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Uttarakhand Traditional Food: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत उत्तराखंड के जोशीमठ की एक दुकान पर नजर आ रहे हैं. इस दौरान वह दुकानदार से झंगोरा के बारे में पूछते दिखाई देते हैं. वीडियो देखने के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर झंगोरा होता क्या है. दरअसल झंगोरा उत्तराखंड का एक पारंपरिक और बेहद पौष्टिक अनाज है, जिसे पहाड़ों में सालों से खाया जाता रहा है.

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झंगोरा क्या है

Uttarakhand Traditional Food: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन दिनों एक वीडियो काफी चर्चा में है. वीडियो में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत उत्तराखंड के जोशीमठ में एक स्थानीय दुकान पर खरीदारी करते नजर आते हैं. इसी दौरान वह दुकानदार से झंगोरा के बारे में सवाल पूछते दिखाई देते हैं. वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच झंगोरा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई. कई यूजर्स यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्या खास है इस अनाज में, जिसके बारे में देश के मुख्य न्यायाधीश भी जानकारी लेते नजर आए.

वीडियो की एक और वजह से भी चर्चा हो रही है. कुछ लोग उत्तराखंड में आने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका पर बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ यह वीडियो स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और पहाड़ी उत्पादों को लेकर लोगों का ध्यान खींच रहा है. इसी वजह से झंगोरा अचानक चर्चा का विषय बन गया है.

आखिर क्या होता है झंगोरा?
झंगोरा एक प्रकार का मोटा अनाज है, जिसे अंग्रेजी में Barnyard Millet कहा जाता है. यह मुख्य रूप से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगाया जाता है. कई लोग इसे सांवा या सामक चावल की श्रेणी से भी जोड़कर देखते हैं, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नाम और किस्मों में थोड़ा फर्क हो सकता है.

पहाड़ों में रहने वाले लोग सदियों से झंगोरा खाते आ रहे हैं. पहले के समय में जब बाजार और पैकेज्ड फूड नहीं हुआ करते थे, तब झंगोरा वहां के लोगों के रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा था. इसकी खेती कम पानी में भी आसानी से हो जाती है और यह कठिन मौसम में भी उग सकता है. यही वजह है कि पहाड़ी इलाकों में इसे काफी महत्व दिया जाता है.

उत्तराखंड की पहचान बन चुका है यह अनाज
उत्तराखंड के कई गांवों में आज भी झंगोरा पारंपरिक भोजन का हिस्सा है. यहां झंगोरे की खीर, झंगोरे का दलिया और कई तरह के स्थानीय व्यंजन बनाए जाते हैं. त्योहारों और खास मौकों पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. पहाड़ों में रहने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि पहले झंगोरा लगभग हर घर में मौजूद रहता था. समय के साथ चावल और गेहूं का इस्तेमाल बढ़ गया, लेकिन अब फिर से लोग पुराने और पौष्टिक अनाजों की तरफ लौट रहे हैं. इसी वजह से झंगोरा एक बार फिर लोकप्रिय हो रहा है.

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सेहत के लिए क्यों माना जाता है फायदेमंद?
आजकल लोग हेल्दी डाइट और मिलेट्स की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. झंगोरा भी उन्हीं अनाजों में शामिल है जिन्हें पोषण से भरपूर माना जाता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. इसके अलावा इसमें कई जरूरी मिनरल्स और पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. यही वजह है कि फिटनेस पसंद करने वाले लोग और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करने लगे हैं. कई लोग इसे सफेद चावल के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.

झंगोरे की खीर क्यों है इतनी मशहूर?
अगर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों की बात हो और झंगोरे की खीर का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. यह वहां की सबसे लोकप्रिय डिशों में गिनी जाती है. दूध, गुड़ या चीनी और सूखे मेवों के साथ बनाई जाने वाली यह खीर स्वाद और पोषण दोनों के लिए पसंद की जाती है. कई पर्यटक जब उत्तराखंड घूमने जाते हैं तो स्थानीय व्यंजनों का स्वाद जरूर लेते हैं. झंगोरे की खीर उनमें सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली चीजों में शामिल रहती है. इसका स्वाद साधारण चावल की खीर से थोड़ा अलग होता है, जो लोगों को खास अनुभव देता है.





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