जयपुर. राजस्थान में राजस्थानी सिनेमा प्रेमियों के लिए साल में गिनी चुनी कुछ एक फिल्में रिलीज होती है, इसलिए लोग राजस्थानी फिल्मों को इंतजार करते हैं.  हाल ही में राजस्थान के गैंगस्टर आंनद पाल के जीवन पर बनी फिल्म ”टाइगर ऑफ राजस्थान” रिलीज की गई है, जिसे देखने के लिए लोगों में उत्साह दिखने को मिल रहा है. यह फिल्म सिर्फ जयपुर के सांगानेरी गेट के पास स्थित जैम सिनेमा में चल रही है. यहां रोजाना फिल्म के 4 शो चलते हैं. फिल्म रिलीज के बाद से इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पंसद किया और लगातार लोग फिल्म को देखने के लिए पहुंच रहें हैं. लोकल 18 ने आंनद पाल के जीवन पर बनी फिल्म ”टाइगर ऑफ राजस्थान” को देखकर आए लोगों से फिल्म के बारे में बात की.

गैंगस्टर आनंद पाल सिंह राजस्थान के नागौर जिले का रहने वाला था और एक समय उसका नाम राज्य का सबसे कुख्यात अपराधियों में शुमार होता था. हालांकि अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले वह एक शिक्षक बनना चाहता था, लेकिन बाद में अपराध का ही रास्ता चुन लिया. उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी, और अवैध हथियार रखने जैसे 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे. वह जातीय राजनीति और स्थानीय प्रभाव के चलते कई बार बचता रहा. वहीं 24 जून 2017 को राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन टीम और एटीएस ने चूरू जिले के मलासर गांव में एक मुठभेड़ में आनंद पाल को मार गिराया था. एनकाउंटर को लेकर काफी विवाद हुआ था और परिजनों ने इसे फर्जी बताकर सीबीआई जांच की मांग भी की थी.

धमकी और विरोध के बावजूद रिलीज हुई फिल्म

आंनद पाल के जीवन पर बनी फिल्म ”टाइगर ऑफ राजस्थान” को निर्देशक अरविंद कुमार, निर्माता हितेश, जैस्मिन, और सह निर्माता राज राठौड़ ने मिलकर बनाया है. साथ ही फिल्म में अरविंद कुमार ने आनंद पाल के रोल में मुख्य भूमिका भी निभाई हैं, जो लोगों को खूब पंसद आ रही है. अरविंद कुमार बताते हैं कि फिल्म 2 साल में राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में शूट कर तैयार की गई. लम्बे समय से फिल्म को धमकियों और विरोध प्रदर्शनों का सामना भी करना पड़ा. लेकिन आखिरकार फिल्म सिनेमाघर में रिलीज हो गई है. राजस्थानी भाषा में बनी यह फिल्म लोगों को खूब पंसद आ रही है. लोग फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघर पहुंच रहें हैं.

आनंद पाल की जीवन यात्रा पर आधारित है फिल्म

फिल्म देखकर आए लोगों से लोकल 18 ने बात भी की. दर्शक बताते हैं कि आंनद पाल के जीवन की घटनाओं के अलावा फिल्म में उनके जीवन यात्रा और अपराध की दुनिया में उनके बर्चस्व को भी बारिकी से दिखाया गया है. फिल्म में अन्य राजस्थानी कलाकारों ने भी काम किया है. आपको बता दें कि फिल्म को देखने के लिए राजस्थान पुलिस के कई अधिकारी तक पहुंचे थे. फिल्म ”टाइगर ऑफ राजस्थान” बनने के 18 महीने तक सेंसर बोर्ड में सेंसर प्रमाणन के लिए अटकी रही. दर्शकों के अनुसार पूरी फिल्म में आंनद पाल की जीवन यात्रा के साथ उनकी दबंगई को भी दिखाया गया है.

सबसे ज्यादा महिलाएं देख रही फिल्म

फिल्म ”टाइगर ऑफ राजस्थान” के रिलीज के बाद से फिल्म को बच्चे, युवा, और बुजुर्ग देखने पहुंच रहें हैं, लेकिन सबसे ज्यादा फिल्म अब तक महिलाओं ने देखी है. इसका प्रमुख कारण फिल्म के लिए महिलाओं को विशेष ऑफ़र दिया जा रहा है. ऑफर के तहत कोई भी पुरुष या महिला दर्शक यदि एक टिकट खरीदते हैं, तो उन्हें एक महिला के लिए एक अतिरिक्त टिकट बिल्कुल मुफ्त मिलेगा. यह पहल महिलाओं को राजस्थानी सिनेमा में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है. महिलाओं के लिए ख़ासतौर पर  सरोज खान के कोरियोग्राफ घूमर गीत को फिल्म के आखिर में दिखाया गया है, जो सरोज खान के जीवन का अंतिम नृत्य निर्देशन रहा था. जिसे लोग आज तक पंसद करते हैं.



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