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Gud Lehsun Chutney: झारखंड के कई गांवों में एक खास देसी चटनी बनाई जाती है, जो साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना देती है. यह चटनी कम सामग्री से तैयार हो जाती है. इसका हीरो इंग्रीडिएंट गुड़, लहसुन और सरसों का तेल है. जानते हैं इसे कैसे तैयार किया जाता है.
जमशेदपुर. झारखंड के कई गांवों में आज भी खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ऐसी देसी चटनी बनाई जाती है, जिसका स्वाद किसी भी साधारण भोजन को खास बना देता है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए न तो बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत होती है और न ही किसी खास मशीन की. घर में मौजूद कुछ चीजों से ही यह चटपटी और स्वादिष्ट चटनी तैयार हो जाती है. गांवों में इसे दाल-भात, रोटी, सब्जी या दूसरे पारंपरिक व्यंजनों के साथ बड़े चाव से खाया जाता है.
मिर्च डालें स्वाद के हिसाब से
इस देसी चटनी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजा धनिया पत्ती लेनी होती है. धनिया पत्ती को अच्छी तरह साफ करके धो लें, ताकि उसमें मिट्टी या गंदगी न रह जाए. इसके बाद इसमें स्वाद के अनुसार हरी मिर्च डालें. आम तौर पर तीन से चार हरी मिर्च चटनी को अच्छा तीखापन देने के लिए काफी होती हैं. हालांकि, अगर आपको तीखा कम पसंद है तो मिर्च की मात्रा कम भी कर सकते हैं.
गुड़ से आता है खास स्वाद
अब इसमें तीन-चार लहसुन की कलियां डालें. लहसुन इस चटनी के स्वाद और खुशबू को और बेहतर बना देता है. इसके साथ थोड़ा सा गुड़ डालना इस चटनी की सबसे खास बात मानी जा सकती है. गुड़ की हल्की मिठास हरी मिर्च और लहसुन के तीखे स्वाद को संतुलित करती है और चटनी का स्वाद बिल्कुल बदल देती है. यही वजह है कि गांवों में बनाई जाने वाली इस चटनी में गुड़ का इस्तेमाल इसे खास बनाता है.
आखिर में डालें सरसों का तेल
अब सभी सामग्री को सिल-बट्टे पर या उपलब्ध साधन से अच्छी तरह पीस लें. कोशिश करें कि धनिया, हरी मिर्च और लहसुन अच्छी तरह मिल जाएं और चटनी का स्वाद एकसार हो जाए. इसके बाद इसमें स्वादानुसार नमक डालें. सबसे आखिर में सरसों का तेल डालना है. सरसों के तेल की हल्की तीखी खुशबू और स्वाद इस चटनी को बिल्कुल देसी अंदाज देता है. तेल डालने के बाद इसे अच्छी तरह मिला लें.
बढ़ जाता है खाने का स्वाद
तैयार चटनी को आप गरमा-गरम दाल-भात, रोटी, पराठे या किसी भी देसी भोजन के साथ खा सकते हैं. इसकी खासियत यही है कि कम सामग्री में भी इसका स्वाद बेहद शानदार होता है. झारखंड के गांवों में आज भी ऐसी पारंपरिक चटनियां सिर्फ खाने का हिस्सा नहीं, बल्कि स्थानीय खान-पान और मिट्टी से जुड़ी संस्कृति की पहचान हैं. अगर कभी गांव के घर में इस तरह की चटनी खाने का मौका मिले, तो इसका स्वाद जरूर चखिए.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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