सुबह की शुरुआत मीठी दूध वाली चाय से करते हैं, लेकिन देश के कई पहाड़ी इलाकों में एक ऐसी चाय भी पी जाती है जिसमें चीनी नहीं, बल्कि नमक डाला जाता है. पहली बार सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन लद्दाख, तिब्बत और हिमालयी क्षेत्रों में यह चाय सदियों से लोगों की जिंदगी का हिस्सा रही है. वहां के ठंडे मौसम और कठिन जीवनशैली में यह चाय शरीर को गर्म रखने और ऊर्जा देने के लिए काफी लोकप्रिय मानी जाती है.

नमक वाली चाय सबसे ज्यादा लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और तिब्बती इलाकों में पी जाती है. कश्मीर में भी “नून चाय” या “शीर चाय” काफी मशहूर है, जिसका स्वाद हल्का नमकीन होता है. वहीं लद्दाख और तिब्बती क्षेत्रों में इसे “बटर टी” या “गुर्गुर चाय” कहा जाता है. ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ स्वाद की बात नहीं, बल्कि जरूरत भी मानी जाती है. वहां तापमान कई बार शून्य से नीचे चला जाता है, इसलिए लोग ऐसी चीजें पीना पसंद करते हैं जो शरीर को लंबे समय तक गर्म रख सकें.

क्या है इसका इतिहास?
माना जाता है कि नमक वाली चाय की शुरुआत तिब्बत और मध्य एशिया के पहाड़ी इलाकों से हुई थी. पुराने समय में वहां रहने वाले लोग लंबे सफर और ठंडे मौसम में खुद को गर्म रखने के लिए चाय में मक्खन और नमक मिलाकर पीते थे. धीरे-धीरे यह परंपरा हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंच गई. तिब्बत में याक नाम के जानवर के दूध से बने मक्खन का इस्तेमाल इस चाय में किया जाता था. यही वजह है कि इसे “बटर टी” कहा जाने लगा. कई इतिहासकार मानते हैं कि यह चाय व्यापारिक रास्तों और बौद्ध संस्कृति के जरिए अलग-अलग पहाड़ी इलाकों में फैली.

कैसे बनाई जाती है नमक वाली चाय?
इस चाय को बनाने का तरीका सामान्य चाय से काफी अलग होता है. इसमें चायपत्ती को लंबे समय तक उबाला जाता है और फिर उसमें नमक, मक्खन और कई जगह दूध मिलाया जाता है. लद्दाख में इसे खास लकड़ी के बर्तन में फेंटा भी जाता है, जिससे इसका टेक्सचर क्रीमी हो जाता है. कश्मीर की नून चाय में गुलाबी रंग लाने के लिए बेकिंग सोडा भी डाला जाता है. वहीं तिब्बती बटर टी ज्यादा गाढ़ी और मक्खन वाली होती है.

ठंडे मौसम में क्यों मानी जाती है फायदेमंद?
पहाड़ी इलाकों में लोग मानते हैं कि यह चाय शरीर को लंबे समय तक गर्म रखती है. मक्खन और फैट की वजह से शरीर को ऊर्जा मिलती है, जबकि नमक शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है. यही कारण है कि ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोग दिन में कई बार इसे पीते हैं. पहले यह चाय सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित थी, लेकिन अब सोशल मीडिया और ट्रैवल व्लॉग्स की वजह से इसकी चर्चा पूरे देश में होने लगी है. कई ट्रैवलर्स पहाड़ों में जाकर इस अनोखी चाय को ट्राई करते हैं और उसका वीडियो शेयर करते हैं. अब बड़े शहरों के कुछ कैफे में भी बटर टी और नून चाय मिलने लगी है.

About the Author

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



Source link

Write A Comment