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Kalmi Saag Recipe: साग या पत्तियां मुख्य रूप से सर्दियों के मेन्यू में शामिल होती हैं लेकिन एक ऐसा भी साग है जिसे गर्मी में खूब खाया जाता है. इसका नाम कलमी साग है. झारखंड की तरफ लोग इसे बड़े चाव से दाल-भात के साथ खाते हैं. इसे बनाना बहुत आसान है और ये पोषक तत्वों से भरपूर होता है.
जमशेदपुर. झारखंड की खान-पान संस्कृति अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है. यहां के घरों में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों में कलमी साग का खास स्थान है. यह साग लगभग हर इलाके में पसंद किया जाता है और खासकर गर्मियों के मौसम में लोग इसे अपने भोजन में जरूर शामिल करते हैं. स्वाद के साथ-साथ यह शरीर को ठंडक देने और पोषक तत्वों की पूर्ति करने के लिए भी जाना जाता है.
शरीर को देता है तमाम फायदे
कलमी साग को ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. माना जाता है कि गर्मी के दिनों में इसका सेवन शरीर को हल्का महसूस कराता है. यह साग विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए और शरीर में खून की कमी को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है. यही कारण है कि झारखंड के कई परिवार इसे नियमित भोजन का हिस्सा बनाते हैं.
इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है और कम समय में स्वादिष्ट व्यंजन तैयार हो जाता है. सबसे पहले ताजा कलमी साग को अच्छी तरह साफ पानी से धो लिया जाता है, ताकि उसमें लगी मिट्टी या अन्य गंदगी निकल जाए. इसके बाद साग को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है.
लहसुन के तड़के से आता स्वाद
अब एक कढ़ाई में थोड़ा तेल गर्म किया जाता है. तेल गर्म होने के बाद उसमें 4-5 लहसुन की कलियां, सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा हुआ प्याज डाला जाता है. इन सभी मसालों को तब तक भूना जाता है, जब तक प्याज हल्का सुनहरा और ब्राउन न हो जाए. इससे साग में एक बेहतरीन खुशबू और स्वाद आता है.
नमक संभालकर ही डालें
इसके बाद कटा हुआ कलमी साग कढ़ाई में डाल दिया जाता है. स्वादानुसार नमक मिलाकर इसे अच्छी तरह चलाया जाता है. शुरुआत में साग थोड़ा ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन पकने के दौरान यह अपना पानी छोड़ता है और धीरे-धीरे नरम होने लगता है. इसे लगभग 15 से 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, ताकि इसका स्वाद पूरी तरह निखरकर सामने आए. नमक कम ही डालें क्योंकि आखिर में यह थोड़ा ही बचता है.
कम मसालों में बेजोड़ स्वाद
जब साग अच्छी तरह पक जाए और पानी सूखने लगे, तब इसे गर्मागर्म परोसा जाता है. झारखंड में लोग इसे चावल, दाल या रोटी के साथ खाना पसंद करते हैं. कम मसालों में बनने वाला यह पारंपरिक व्यंजन आज भी लोगों के दिलों और रसोई में अपनी खास जगह बनाए हुए है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें