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छपरा के इनई पुल के पास रामेश्वर सिंह की दुकान के गुलाब जामुन बेहद मशहूर हैं. यहां शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. रोजाना एक क्विंटल दूध से मिठाइयां तैयार होती हैं. स्वाद के कारण शाम तक सारी बिक्री हो जाती है. दूर-दूर से लोग इसे खाने आते हैं.

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सारणः छपरा के रिविलगंज प्रखंड अंतर्गत ‘इनई पुल’ बाजार का मशहूर गुलाब जामुन स्वाद और शुद्धता के मामले में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है. यह दुकान पिछले 40 वर्षों से भी अधिक समय से ग्राहकों का भरोसा जीते हुए है. जिसे अब परिवार की दूसरी पीढ़ी संभाल रही है. ग्रामीण इलाके में होने के बावजूद यहाँ का स्वाद चखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी लोग खिंचे चले आते हैं.

पिता की विरासत को संभाल रहे हैं बेटे
इस प्रसिद्ध दुकान की शुरुआत रामेश्वर सिंह ने की थी. आज उनके पुश्तैनी काम को उनके बेटे पंकज सिंह, पवन सिंह और जीवन सिंह मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि जो शुद्धता और स्वाद 40 साल पहले मिलता था. वही आज भी बरकरार है. यही कारण है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, सब यहां बड़े चाव से मिठाई खाते हैं.

कैसे तैयार होता है यह लाजवाब गुलाब जामुन?
इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां की शुद्धता और साफ-सफाई है. शुद्ध खोआ के लिए उत्तर प्रदेश और स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन शुद्ध दूध मंगाया जाता है. दूध को कोयले की आंच पर घंटों जलाकर पारंपरिक तरीके से बिना मिलावट का मावा (खोआ) तैयार किया जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए जीवन सिंह ने बताया कि यहा हर दिन एक क्विंटल (100 लीटर) दूध से गुलाब जामुन तैयार किया जाता है, जो शाम तक पूरा बिक जाता है.

बता दें कि इनई पुल के रास्ते उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले लोग भी अक्सर यहां अपनी गाड़ियां रोककर गुलाब जामुन पैक कराना नहीं भूलते. कम कीमत में बेहतरीन क्वालिटी मिलना ही इस दुकान की सबसे बड़ी यूएसपी है.

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Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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