शिवपुरी. शहर के कस्टम गेट पर शाम होते ही चाऊमीन और मोमोज के ठेले के आसपास लोगों की भीड़ नजर आने लगती है. इन्हीं में एक ठेला ऐसा है, जिसने अपने स्वाद के साथ संघर्ष की कहानी भी बनाई है. देव राठौर और उनका छोटा भाई पढ़ाई के साथ ‘मोम दरबार’ नाम से मोमोज, चाऊमीन और फिंगर बेचते हैं. कभी परिवार की आर्थिक स्थिति ने उन्हें काम शुरू करने के लिए मजबूर किया था, लेकिन करीब 8 साल के संघर्ष के बाद यही काम अब उनकी पहचान बन चुका है.
देव राठौर बताते हैं कि उनके पिता पहले मजदूरी करते थे. बाद में उन्होंने नौकरी भी की, लेकिन शराब की वजह से उनके लीवर में संक्रमण हो गया और परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. ऐसे समय में देव और उनके छोटे भाई को पढ़ाई के साथ कमाई के लिए काम शुरू करना पड़ा.
देव बताते हैं कि उनका छोटा भाई 11वीं में पढ़ रहा है, जबकि वह खुद 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं. दोनों भाई शाम होते ही ठेला संभालते हैं और शाम 4:00 से वह रात करीब 10:30 से 11 बजे तक लोगों को मोमोज, चाऊमीन और फिंगर परोसते हैं.
कई जगह ठेला लगाया, तब मिली पहचा
देव के मुताबिक, उनका यह सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने शुरुआत में अलग-अलग जगहों पर ठेला लगाया. कमलागंज, बाबू क्वार्टर रोड और शहर के अन्य इलाकों में काम करने के बाद आखिरकार कस्टम गेट पर उनका ठेला जम गया.
वह बताते हैं कि इस काम को शुरू करने में करीब 15 हजार रुपये लगाए थे. इसके बाद लगातार मेहनत करते रहे. करीब 8 साल के संघर्ष के बाद अब ‘मोम दरबार’ को कस्टम गेट पर अपनी अलग पहचान मिल गई है.
स्वाद और कम कीमत बनी पसंद की वजह
देव बताते हैं कि उनके यहां मोमोज और चाऊमीन के साथ फिंगर भी लोगों को पसंद आती है. कम कीमत और स्वाद की वजह से ग्राहक बार-बार यहां पहुंचते हैं. शाम के समय ठेले पर युवाओं और परिवारों की भीड़ दिखाई देती है.
रोजाना 1000 से 1500 रुपये तक की कमाई
देव के अनुसार, अब इस काम से रोजाना करीब 1000 से 1500 रुपये तक की आमदनी हो जाती है. इसी कमाई से वह अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ परिवार की जरूरतों में भी सहयोग करते हैं. देव कहते हैं कि कोई काम छोटा नहीं होता. अगर घर की परिस्थितियां ऐसी हैं कि कमाई की जरूरत है तो शर्म करने के बजाय मेहनत करनी चाहिए. उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ अपना छोटा कारोबार शुरू करके युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं. उनके लिए ‘मोम दरबार’ सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि करीब आठ साल की मेहनत और संघर्ष से बनाई गई पहचान है.