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Singodi Sweet Kumaon : कुमाऊं की मिठाई सिंगोड़ी को बनाने और परोसने का तरीका तक अनूठा है. शंकु के आकार में तैयार होने वाली यह मिठाई अल्मोड़ा और आसपास के पर्वतीय इलाकों में खूब मशहूर है. सिंगोड़ी गाढ़े खोये से तैयार की जाती है. नारियल और इलायची इसकी जान हैं. तैयार मिश्रण को मालू के पत्ते में लपेटा जाता है. यही पत्ता सिंगोड़ी को दूसरी मिठाइयों से अलग करता है. बागेश्वर की व्यापारी सुनीता भट्ट लोकल 18 से बताती हैं कि मालू के पत्ते की प्राकृतिक खुशबू सिंगोड़ी के स्वाद में एक अलग सुगंध जोड़ती है. ये मिठाई राजा-महराजाओं की फेवरेट रही है.

कुमाऊं की पारंपरिक मिठाइयों में सिंगोड़ी की अपनी अलग पहचान है. शंकु के आकार में तैयार होने वाली यह मिठाई खासतौर पर अल्मोड़ा और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में लोकप्रिय है. सिंगोड़ी मुख्य रूप से गाढ़े खोये से तैयार की जाती है, जिसमें नारियल और इलायची जैसे स्वादिष्ट तत्व मिलाए जाते हैं. तैयार मिश्रण को मालू के ताजे पत्ते में शंकु के आकार में लपेटा जाता है. यही पत्ता सिंगोड़ी को सामान्य मिठाइयों से अलग पहचान देता है.

सिंगोड़ी केवल मिठाई नहीं, बल्कि कुमाऊं की खान-पान परंपरा की पहचान मानी जाती है. इसकी सबसे खास बात इसका शंकु जैसा आकार और मालू के पत्ते में की जाने वाली पैकिंग है. पहले गाढ़े खोये को तैयार किया जाता है. उसमें नारियल और इलायची मिलाकर स्वादिष्ट मिश्रण बनाया जाता है. इसके बाद इसे मालू के पत्ते पर रखकर शंकु के आकार में लपेट दिया जाता है. पत्ते की प्राकृतिक सुगंध धीरे-धीरे मिठाई में समा जाती है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों अलग महसूस होते हैं.

बागेश्वर की व्यापारी सुनीता भट्ट लोकल 18 से बताती हैं कि उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में सिंगोड़ी का नाम पारंपरिक मिठाइयों में प्रमुखता से लिया जाता है. अल्मोड़ा सहित कुमाऊं के कई पर्वतीय इलाकों में मिलने वाली यह मिठाई अपने खास स्वरूप के कारण आसानी से पहचानी जाती है. खोये से तैयार सिंगोड़ी में नारियल और इलायची मिलाकर स्वाद बढ़ाया जाता है. इसके बाद इसे मालू के पत्ते में शंकु के आकार में लपेटा जाता है.

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कुमाऊं की यात्रा सिर्फ पहाड़ों और प्राकृतिक नजारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यहां का पारंपरिक खान-पान भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. सिंगोड़ी इसी स्वाद परंपरा का लोकप्रिय हिस्सा है. खासकर अल्मोड़ा की बाजार संस्कृति से जुड़ी यह मिठाई अपने अनोखे आकार और पत्ते की पैकिंग के कारण लोगों का ध्यान खींचती है. इसे गाढ़े खोये में नारियल और इलायची मिलाकर तैयार किया जाता है. इसके बाद मिठाई को मालू के पत्ते में शंकु की तरह लपेट दिया जाता है. पत्ते की प्राकृतिक सुगंध सिंगोड़ी को अलग स्वाद देती है.

सिंगोड़ी की सबसे पहली पहचान उसका शंकु जैसा आकार है. देखने में छोटी और साधारण लगने वाली यह मिठाई बनाने की पारंपरिक विधि के कारण खास बन जाती है. गाढ़े खोये को आधार बनाकर इसमें नारियल और इलायची मिलाई जाती है. तैयार मिश्रण को सीधे किसी डिब्बे में रखने के बजाय मालू के पत्ते में लपेटा जाता है. पत्ते को इस तरह मोड़ा जाता है कि मिठाई शंकु का आकार ले लेती है. मालू के पत्ते की प्राकृतिक खुशबू सिंगोड़ी के स्वाद में एक अलग सुगंध जोड़ती है.

कुमाऊं की सिंगोड़ी अपने स्वाद के साथ सरल और पारंपरिक सामग्री के लिए भी जानी जाती है. इसे तैयार करने में मुख्य रूप से गाढ़े खोये का इस्तेमाल होता है. खोये में नारियल और इलायची मिलाने से मिठाई में मलाईदार स्वाद के साथ हल्की सुगंध भी आती है. इसके बाद मिश्रण को मालू के पत्ते में रखकर शंकु का आकार दिया जाता है. इस पत्ती की प्राकृतिक खुशबू सिंगोड़ी को एक अलग पहचान देती है.

अल्मोड़ा को कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है और यहां की पहचान ऐतिहासिक विरासत के साथ स्थानीय खान-पान से भी जुड़ी है. इसी खान-पान में सिंगोड़ी का खास स्थान है. मालू के पत्ते में शंकु के आकार में लिपटी यह मिठाई देखने में जितनी आकर्षक है, स्वाद में भी उतनी ही अलग है. इसे गाढ़े खोये में नारियल और इलायची मिलाकर तैयार किया जाता है. इसके बाद मिश्रण को मालू के पत्ते में लपेट दिया जाता है. पत्ते की सौंधी खुशबू मिठाई को विशिष्ट स्वाद देती है.

सिंगोड़ी को कुमाऊं की पारंपरिक खान-पान संस्कृति की मीठी विरासत कहा जा सकता है. इसकी खासियत केवल खोये का स्वाद नहीं, बल्कि इसे तैयार करने और परोसने का पारंपरिक तरीका भी है. गाढ़े खोये में नारियल और इलायची मिलाकर तैयार मिश्रण को मालू के पत्ते में शंकु के आकार में लपेटा जाता है. पत्ते की प्राकृतिक खुशबू मिठाई के स्वाद में अलग पहचान जोड़ती है. अल्मोड़ा जिला प्रशासन की वेबसाइट भी सिंगोड़ी को मालू के पत्ते में लिपटी कुमाऊं की खास मिठाई के रूप में पेश करती है.

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