एक छोटा सा चिप आज पूरी दुनिया की टेक्नोलॉजी की दिशा तय कर रहा है. मोबाइल, कार, AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल से लेकर रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक सामान तक, हर जगह इसकी जरूरत बढ़ रही है. यही वजह है कि भारत अब सिर्फ चिप इस्तेमाल करने वाला बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि चिप बनाने और डिजाइन करने की दौड़ में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस मौके को देखते हुए देश-विदेश की कंपनियां भारत में अरबों रुपये का निवेश कर रही हैं.
सेमीकंडक्टर सेक्टर के बढ़ने के साथ सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि युवाओं और Gen Z के लिए भी नए करियर और बिजनेस के मौके बन रहे हैं. चिप डिजाइन, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और EV टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आने वाले समय में मांग बढ़ सकती है. SEMICON India 2026 में दिखी हलचल इस बदलती तस्वीर की एक झलक है.
SEMICON India 2026 की हुई शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया. 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिन के प्रोग्राम में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कंपनियां, निवेशक, स्टार्टअप, रिसर्चर और छात्र हिस्सा ले रहे हैं. इसमें 600 से ज्यादा कंपनियां और 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं. इस बार इसकी थीम ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ रखी गई है.
इस आयोजन में भारत की सेमीकंडक्टर तैयार करने की पूरी योजना को दिखाया जा रहा है. अब फोकस सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्री लगाने पर नहीं है. सरकार चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, मशीनों, जरूरी इक्विमेंट्स और कुशल कर्मचारियों से लेकर पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है. Semicon 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था. 2025-26 में यह बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया.
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़ा बदलाव आया है. अब भारत में इस्तेमाल होने वाले 99% से ज्यादा मोबाइल फोन देश में ही बनाए जाते हैं. भारत पहले मोबाइल फोन के लिए दूसरे देशों पर काफी निर्भर था, लेकिन अब देश में बड़े पैमाने पर मोबाइल बनाए जा रहे हैं और उनका निर्यात भी बढ़ा है.
इलेक्ट्रॉनिक्स का यह बढ़ता कारोबार सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए आधार तैयार कर रहा है. मोबाइल, कार, कंप्यूटर, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में चिप का इस्तेमाल होता है. इसलिए अब भारत तैयार उत्पादों के साथ-साथ उनमें इस्तेमाल होने वाले अहम कंपोनेंट और चिप बनाने की कैपेसिटी भी बढ़ाना चाहता है.
1.64 लाख करोड़ का निवेश
भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बढ़ाने के लिए Semicon India Programme के तहत अब तक 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है. इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की योजना है.
इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स में चिप निर्माण के साथ उनकी पैकेजिंग और टेस्टिंग की सुविधाएं भी शामिल हैं. Micron, Kaynes और CG Semi ने भारत में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है. यानी सेमीकंडक्टर सेक्टर में कुछ प्रोजेक्ट अब सिर्फ निर्माण या योजना के स्तर पर नहीं हैं, बल्कि प्रोडक्शन शुरू हो चुका है.
सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर के दूसरे चरण यानी Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसका उद्देश्य चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस पैकेजिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है.
सिर्फ चिप फैक्ट्री नहीं, डिजाइन पर भी फोकस
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए सिर्फ फैक्ट्री लगाना काफी नहीं है. चिप तैयार करने से पहले उसका डिजाइन बनाना पड़ता है. इसके लिए खास सॉफ्टवेयर, इंजीनियर, टेस्टिंग सिस्टम, मशीनें और कई तरह की सामग्री की जरूरत होती है.
इसी दिशा में सरकार स्टार्टअप, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थानों को भी सपोर्ट कर रही है. सरकार के मुताबिक, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी मिली है. इससे Gen Z को नौकरी के नए मौके मिलेंगे. वहीं 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को EDA यानी Electronic Design Automation टूल्स तक पहुंच दी गई है. इन टूल्स की मदद से चिप का डिजाइन तैयार और टेस्ट किया जाता है.
AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल से बढ़ेगी चिप की मांग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल से सेमीकंडक्टर की जरूरत और बढ़ सकती है. AI सिस्टम के लिए ज्यादा ताकतवर कंप्यूटिंग और खास तरह की चिप्स की जरूरत होती है. ऐसे में भारत एक तरफ AI इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जरूरी चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहा है.
इसी का एक उदाहरण SEMICON India 2026 में देखने को मिला. Synchronous Drives & Inverters Private Limited के फाउंडर दर्शन कुमार पंडित ने बताया कि उनकी कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और AI तकनीक पर काम कर रही है. कंपनी ने IIT दिल्ली और SVNIT सूरत में विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल सेमीकंडक्टर चिप के प्रोटोटाइप को प्रोग्राम में प्रदर्शित किया.
विदेशी कंपनियों की भी भारत पर नजर
भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर बाजार में विदेशी कंपनियां भी अवसर देख रही हैं. KoCoS Technologies के Patrick Zube ने बताया कि जर्मनी की इस कंपनी की भारत में सब्सिडियरी है और वह पहली बार भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े सेशन में शामिल हुई है.
उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में नए ग्राहकों से जुड़ना चाहती है और तेजी से बढ़ रहे भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार का हिस्सा बनना चाहती है. Zube ने भारतीय बाजार को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा कि उनके विचार से भारत भविष्य में ‘नया ताइवान’ बन सकता है. SEMICON India 2026 से यह साफ है कि भारत का सेमीकंडक्टर फोकस अब सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है. डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई क्षेत्रों को जोड़कर एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश हो रही है.