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आलू का हलवा एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है, जिसे व्रत-उपवास या खास मौकों पर बनाया जाता है. यह मुलायम, सुगंधित और पौष्टिक होता है. इसे बनाने के लिए उबले आलू, घी, चीनी, दूध और मेवों का उपयोग होता है.
व्रत में बनाइए एनर्जी से भरपूर आलू का हलवा. Image AI
आलू का हलवा एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है, जिसे खास मौकों, व्रत-उपवास या घर में कुछ मीठा खाने की इच्छा होने पर बनाया जाता है. इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है और इसे बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री की भी आवश्यकता नहीं पड़ती. आलू से बनने वाला यह हलवा मुलायम, सुगंधित और पौष्टिक होता है. यदि सही तरीके से बनाया जाए, तो यह किसी भी अन्य हलवे की तरह स्वादिष्ट लगता है.
आवश्यक सामग्री
उबले हुए आलू – 4 मध्यम आकार के
देसी घी – 4 से 5 बड़े चम्मच
चीनी – ½ कप
दूध – 1 कप
इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
कटे हुए बादाम – 1 बड़ा चम्मच
काजू – 1 बड़ा चम्मच
पिस्ता – 1 बड़ा चम्मच
किशमिश – 1 बड़ा चम्मच
बनाने की विधि
- सबसे पहले आलू को अच्छी तरह उबाल लें. ठंडा होने पर उनका छिलका उतारकर उन्हें कद्दूकस कर लें या अच्छी तरह मैश कर लें ताकि कोई गांठ न रहे.
- अब एक कढ़ाही में देसी घी गर्म करें. उसमें काजू, बादाम और किशमिश डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें और अलग निकालकर रख दें. उसी घी में मैश किए हुए आलू डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें. आलू को लगभग 8 से 10 मिनट तक भूनें, जिससे उनका कच्चापन खत्म हो जाए और हल्की सुनहरी खुशबू आने लगे.
- इसके बाद कढ़ाही में दूध डालें और अच्छी तरह मिलाएं. कुछ मिनट तक पकने दें ताकि आलू दूध को सोख लें. अब इसमें चीनी डालें और लगातार चलाते रहें. चीनी पिघलने के बाद मिश्रण थोड़ा पतला होगा, लेकिन धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा.
- जब हलवा गाढ़ा होकर कढ़ाही छोड़ने लगे, तब उसमें इलायची पाउडर और भुने हुए मेवे मिला दें. हलवे को 2 से 3 मिनट और पकाएं. जब घी किनारों पर दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें.
परोसने का तरीका
तैयार आलू के हलवे को गर्मागर्म कटोरी में निकालें और ऊपर से पिस्ता या बादाम से सजाकर परोसें. चाहें तो इसे ठंडा करके भी खा सकते हैं. त्योहारों, व्रत या विशेष अवसरों पर यह मिठाई सभी को पसंद आती है.
आलू के हलवे के फायदे
आलू ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. दूध और मेवों के उपयोग से इस हलवे का पोषण मूल्य भी बढ़ जाता है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोग इसका आनंद ले सकते हैं.