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छपरा का मिर्जापुर गांव फूलों की खेती से महक उठा है. यहां के किसान पारंपरिक खेती छोड़ गेंदा और गुलाब उगा रहे हैं. कम लागत में सब्जियों से अधिक मुनाफा हो रहा है. पटना-हाजीपुर के व्यापारी सीधे खेतों से फूल खरीद रहे हैं. इस बंपर कमाई से किसानों की किस्मत बदल गई है.
सारणः बिहार के सारण जिले में पारंपरिक खेती की लकीर को छोड़कर किसान अब नगदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. जिले के मढ़ौरा प्रखंड का मिर्जापुर गांव आज इस बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है. यहां के किसान साग-सब्जियों के साथ-साथ अब बड़े पैमाने पर फल और फूलों की खेती कर तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. इस अनोखी पहल से न सिर्फ किसानों की आय दोगुनी हुई है, बल्कि इलाके को एक नई पहचान भी मिली है. मिर्जापुर गांव में फिलहाल लगभग 8 से 10 बीघा भूमि पर सालों भर फूलों की खेती की जा रही है, जिसे खरीदने के लिए पटना, हाजीपुर, वैशाली और छपरा जैसे बड़े शहरों से व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंच रहे हैं.
फूलों की इस खेती ने यहां के किसानों के जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है. कई किसान परिवारों ने फूलों से होने वाली बंपर कमाई के दम पर न केवल पक्के मकान बनवाए हैं, बल्कि अपने बच्चों की शादियां और उच्च शिक्षा का खर्च भी आसानी से उठाया है. मिर्जापुर क्षेत्र में मुख्य रूप से माली समाज के लोग रहते हैं, जो कई पीढ़ियों से पुश्तैनी रूप से फूलों से जुड़े हैं. स्थानीय किसान संतोष भगत बताते हैं कि वे पिछले 15 वर्षों से फूल उगा रहे हैं. उनके अनुभव के अनुसार, हरी सब्जियों की तुलना में फूलों की खेती में कहीं अधिक बचत और मुनाफा है.
गेंदा फूल की खेती
यहां मुख्य रूप से गेंदा फूल की खेती की जाती है. किसान हर सीजन में गेंदे की अलग-अलग किस्में लगाते हैं. जिससे पूरे साल खेतों में फूल उपलब्ध रहते हैं. इसके अलावा कम मात्रा में ‘चेरी गुलाब’ की भी खेती की जाती है. लागत और मुनाफे के गणित को समझाते हुए किसान बताते हैं कि एक कट्ठा खेत में गेंदा लगाने का खर्च लगभग 2 हजार रुपये आता है, जबकि इससे 5 से 7 हजार रुपये तक की शुद्ध कमाई हो जाती है. सीजन के अंत में भी किसान 5 कट्ठा खेत से रोजाना 200 से 500 गेंदे की लड़ियां (माला) बेच रहे हैं, जिसकी बाजार कीमत 15 से 20 रुपये प्रति लड़ी है.
किसान आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं; वे फूलों के उन्नत बीज ऑनलाइन मंगाते हैं या सीधे कोलकाता से लाकर बोते हैं. किसानों का मानना है कि रासायनिक खादों के बजाय जैविक खेती अपनाने से फूलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती है. किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे ‘कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी’ से प्रशिक्षण प्राप्त कर वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती करें, ताकि कम लागत में और ज्यादा मोटी कमाई की जा सके.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.