Delhi Food Outlets: कचौड़ी (Kachori) को लेकर दिल्ली वालों का प्रेम जग-जाहिर है. दिल्ली के किसी भी बाजार या कॉलोनी की मार्केट में चले जाइए, आपको कचौड़ी का ठिया या दुकान जरूर दिखाई देगी. कचौड़ी के साथ आलू की चटपटी सब्जी हो और उस सब्जी में से हींग की महक आ रही हो तो कचौड़ी खाने का मजा दोगुना हो जाता है. आज हम आपको एक स्पेशल कचौड़ी का स्वाद चखवाते हैं, लेकिन इस
कचौड़ी का स्वाद भारतीय स्वाद से कुछ अलग है. उसका कारण यह है कि इस कचौड़ी को बनाने वाले पाकिस्तान स्थित डेरा इस्माइल खां से आए हुए हैं. इसलिए इस कचौड़ी का रंग-ढंग और स्वाद भी अलग है. इस कचौड़ी को आलू की सब्जी के बजाय चटख और तीखी हरी मिर्च की चटनी के साथ परोसा जाता है.

इस कचौड़ी का स्वाद है जुदा

विभाजन से पहले यह परिवार पाकिस्तान में डेरा इस्माइल खां में कचौड़ी ही बेचता था. वहां इसे कचौड़ी नहीं बल्कि पूरनी कहा जाता है. चूंकि दिखने में यह कचौड़ी जैसी होती है और बनाई भी उसी तरह जाती है तो पाकिस्तान से आने वाले इस शरणार्थी परिवार ने भी इसका नाम कचौड़ी ही रख दिया. फिर भी यह कचौड़ी से इसलिए अलग है कि न तो यह पूरी की तरह नजर आती है और न ही कचौड़ी जैसी. असल में यह कचौड़ी जैसी फूली हुई नहीं होती और पूरी जैसी पतली नहीं होती.

इसकी विशेषता यह है कि मैदे की लोई में गरम मसाले, बेसन और मूंग की धुली दाल की भरपूर स्टफिंग होती है जबकि दिल्ली में मिलने वाली कचौड़ी में उड़द की दाल की स्टफिंग होती है. नॉर्थ दिल्ली में आप जाएंगे तो रिंग रोड पर माल रोड पार करने के बाद नाले के बाद ही दायीं ओर बहुत पुरानी कॉलोनी हकीकत नगर है. इसी कॉलोनी के अंदर गेट नंबर-7 के अंदर जाते ही पार्क के आगे बने फ्लैट्स में ‘जुगल कचौड़ी वाला’ नाम की दुकान है. इसी दुकान में डेरा इस्माइल खां के स्वाद वाली कचौड़ी मिलती है.

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तीखी हरी चटनी बढ़ा देती है ज़ायका

आप जब भी इस दुकान पर पहुंचेंगे, आपको कड़ाही में यह भरवां कचौड़ी (पूरनी) तलती हुई दिखाई देगी. इसके स्वाद को आप अच्छी तरह महसूस कर सकें, इसके लिए इसे आलू की चटपटी चटनी के बजाय हरी
चटनी के साथ परोसा जाता है. हरा धनिया, पुदीना, अमचूर, अनारदाना, इमली, हरी मिर्च और नमक से बनी हुई यह चटनी डेरा इस्माइल में भी चलती थी और आज भी यहां कचौड़ियों के साथ चल रही है. रोज करीब 20 लीटर इस चटनी को बनाया जाता है. इस चटनी के साथ आप इसे खाएंगे तो आपको साफ महसूस हो जाएगा कि यह कचौड़ी दिल्ली वाली कचौड़ी जैसी नहीं है.

इस दुकान पर 30 रुपये में दो कचौड़ी का मजा ले सकते हैं.

इसका स्वाद एकदम अलग है और वह जुबान और मन को भाता है. अगर इन कचौड़ियों को आपने एक बार खा लिया तो इस बात की पूरी संभावना है कि आप घरवालों के साथ-साथ रिश्तेदारों को भी जरूर खिलाएं. चटनी के साथ कचौड़ी का संगम आपको अलग ही स्वाद की ओर ले जाएगा. आप 30 रुपये में दो कचौड़ी का मजा ले सकते हैं.

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आजादी के वक्त से बेची जा रही है कचौड़ी

जब भारत का विभाजन हुआ तो डेरा इस्माइल से आकर ताकू राम ने किंग्सवे कैंप में ही डेरा डाला. तब पेट पालने के लिए उन्होंने उसी पूरनी को बेचना शुरू किया था जो डेरा में बेचते थे. पहले वह छाबे (टोकरी) पर
बेचते थी, फिर रेहड़ी पर बेची. उसके बाद उनके बेटे जुगलदास पाहवा ने खानदानी परंपरा को आगे बढ़ाया और करीब 25 साल पहले से कॉलोनी की दुकान में इसे बेचना शुरू किया. आज उनके बेटे भारत भूषण लोगों को डेरा की कचौड़ी खिला रहे हैं. सुबह 9 बजे दुकान खुल जाती है और शाम 6 बजे तक इस कचौड़ी का जलवा रहता है. कोई अवकाश नहीं है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: जीटीबी नगर

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