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Bal Mithai Bal Dana Making Process: उत्तराखंड की मशहूर बाल मिठाई का नाम आते ही सबसे पहले उसके ऊपर सजे छोटे-छोटे सफेद दाने नजर आते हैं. दूर से मोती जैसे दिखने वाले इन दानों की वजह से ही बाल मिठाई का लुक और भी खास लगता है. कुमाऊं की इस पारंपरिक मिठाई में इन सफेद बाल दानों की अपनी अलग कहानी है. इन्हें तैयार करने में एक छोटे से बीज और चीनी की चाशनी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन असली खासियत इन्हें बनाने के तरीके में छिपी है. चाशनी की परतें धीरे-धीरे दानों पर जमती जाती हैं और लंबे समय की मेहनत के बाद इनका सफेद और गोल रूप तैयार होता है. इसके बाद इन्हें मावा से बनी बाल मिठाई पर सजाया जाता है.
बागेश्वर: उत्तराखंड की प्रसिद्ध बाल मिठाई की पहचान उसके ऊपर लगे सफेद छोटे-छोटे दानों से भी होती है. इन्हें स्थानीय तौर पर बाल दाना या चीनी की गोलियां कहा जाता है. पारंपरिक तरीके में इन दानों के बीच खसखस का छोटा बीज इस्तेमाल किया जाता है. खसखस को चीनी की चाशनी की कई परतों से ढककर सफेद मोती जैसा रूप दिया जाता है. इसके लिए खसखस को बड़े बर्तन में डालकर चाशनी मिलाई जाती है. बर्तन को लगातार हिलाने और घुमाने से चाशनी धीरे-धीरे दानों पर जमती जाती है. कई परतें बनने के बाद सफेद बाल दाना तैयार होता है.
बाल मिठाई के ऊपर दिखाई देने वाले सफेद दाने तैयार करने की प्रक्रिया में धैर्य और लगातार मेहनत की जरूरत होती है. बाल दाना बनाने के लिए खसखस के छोटे दानों को चीनी की चाशनी के साथ मिलाया जाता है. इसके बाद बड़े बर्तन को लगातार हिलाया और घुमाया जाता है. चाशनी धीरे-धीरे सूखती है और खसखस के दाने के ऊपर एक पतली परत जम जाती है. यही प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है. हर नई परत के साथ दाने का आकार बढ़ता जाता है, और उसका रंग सफेद मोती जैसा दिखाई देने लगता है.
व्यापारी सुनीता भट्ट बताती है कि कुमाऊं की प्रसिद्ध बाल मिठाई अपनी अलग पहचान और पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है. इसकी खासियत केवल मावा और चीनी से बनी मिठाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ऊपर लगाए जाने वाले सफेद बाल दाने भी इसे आकर्षक बनाते हैं. छोटे-छोटे सफेद दाने देखने में मोती जैसे लगते हैं. पारंपरिक रूप से इनके केंद्र में खसखस का दाना होता है, जिसके ऊपर चाशनी की कई परतें चढ़ाई जाती हैं. तैयार बाल दानों को मावा से बनी बर्फी के ऊपर सजाया जाता है.
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पारंपरिक बाल दाना तैयार करने की प्रक्रिया देखने में आसान लगती है, लेकिन इसमें काफी मेहनत लगती है. खसखस के छोटे दानों को चीनी की चाशनी के साथ बड़े बर्तन में रखा जाता है. इसके बाद कारीगर बर्तन को लगातार हिलाते और घुमाते रहते हैं. ऐसा करने से चाशनी एक जगह जमा होने के बजाय खसखस के दानों पर समान रूप से फैलती है. कुछ समय बाद चाशनी सूखकर पतली परत में बदल जाती है. इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जाता है. धीरे-धीरे दानों का आकार बढ़ता जाता है और वे सफेद दिखाई देने लगते हैं.
बाल मिठाई तैयार करने के बाद उसकी सजावट का काम भी काफी महत्वपूर्ण होता है. इसके लिए मावा से बनी बर्फी को तैयार किया जाता है. बर्फी के ऊपर हल्की चाशनी की परत लगाई जाती है, जिसके बाद सफेद बाल दानों को सावधानी से चिपकाया जाता है. छोटे-छोटे सफेद दाने मावा की गहरी रंगत के ऊपर अलग दिखाई देते हैं और मिठाई को आकर्षक बनाते हैं. पारंपरिक तरीके से तैयार बाल दाने खसखस के बीज और चीनी की चाशनी से बनाए जाते हैं. इनका आकार छोटा और गोल होता है.
बाल मिठाई के ऊपर लगाए जाने वाले सफेद बाल दाने तैयार करने में कारीगरों को समय और धैर्य दोनों की जरूरत होती है. खसखस के छोटे दाने आकार में बहुत छोटे होते हैं, इसलिए उन पर चाशनी की समान परत चढ़ाना आसान काम नहीं है. चाशनी डालने के बाद बर्तन को लगातार घुमाया और हिलाया जाता है. जैसे-जैसे चाशनी सूखती है, दाने पर नई परत जमती जाती है. इस प्रक्रिया को कई बार दोहराने के बाद दाने सफेद और गोल दिखाई देने लगते हैं. इसके बाद इन्हें मावा बर्फी पर सजाया जाता है.
बाल मिठाई देखने में जितनी आकर्षक लगती है, उसमें सफेद बाल दानों की बड़ी भूमिका होती है. गहरे भूरे रंग की मावा बर्फी के ऊपर लगे छोटे सफेद दाने दूर से ही ध्यान खींचते हैं. पारंपरिक रूप से इन दानों को खसखस के बीज और चीनी की चाशनी से तैयार किया जाता है. चाशनी की कई परतें जमने के बाद दाने सफेद और गोल आकार लेते हैं. इन्हें मावा बर्फी की सतह पर सजाया जाता है. बाल दाने मिठाई को अलग बनावट और आकर्षक रूप देते हैं. इसी पारंपरिक सजावट के कारण बाल मिठाई कुमाऊं की पहचान से जुड़ी खास मिठाइयों में शामिल है.
उत्तराखंड की बाल मिठाई केवल एक मीठा पकवान नहीं, बल्कि कुमाऊं की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़ी पहचान भी मानी जाती है. इसकी खास सजावट सफेद बाल दानों से होती है. पारंपरिक विधि में छोटे खसखस के दानों को चीनी की चाशनी की परतों से ढककर बाल दाना तैयार किया जाता है. कारीगर बर्तन को लगातार घुमाते हैं, जिससे चाशनी धीरे-धीरे दानों पर जमती जाती है. कई परतों के बाद तैयार सफेद दाने मावा बर्फी पर सजाए जाते हैं.