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Haryanvi Mirch Kalonji Sabzi: बरसात के मौसम में अगर कुछ चटपटा और देसी खाने का मन है तो हरियाणवी मिर्च-कलौंजी की सब्जी ट्राई कर सकते हैं. मोटी हरी मिर्च में सौंफ, जीरा, मेथी, धनिया, अमचूर और कलौंजी का मसाला भरकर इसे सरसों के तेल में धीमी आंच पर पकाया जाता है. गर्मागर्म रोटी के साथ इसका स्वाद बेहद खास लगता है.
बरसात के मौसम में जब घर पर कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन करता है, तो हरियाणा में मिर्च और कलौंजी की सब्जी खूब पसंद की जाती है. यह सब्जी बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और रोटी के साथ इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है. खासकर बारिश के दिनों में गर्मागर्म रोटी और मसालेदार मिर्च की सब्जी खाने का अपना अलग ही मजा है. सब्जियां महंगी होने पर भी इसे कम सामान में आसानी से घर पर बनाया जा सकता है.
Local18 से बातचीत में महेंद्र सैनी बताते है मैं इसी बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं. हरियाणा में मिर्च और कलौंजी की सब्जी घरों में काफी पसंद की जाती है. हरियाणा के गांवों में इस तरह की चटपटी सब्जियां आज भी बड़े शौक से बनाई जाती हैं. मोटी हरी मिर्च लेकर उसमें मसालों का मिश्रण भर दिया जाता है और फिर सरसों के तेल में धीरे-धीरे पकाया जाता है. अच्छी तरह भुनने के बाद मिर्च नरम हो जाती है और मसालों का स्वाद इसमें पूरी तरह उतर जाता है.
महेंद्र सैनी बताते हैं कि इस सब्जी में कलौंजी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इसका स्वाद काफी तेज होता है. एक पाव मिर्च में करीब दो से तीन कलौंजी डालना ठीक रहता है. ज्यादा कलौंजी डालने पर सब्जी का स्वाद खट्टापन लग सकता है. 250 ग्राम मिर्च में 3 कलौंजी बहुत हैं. इसके साथ सौंफ, जीरा और मेथी दाना डालने से मसाले का स्वाद और अच्छा हो जाता है. यही मसालों का मेल इस सब्जी को खास बनाता है.
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महेंद्र सैनी बताते हैं कि सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छी तरह धोकर कपड़े से सुखा लेना चाहिए. इसके बाद मिर्च में लंबाई की तरफ से चीरा लगाएं, लेकिन डंठल को अलग न करें. अब एक बर्तन में सौंफ, कलौंजी, जीरा, मेथी दाना, धनिया पाउडर, हल्दी, अमचूर और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. चाहें तो इसमें कुटा हुआ लहसुन भी डाल सकते हैं. थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाने से मसाला मिर्च के अंदर आसानी से भर जाता है और पकाते समय बाहर भी नहीं निकलता.
महेंद्र सैनी बताते हैं कि मसाला तैयार होने के बाद उसे एक-एक करके हरी मिर्च के अंदर भरना चाहिए. अब कढ़ाई में तीन से चार चम्मच सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें. तेल गर्म होने पर इसमें थोड़ी सी हींग, जीरा और कलौंजी का तड़का लगाएं. इसके बाद मसाला भरी हुई मिर्च को सावधानी से कढ़ाई में डालें. गैस की आंच धीमी रखें और कढ़ाई को ढककर करीब पांच से सात मिनट तक पकाएं. बीच-बीच में मिर्च को पलटते रहें, ताकि हर तरफ मसाला अच्छी तरह भुन सके.
महेंद्र सैनी बताते हैं कि जब मिर्च अच्छी तरह पक जाती है और मसाले से तेल अलग दिखाई देने लगता है, तब समझिए सब्जी तैयार है. इसे ज्यादा तेज आंच पर पकाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि धीमी आंच पर पकाने से मिर्च अंदर तक नरम होती है और मसालों का स्वाद भी अच्छी तरह आता है. तैयार मिर्च और कलौंजी की सब्जी को गर्मागर्म रोटी के साथ परोसा जा सकता है. दाल और रोटी के साथ भी यह सब्जी काफी स्वादिष्ट लगती है और खाने का स्वाद बढ़ा देती है.
महेंद्र सैनी बताते हैं कि गांव में कलौंजी को लेकर भी लोगों की अपनी अलग जानकारी है. पेड़ से कलौंजी तोड़ते समय उसमें गोंद जैसी चिपचिपी चीज लगी रहती है, इसलिए इसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जाता. कलौंजी को तोड़ने के बाद पानी में डालकर अच्छी तरह साफ किया जाता है, जिससे उसकी चिपचिपाहट और दूसरी गंदगी निकल जाती है. इसके बाद इसे सुखाकर इस्तेमाल किया जाता है. गांव में लोग काफी समय से इस तरीके से कलौंजी को तैयार करते हैं और फिर इसे खाने में मसाले के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.
महेंद्र सैनी बताते हैं कि कलौंजी की कीमत भी समय और बाजार के हिसाब से बदलती रहती है. मौजूदा समय में मंडी में कलौंजी करीब 50 से 60 रुपये किलो तक बिक रही है. इसकी थोड़ी सी मात्रा ही सब्जी का स्वाद बदलने के लिए काफी होती है, इसलिए घर में इसे ज्यादा मात्रा में खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. मिर्च और कलौंजी की यह सब्जी खासतौर पर बरसात के मौसम में बनाई जा सकती है. कम सामान में तैयार होने वाली यह चटपटी सब्जी हरियाणवी खाने का अलग स्वाद देती है.