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आम के सीजन में जहां चौसा, दशहरी और लंगड़ा की खूब चर्चा होती है, वहीं ‘हिमसागर’ आम अपनी खास मिठास और मलाईदार स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है. बंगाल और बांग्लादेश की इस प्रीमियम वैरायटी की खेती अब सहारनपुर में भी तेजी से बढ़ रही है. रेशारहित गूदा और तेज खुशबू वाला यह आम मैंगो लवर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है.
सहारनपुर: आम का सीजन शुरू होते ही बाजार में चौसा, लंगड़ा और दशहरी की धूम मच जाती है. लेकिन हर मैंगो लवर की तलाश एक ऐसे फल पर जाकर रुकती है, जिसकी मिठास और खुशबू दिल जीत ले. एक ऐसा ही आम है ‘हिमसागर’, जो भारत ही नहीं बल्कि बांग्लादेश की भी सबसे रसीली और खुशबूदार वैरायटी मानी जाती है.
सहारनपुर जनपद, जिसे यूपी की मैंगो बेल्ट कहा जाता है, वहां के बागों में अब हिमसागर आम के पेड़ बड़ी संख्या में देखने को मिल रहे हैं. यहां के किसान अब बड़ी संख्या में इस आम की खेती कर रहे हैं.
हिमसागर आम का इतिहास बेहद पुराना और नवाबी दौर से जुड़ा है. मुख्य रूप से यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की प्रीमियम वैरायटी है. इसे बंगाल का कोहिनूर भी कहा जाता है. पुराने समय में यह मुर्शिदाबाद के नवाबों की पहली पसंद हुआ करता था.
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गंगा के मैदानी इलाकों की उपजाऊ मिट्टी में पैदा होने वाला यह आम अपनी मखमली बनावट के लिए जाना जाता है. यह आम बहुत कम समय (मई-जून) के लिए बाजार में आता है, जिसकी वजह से इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है.
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा बताते हैं कि हिमसागर आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका रेशारहित होना है. इसमें रेशा बिल्कुल न के बराबर होता है और यह खाने में बहुत मलाईदार लगता है. यही कारण है कि इसे हिमसागर नाम दिया गया. इस आम में 70 से 80 फीसदी तक केवल गूदा होता है. इसकी गुठली बहुत पतली होती है और इसकी सुगंध इतनी तेज होती है कि दूर से ही इसकी पहचान की जा सकती है.
पहले हिमसागर की खेती मुख्य रूप से बांग्लादेश के ढाका और पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद व हुगली जिलों तक सीमित थी. लेकिन इसके बेमिसाल स्वाद और खूबियों की वजह से अब यह पूरे भारत में फैल चुका है. सहारनपुर के प्रगतिशील किसान भी अब हिमसागर की पैदावार बड़े स्तर पर कर रहे हैं. यहां की मिट्टी और जलवायु इस प्रजाति के लिए काफी अनुकूल साबित हो रही है, जिससे बागवानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं.
स्वाद के साथ-साथ हिमसागर अपनी खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है. यह देखने में जितना आकर्षक है, खाने में उतना ही रसीला. जानकारों का कहना है कि जो व्यक्ति एक बार असली हिमसागर का स्वाद चख लेता है, वह दूसरी किस्मों को भूल जाता है. कम समय के लिए उपलब्ध होने के कारण मैंगो लवर्स इस आम का साल भर इंतजार करते हैं.