Why to soak lentils before cooking: दाल का सेवन सेहतमंद रहने के लिए बहुत जरूरी है. प्रोटीन का मुख्य सोर्स होती है दालें. मूंग, मसूर, अरहर, उड़द, चना आदि दालें बेहद पौष्टिक होती हैं. कुछ लोग दाल पकाने के लिए उसे फटाफट एक बार पानी से धोते हैं और कुकर में हल्दी, नमक डालकर पैक कर देते हैं. वहीं, कुछ दाल को धोने के बाद कुछ देर पानी में भिगोकर रखते हैं. तो क्या दाल पकाने से पहले उसे पानी में भिगोकर रखने से दाल स्वादिष्ट बनता है. आखिर दाल पकाने से पहले उसे भिगोकर रखने से क्या होता है? जानें यहां…

दाल पकाने से पहले क्या उसे भिगोना चाहिए?
-काफी लोग चावल पकाते हैं तो उसे धोने के बाद थोड़ी देर पानी में ही भिगोकर रखते हैं. जब आप दाल को भिगोते हैं तो इससे दाल पानी को सोखती है. इससे दाल की ऊपरी परत नर्म हो जाती है. जब पानी और अंदर तक दाल में जाता है तो दाल का अंदर का हार्ड भाग भी सॉफ्ट होने लगता है. दाल जब आप पकाते हैं तो गर्मी भी दाल के अंदर तक अच्छी तरह से पहुंचती है और दाल जल्दी पक भी जाती है.

-दाल पकाने से पहले इसे आप कम से कम 15 से 30 मिनट तक जरूर भिगोकर रखें. खासकर, जो दाल बहुत हार्ड होती है, जो पकने में अधिक समय लेती है जैसे चना दाल. ये जल्दी नहीं पकती है. इसे आप पानी में भिगोकर जरूर रखें.

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-जब आप दाल को बिना धोए पकाते हैं तो इससे ये पकने में अधिक समय लेती है, लेकिन पानी में भिगोने के बाद यही दाल जल्दी पक जाती है. खासकर, जब आप तुअर दाल, चना दाल, साबुत दालें आमतौर पर अधिक समय लेती हैं पकने में. जितनी जल्दी आपकी दाल पकेगी, गैस भी कम खर्च होगा. दाल को पकाने के लिए भगोने की तुलना में कुकर बेस्ट बर्तन है.

-दाल को भिगोने से ये अंदर-बाहर अच्छी तरह से पक जाते हैं, लेकिन बिना भिगोए दाल को पकाने में कई बार अंदर का सख्त भाग कच्चा ही रह जाता है. खासकर तब, जब आप जल्दी में खाना पका रहे हों.

-विशेषज्ञों के अनुसार, जब आप दाल भिगोते हैं तो पाचन क्षमता भी बेहतर हो जाती है. दाल में कुछ कम्पाउंड्स नेचुरली मौजूद होते हैं जैसे एंटी-न्यूट्रिएंट्स. ये फाइटिक एसिड और एंजाइम इन्हिबिटर्स मुख्य रूप से मौजूद होते हैं. ये कम्पाउंड मिनरल्स के एब्जॉर्प्शन में रुकावट डालते हैं. इससे जिन्हें पहले से ही पाचन संबंधित समस्याएं हैं, उनमें गैस, अपच, ब्लोटिंग, जलन, पेट संबंधित असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में एंटी-न्यूट्रिएंट्स के प्रभाव को कम करने के लिए भी दाल को पानी में 15 से 30 मिनट भिगोने के बाद ही पकाना चाहिए. इससे दाल आसानी से पच सकती है.

– दाल को जब भिगोया जाता है तो उसके अंदर कुछ प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाएं सक्रिय हो जाती हैं. इससे शरीर में जिंक, आयरन, मैग्नीशियम आदि का अवशोषण बेहतर तरीके से हो सकता है. ऐसे में दाल भिगोकर खाने से शरीर में पोषक तत्वों का असर और उपयोग सही तरीके से हो पाता है.

किस दाल को भिगोना चाहिए
सभी दालों को भिगोने की जरूरत नहीं होती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, छिलका रहित टूटी हुई दालें जैसे मसूर दाल, धुली मूंग दाल के दाने नेचुरली सॉफ्ट होते हैं. इन्हें भिगोने की जरूरत नहीं होती है. ये आसानी से पक सकती हैं. वहीं, अरहर दाल, चना दाल छिलका रहिट टूटी हुई दालों से हार्ड होती हैं. इन्हें जल्दी पकाने के लिए 15 मिनट तो कम से कम जरूर भिगोकर रखें. इससे बनावट भी सही रहता है, स्वाद भी बना रहता है और जल्दी पक भी जाती हैं.



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