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Hyderabad Famous Munshi Naan: हैदराबाद की 175 साल पुरानी मुनशी नान की परंपरा जारी, निजाम दौर में शुरू हुई चौकोर नान आज भी शादियों और मजलिसों में भाईचारे की पहचान मानी जाती है. स्थानीय दुकानदार मोहम्मद गौश बताते हैं कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में नान गोल या अंडाकार बनाई जाती है, लेकिन हैदराबाद की पुरानी तहजीब में नान का मतलब चौकोर होता है.
हैदराबाद. जब भी नवाबी शहर हैदराबाद के जायके की बात होती है, तो सबसे पहले बिरयानी और हलीम का नाम सामने आता है. लेकिन चारमीनार की तंग गलियों में एक ऐसी खुशबू भी बसी हुई है, जिसने पिछले 175 सालों से अपनी अलग पहचान कायम रखी है. यह है हैदराबाद की मशहूर मुनशी नान.
स्थानीय दुकानदार मोहम्मद गौश बताते हैं कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में नान गोल या अंडाकार बनाई जाती है, लेकिन हैदराबाद की पुरानी तहजीब में नान का मतलब चौकोर होता है. इस अनोखी परंपरा की शुरुआत साल 1851 में हुई थी, जब निजाम दौर के सरकारी मुनशी हुसैन कासिम साहब ने नौकरी छोड़कर पत्थरगट्टी इलाके में इस दुकान की नींव रखी. आज भी यहां की भट्टियों से निकलने वाली चार कोनों वाली नान सिर्फ एक रोटी नहीं, बल्कि शहर की साझी संस्कृति की पहचान मानी जाती है.
चार कोनों में छिपी है भाईचारे की परंपरा
इस नान के चौकोर आकार के पीछे एक दिलचस्प सामाजिक सोच जुड़ी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार पुराने समय में इसे इस तरह तैयार किया गया था कि दस्तरखान पर बैठे चार लोग इसे आसानी से एक-एक कोने से तोड़कर बांट सकें. यह सिर्फ खाने का तरीका नहीं था, बल्कि मिल-बैठकर खाने और भाईचारे की निजामी रवायत का हिस्सा माना जाता था. आज भी पुरानी दुकानों में कारीगर इसे हाथों से उसी पारंपरिक अंदाज में तैयार करते हैं. मशीनों के दौर में भी इस नान की मौलिकता और पुराना स्वाद बरकरार है.
शादियों और मजलिसों की खास पहचान
हैदराबाद में यह नान शादियों और मजहबी मजलिसों का अहम हिस्सा मानी जाती है. परंपरा के अनुसार शादियों में दिल और पान के आकार की नान बनाई जाती है, जिसे खास तौर पर मारग या गाढ़े सालन के साथ परोसा जाता है. वहीं मजलिसों में सादी चौकोर नान मंगवाई जाती है. मिट्टी के तंदूर और लकड़ी की आंच पर पकने वाली इस नान की सबसे बड़ी खासियत इसका नरम और खस्ता स्वाद है. ऊपर से सुनहरी और अंदर से रुई जैसी मुलायम यह नान समय के साथ भी नहीं बदली है.
पुराने शहर की ये दुकानें आज भी सुबह से ही गुलजार हो जाती हैं, जहां दूर-दूर से लोग इस चार कोनों वाली विरासत का स्वाद लेने पहुंचते हैं. वक्त के साथ शहर में बहुत कुछ बदला, लेकिन हैदराबाद की यह चौकोर नान आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ मजबूती से कायम है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें