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आजमगढ़ की पहचान सिर्फ ब्लैक पॉटरी और रेशमी साड़ियों तक सीमित नहीं है. यह जिला अपने अनोखे स्वाद और पारंपरिक मिठाइयों के लिए भी जाना जाता है. यहां मिलने वाला मुबारकपुर का सफेद गाजर का हलवा, क्रिकेट बॉल जितना बड़ा गुलाब जामुन और खोए से तैयार मीठा समोसा स्वाद प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है. अगर आप आजमगढ़ जाएं, तो इन यूनिक मिठाइयों का स्वाद चखे बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी.
आजमगढ़ जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और खास व्यंजनों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है. यहां बनने वाली ब्लैक पॉटरी और रेशमी साड़ियां अपनी अनूठी कला और गुणवत्ता के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध हैं. इन्हीं खास पहचान के बीच आजमगढ़ के कुछ पारंपरिक और यूनिक व्यंजन भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं, जो जिले की अलग पहचान को और मजबूत करते हैं.
अगर आपको मिठाइयां खाने का शौक है और आजमगढ़ में कुछ नया व अनोखा स्वाद चखना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. आज हम आपको आजमगढ़ की कुछ ऐसी खास और यूनिक मिठाइयों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने लाजवाब स्वाद और पारंपरिक अंदाज के लिए मशहूर हैं. एक बार इनका स्वाद चखने के बाद आप भी कह उठेंगे “वाह, क्या बात है!”
आजमगढ़ की खास मिठाइयों की बात हो और मुबारकपुर के सफेद गाजर के हलवे का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. यह अनोखी मिठाई जिले की सबसे यूनिक डिश मानी जाती है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्वाद आपको लगभग सिर्फ आजमगढ़ में ही देखने और चखने को मिलता है. गाजर के हलवे का नाम आते ही मिठाई प्रेमियों के जेहन में सबसे पहले मुबारकपुर का मशहूर सफेद गाजर का हलवा ही याद आता है.
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यह हलवा सामान्य गाजर के हलवे से बिल्कुल अलग होता है. जहां आमतौर पर गाजर का हलवा लाल रंग का होता है, वहीं मुबारकपुर का यह खास हलवा पूरी तरह सफेद रंग का नजर आता है. इसकी एक और अनोखी विशेषता यह है कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सफेद गाजर की खेती भी मुख्य रूप से आजमगढ़ के मुबारकपुर क्षेत्र में ही होती है. अपने अनूठे रंग, खास स्वाद और पारंपरिक पहचान की वजह से यह मिठाई स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों की भी पहली पसंद बनी हुई है.
सफेद गाजर के हलवे के अलावा आजमगढ़ में कई और ऐसी मिठाइयां भी मिलती हैं, जो अपने अनोखे स्वाद और अंदाज के लिए मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है कलेक्ट्रेट के पास मिलने वाला खास गुलाब जामुन. आमतौर पर गुलाब जामुन आकार में छोटे होते हैं, लेकिन, यहां मिलने वाला गुलाब जामुन अपने बड़े आकार की वजह से अलग पहचान रखता है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जो इसे जिले की सबसे चर्चित मिठाइयों में शामिल करती है.
यह गुलाब जामुन अपने आकार की वजह से सबसे अलग नजर आता है. इसका साइज लगभग क्रिकेट बॉल जितना होता है, जो पहली ही नजर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है. जितना अनोखा इसका रूप है, उतना ही लाजवाब और अलग इसका स्वाद भी माना जाता है. खास बात यह है कि जहां सामान्य गुलाब जामुन बनाने में कई तरह के तैयार मिश्रण या पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं इस खास गुलाब जामुन को पारंपरिक तरीके से शुद्ध दूध और खोया (मावा) से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि इसका स्वाद बेहद रिच, मुलायम और यादगार होता है.
समोसा ऐसी डिश है, जिसे लगभग हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. समोसे का नाम सुनते ही दिमाग में कुरकुरा, मसालेदार और नमकीन स्वाद की तस्वीर उभर आती है. लेकिन अगर हम आपसे कहें कि समोसा सिर्फ तीखा और नमकीन ही नहीं, बल्कि मीठा भी हो सकता है, तो शायद आपको यकीन न हो. आजमगढ़ में एक ऐसा अनोखा मीठा समोसा भी मिलता है, जो अपने अलग स्वाद और खास अंदाज की वजह से लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.
आजमगढ़ में पारंपरिक नमकीन समोसे के साथ-साथ एक अनोखा मीठा समोसा भी मिलता है, जो अपने स्वाद और बनाने के तरीके के कारण खास पहचान रखता है. इस समोसे के अंदर दूध से तैयार खोया (मावा) भरा जाता है. तलने के बाद इसे मीठी चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. कुरकुरी परत और अंदर का मुलायम, मीठा भराव इसे एक अनोखी मिठाई बना देता है. अपने इसी अलग स्वाद की वजह से यह मीठा समोसा आजमगढ़ की खास मिठाइयों में गिना जाता है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले स्वाद प्रेमियों को भी खूब पसंद आता है.