चाय भारतीय घरों की धड़कन है। आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोगों की सुबह की शुरुआत चाय के साथ होती है। सुबह सुबह एक अच्छी चाय मिल जाए तो माइंड फ्रेश हो जाता है। लेकिन अक्सर थोड़ी सी चूक से इसका स्वाद फीका पड़ जाता है। कई लोगों को परफेक्ट चाय बनाने नहीं आती। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि बर्तन में पहले पानी डाला जाए या दूध? इसका सही जवाब चाय बनाने की पारंपरिक विधि में छिपा है। अगर आप एकदम परफेक्ट, कड़क चाय चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है। 

चाय बनाने का सही तरीका क्या है?

स्टेप 1: सबसे पहले बर्तन में पानी डालें। जब पानी हल्का गर्म हो जाए, तब इसमें कुटी हुई अदरक, इलायची, लौंग या चाय मसाला डालें। मसालों को पानी के साथ 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह उबलने दें। इससे मसालों का असली अर्क और सुगंध पानी में पूरी तरह घुल जाती है।

स्टेप 2: इसके बाद पानी में चाय पत्ती डालें और आंच को धीमा कर दें। चाय पत्ती को पानी में उबलने का समय मिलना चाहिए ताकि वह अपना बेहतरीन रंग और कड़क स्वाद छोड़ सके।

स्टेप 3: जब पानी, मसाले और चाय पत्ती का काढ़ा अच्छे से पक जाए, तब इसमें दूध मिलाएं। दूध डालने के बाद चाय को धीमी आंच पर 2 से 3 बार उबालें ताकि दूध मसालों और चाय पत्ती के साथ अच्छी तरह मिल जाए।

स्टेप 4: चीनी हमेशा सबसे आखिर में या दूध पकाने के बाद डालनी चाहिए, क्योंकि चीनी पहले डालने से चाय पत्ती का रंग और स्वाद उभरकर नहीं आ पाता।

पहले दूध डालने से क्या नुकसान होता है?

यदि आप बर्तन में पहले दूध डाल देते हैं, तो दूध में मौजूद फैट और प्रोटीन चाय पत्ती के दानों पर एक परत बना लेते हैं। इससे चाय पत्ती अपना रंग और कड़कपन पूरी तरह नहीं छोड़ पाती। इसके अलावा, मसालों का स्वाद भी दूध में सही से नहीं घुल पाता और चाय में वह सोंधापन नहीं आ पाता जिसकी उम्मीद की जाती है। अधिक देर तक दूध को चाय पत्ती के साथ उबालने से चाय का स्वाद अजीब सा हो सकता है।





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