सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और व्रत-उपवास के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान लोग फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं. अगर आप व्रत के दौरान कुछ मीठा और पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो लौकी का हलवा एक बेहतरीन विकल्प है. लौकी से बना यह हलवा स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी होता है. दूध, ड्राई फ्रूट्स और इलायची की खुशबू से तैयार यह मिठाई सावन के व्रत में ऊर्जा देने का काम करती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान रेसिपी.
आवश्यक सामग्री
500 ग्राम लौकी
500 मिली फुल क्रीम दूध
4 से 5 बड़े चम्मच चीनी या स्वादानुसार
2 बड़े चम्मच घी
8 से 10 काजू
8 से 10 बादाम
1 बड़ा चम्मच किशमिश
4 से 5 इलायची का पाउडर
कुछ केसर के धागे
बनाने की विधि
1. लौकी तैयार करें
सबसे पहले लौकी को अच्छी तरह धोकर छील लें. इसके बाद इसे कद्दूकस कर लें. कद्दूकस की हुई लौकी को हल्के हाथों से दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल दें. यदि लौकी के बीज बड़े हों तो उन्हें हटा दें.
2. ड्राई फ्रूट्स भून लें
एक कड़ाही में 1 चम्मच घी गर्म करें और उसमें काजू, बादाम और किशमिश को हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इन्हें निकालकर अलग रख दें.
3. लौकी को पकाएं
अब उसी कड़ाही में बचा हुआ घी डालें और कद्दूकस की हुई लौकी डालकर 5 से 7 मिनट तक भूनें. इससे लौकी की कच्ची महक खत्म हो जाएगी और स्वाद बेहतर बनेगा.
4. दूध मिलाएं
जब लौकी अच्छी तरह भुन जाए तो इसमें दूध डाल दें। गैस की आंच मध्यम रखें और मिश्रण को लगातार चलाते रहें। दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा और लौकी इसे सोख लेगी।
5. चीनी और इलायची डालें
दूध के लगभग सूख जाने पर इसमें चीनी डालें. चीनी डालने के बाद हलवा थोड़ा पतला होगा, इसलिए इसे दोबारा अच्छी तरह पकाएं. अब इलायची पाउडर और केसर डालकर मिलाएं.
6. ड्राई फ्रूट्स से सजाएं
जब हलवा कड़ाही छोड़ने लगे और घी ऊपर दिखने लगे, तब इसमें भुने हुए काजू, बादाम और किशमिश डाल दें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.
परोसने का तरीका
तैयार लौकी के हलवे को गर्मागर्म या ठंडा दोनों तरह से परोसा जा सकता है. ऊपर से कटे हुए मेवे डालकर इसकी सजावट करें. व्रत के दौरान यह हलवा स्वाद के साथ भरपूर पोषण भी देता है.
स्वाद बढ़ाने के टिप्स
ज्यादा रिच फ्लेवर के लिए मावा या खोया मिला सकते हैं.
चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
हलवे को धीमी आंच पर पकाने से इसका स्वाद अधिक अच्छा आता है.
व्रत के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री का ही प्रयोग करें.