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How to Make Amchoor at Home: घर पर अमचूर बनाने के लिए करीब 20 से 30 दिन के कच्चे आम सबसे अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि इस समय इनका गूदा सख्त और खट्टा होता है. कुशल गृहणी गीता रावल के अनुसार, आमों को अच्छी तरह धोकर, गुठली समेत लंबे टुकड़ों में काटकर उन पर हल्दी-नमक लगाया जाता है और फिर तेज धूप में एक हफ्ते तक सुखाया जाता है. अच्छी तरह सूखने के बाद इसे जालीदार कपड़े या सूती थैली में भरकर महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिसका इस्तेमाल अचार और सिलबट्टे पर स्वादिष्ट चटनी बनाने में होता है.
कुशल गृहणी गीता रावल बताती है कि अमचूर बनाने के लिए पूरी तरह विकसित या पके आम नहीं, बल्कि करीब 20 से 30 दिन के कच्चे आम सबसे अच्छे माने जाते हैं. इस अवस्था में आम का गूदा सख्त होता है और उसमें हल्की खटास रहती है. यही खटास बाद में अचार और चटनी का स्वाद बढ़ाती है. बड़े या पके आम सुखाने पर उतने अच्छे परिणाम नहीं देते. इसलिए शुरुआती अवस्था के छोटे कच्चे आमों का ही चयन किया जाता है.
अमचूर बनाने की शुरुआत आमों की सफाई से होती है. जमीन पर गिरे आमों में मिट्टी या अन्य गंदगी लगी हो सकती है, इसलिए उन्हें साफ पानी से कई बार धोया जाता है. साफ होने के बाद आमों का अतिरिक्त पानी सूखने दिया जाता है. इससे सुखाते समय उनमें फफूंदी लगने की संभावना कम रहती है. ग्रामीण इस चरण को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि अच्छी सफाई से तैयार अमचूर लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और उसका स्वाद भी बेहतर बना रहता है.
धोने के बाद कच्चे आमों को लंबे आकार में काटा जाता है. खास बात यह है कि इन्हें गुठली सहित ही काटा जाता है. इससे सुखाने के दौरान आम का प्राकृतिक स्वाद और बनावट बनी रहती है. कटे हुए टुकड़ों को एक साफ बर्तन में रखा जाता है. इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होती है. पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कई परिवार यह काम हाथ से करते हैं, और पारंपरिक तरीके को ही प्राथमिकता देते हैं.
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कटे हुए आमों पर हल्दी और नमक लगाया जाता है, हालांकि कई लोग बिना हल्दी और नमक के भी इन्हें सुखाते हैं. हल्दी और नमक लगाने से स्वाद बढ़ने के साथ-साथ टुकड़े लंबे समय तक सुरक्षित भी रहते हैं. इसके बाद इन्हें साफ कपड़े या बांस की टोकरी पर फैलाकर तेज धूप में रखा जाता है. बीच-बीच में टुकड़ों को पलटते भी रहते हैं ताकि हर तरफ से समान रूप से सूख सकें.
अमचूर तैयार होने में मौसम के अनुसार लगभग एक सप्ताह का समय लगता है. लगातार अच्छी धूप मिलने पर आम के टुकड़े पूरी तरह सूखकर कड़क हो जाते हैं. यही अवस्था अमचूर की पहचान मानी जाती है. यदि टुकड़ों में नमी रह जाए तो वे जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए ग्रामीण पूरी सावधानी के साथ उन्हें तब तक सुखाते हैं, जब तक उनमें बिल्कुल भी नमी न रह जाए.
पूरी तरह सूखने के बाद अमचूर को जालीदार कपड़े या साफ सूती थैली में भरकर रखा जाता है. इससे हवा का संचार बना रहता है और नमी नहीं जमती. कई परिवार इसे कांच या स्टील के डिब्बों में भी रखते हैं, लेकिन पहले जालीदार कपड़े में रखने की परंपरा आज भी कई गांवों में कायम है. सही तरीके से रखा गया अमचूर कई महीनों तक आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है.
जब अमचूर का उपयोग करना होता है तो उसके चार-पांच टुकड़ों को करीब एक घंटे पहले पानी में भिगो दिया जाता है. नरम होने के बाद इन्हें सिलबट्टे या मिक्सर में पीसा जाता है. इसमें नमक, हरी मिर्च, लहसुन, धनिया या अन्य मसाले मिलाकर स्वादिष्ट चटनी तैयार की जाती है. इसी तरह मसालों के साथ इसका खट्टा अचार भी बनाया जाता है, जिसे पहाड़ों में भोजन के साथ बड़े चाव से खाया जाता है.
अमचूर केवल स्वाद बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि पहाड़ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. इसमें प्राकृतिक खटास होती है, जो कई व्यंजनों का स्वाद बढ़ाती है. कच्चे आम में प्राकृतिक रूप से विटामिन-सी और कुछ एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, हालांकि सुखाने के बाद उनकी मात्रा कुछ कम हो सकती है. फिर भी अमचूर दाल, सब्जी, चटनी और अचार में खट्टापन देने के लिए आज भी खूब इस्तेमाल किया जाता है.