नागौर: राजस्थान की रसोई अपने देसी स्वाद, तीखेपन और पारंपरिक व्यंजनों के लिए देशभर में अलग पहचान रखती है. यहां के कई व्यंजन न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि बेहद कम सामग्री और कम समय में भी तैयार हो जाते हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में एक माड़वाड़ का खास नाम दही मिर्च प्याज़ का है, जो विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में काफी पसंद किया जाता है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक यह व्यंजन लोगों की थाली का अहम हिस्सा बना हुआ है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए किसी महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती.

घर में आसानी से उपलब्ध दही, प्याज, हरी मिर्च और लहसुन से यह स्वादिष्ट रेसिपी तैयार हो जाती है. गर्मी के मौसम में यह व्यंजन स्वाद के साथ-साथ ठंडक का एहसास भी कराता है. स्थानीय लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता वर्षों से बनी हुई है और आज भी इसे पारंपरिक राजस्थानी भोजन के साथ बड़े चाव से खाया जाता है. नागौर की निरमा देवी ने बताया कि दही, प्याज, हरी मिर्च और लहसुन के मेल से बनने वाली यह रेसिपी खाने की थाली का स्वाद कई गुना बढ़ा देती है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता और यह रोटी, बाजरे की रोटी या पराठे के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है. इसका जायका इतना खास होता है कि एक बार खाने वाला इसका स्वाद लंबे समय तक नहीं भूल पाता.

इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूरत

निरमा देवी ने बताया कि इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने के लिए 2 मध्यम आकार के प्याज, 10 से 15 हरी मिर्च, 15 से 20 लहसुन की कलियां, 1 कप दही, 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक और 2 बड़े चम्मच तेल की आवश्यकता होती है. तड़के के लिए आधा-आधा छोटा चम्मच राई और जीरा तथा एक चुटकी हींग ली जाती है.

ये है स्पेशल राजस्थानी रेसिपी

उन्होंने बताया कि इस रेसिपी की शुरुआत प्याज और हरी मिर्च को मोटा-मोटा काटने से होती है. इसके बाद सिलबट्टे पर हरी मिर्च, प्याज और लहसुन को दरदरा कूट लिया जाता है. पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर कूटा गया मिश्रण इस डिश को अलग और देसी स्वाद देता है. इसके बाद अब एक कड़ाही में तेल गर्म कर उसमें राई, जीरा और हींग का तड़का लगाया जाता है. तड़का तैयार होने के बाद कुटा हुआ प्याज, मिर्च और लहसुन का मिश्रण डालकर अच्छी तरह भून लिया जाता है, ताकि इसकी कच्ची महक खत्म हो जाए. दूसरी ओर एक बर्तन में दही को अच्छी तरह फेंटकर उसमें लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और नमक मिला लिया जाता है. जब प्याज का मिश्रण नरम हो जाए, तब इसमें दही वाला मसाला डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है.

धीमी आंच पर पकाने से निखरकर आता है स्वाद

इसे धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए पकाया जाता है. कुछ ही देर में मसाला गाढ़ा होकर किनारों से तेल छोड़ने लगता है. यही संकेत है कि दही मिर्च प्याज़ पूरी तरह तैयार हो चुकी है. लास्ट में इसे हरे धनिए से सजाकर गर्मागर्म परोसा जाता है. तीखे, खट्टे और मसालेदार स्वाद का यह अनोखा संगम खाने वालों को बार-बार इसका स्वाद लेने पर मजबूर कर देता है. यदि आप राजस्थानी जायकों के शौकीन हैं तो यह रेसिपी आपके लिए जरूर एक बार आजमाने लायक है.



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