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घी से लेकर लहसुन तक तड़के का जादू, जानिए सही तड़का बदल देता है खाने का स्वाद

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Tadka Tips: तड़का भारतीय किचन का सबसे जरूरी हिस्सा है जो खाने का पूरा स्वाद बदल देता है. सही तेल और सही मसालों का चुनाव करने से साधारण खाना भी खास बन सकता है. घी, सरसों तेल, लहसुन, हींग और मिर्च सभी का अलग अलग रोल होता है. डबल तड़का लगाने से स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. छोटे छोटे बदलाव से आप हर दिन नया स्वाद बना सकते हैं.

Tadka Tips: भारतीय किचन में तड़का सिर्फ एक स्टेप नहीं बल्कि पूरे खाने की जान होता है. जब गर्म तेल या घी में जीरा, राई, लहसुन या मिर्च डाली जाती है और वो चटकती है, तभी असली खुशबू और स्वाद बाहर आता है. यही वो पल होता है जब साधारण सी दाल या सब्जी भी खास बन जाती है. कई बार हम वही रेसिपी बनाते हैं लेकिन स्वाद वैसा नहीं आता जैसा घर के बड़ों के हाथ का होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह तड़का ही होता है. सही तेल, सही मसाले और सही टाइमिंग अगर मिल जाए, तो साधारण खाना भी रेस्टोरेंट जैसा लगने लगता है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत या महंगे इंग्रेडिएंट की जरूरत नहीं होती. बस एक छोटा सा तड़का और पूरा खाना बदल जाता है.

तड़का कैसे काम करता है: तड़का लगाने का साइंस बहुत सिंपल है. जब आप तेल या घी को गर्म करते हैं और उसमें मसाले डालते हैं, तो उसमें मौजूद फ्लेवर और खुशबू बाहर निकलती है. ये फ्लेवर तेल के साथ पूरे खाने में फैल जाता है. इसलिए अगर तेल सही गर्म नहीं हुआ, तो मसालों का पूरा स्वाद नहीं आएगा. वहीं अगर ज्यादा जल गया तो स्वाद कड़वा हो सकता है. इसलिए तड़का बनाना एक छोटी लेकिन जरूरी कला है.

घी और सरसों तेल का फर्क: घी का तड़का हमेशा सॉफ्ट और रिच फ्लेवर देता है. दाल, खिचड़ी या हलवा में घी का तड़का एक अलग ही कम्फर्ट फील देता है. वहीं सरसों का तेल तेज और थोड़ा तीखा फ्लेवर देता है. बंगाली स्टाइल करी, साग या फिश डिश में इसका स्वाद अलग ही लेवल पर होता है. अगर आप एक ही दाल में अलग अलग तड़का लगाकर देखें, तो फर्क तुरंत समझ आ जाएगा.

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करी पत्ता और मेथी दाना का असर: करी पत्ता ताजगी और हल्की सिट्रस खुशबू देता है. सांभर, रस्सम या नारियल वाली चटनी में ये जरूरी माना जाता है. वहीं मेथी दाना हल्का कड़वा लेकिन गहरा स्वाद देता है. कढ़ी या अचार में इसका इस्तेमाल ज्यादा अच्छा लगता है. ध्यान रहे कि मेथी ज्यादा भुन जाए तो स्वाद खराब हो सकता है, इसलिए हल्का सा ही फ्राई करें.

लहसुन और हींग का गेम: लहसुन का तड़का मजबूत और देसी फ्लेवर देता है. राजमा, छोले या लहसुन वाली दाल में इसका स्वाद बहुत पसंद किया जाता है. दूसरी तरफ हींग हल्का लेकिन बहुत खास फ्लेवर देती है. खासकर जब प्याज लहसुन नहीं इस्तेमाल करना हो, तब हींग का तड़का दाल को भी खास बना देता है. एक चुटकी हींग भी पूरा स्वाद बदल सकती है.

लाल मिर्च और हरी मिर्च का अंतर: सूखी लाल मिर्च स्मोकी और हल्की तीखी होती है. ये तड़के में कलर और फ्लेवर दोनों देती है. वहीं हरी मिर्च ताजा और तेज स्वाद देती है. पोहा, उपमा या झटपट सब्जी में इसका इस्तेमाल ज्यादा अच्छा लगता है. अगर ज्यादा तीखापन नहीं चाहिए तो हरी मिर्च को काटने की बजाय हल्का चीरकर डालें.

डबल तड़का क्यों होता है खास: डबल तड़का का मतलब होता है दो बार तड़का लगाना. एक बार खाना बनाते समय और दूसरी बार सर्व करने से पहले. इससे खाने में लेयर वाला स्वाद आता है और खुशबू भी ज्यादा बढ़ जाती है. जैसे दाल बनाते समय एक सिंपल तड़का लगाएं और ऊपर से सर्व करते समय घी, लहसुन और लाल मिर्च का तड़का डाल दें. इससे दाल का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

अलग अलग स्टाइल के तड़के: हर राज्य का अपना तड़का स्टाइल होता है. साउथ इंडियन में राई, करी पत्ता और सूखी मिर्च का इस्तेमाल होता है. पंजाबी तड़का जीरा, लहसुन और हरी मिर्च के साथ बनता है. गुजराती स्टाइल में राई, हींग और तिल का कॉम्बिनेशन मिलता है. वहीं बंगाली स्टाइल में पंचफोरन और सरसों तेल का इस्तेमाल होता है. हर तड़का अपने आप में एक अलग स्वाद लेकर आता है.

तड़का लगाने का सही तरीका: तड़का बनाते समय सबसे जरूरी है कि तेल सही से गर्म हो. पहले साबुत मसाले डालें जैसे जीरा या राई, फिर करी पत्ता या लहसुन डालें और आखिर में पाउडर मसाले. तड़का डालने के बाद तुरंत ढक्कन बंद कर दें ताकि खुशबू अंदर ही रहे. अगर सही तरीके से तड़का लगाया जाए, तो खाना खुद ब खुद स्वादिष्ट बन जाता है.



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