Hulga Madga Recipe: बारिश शुरू होते ही मौसम सुहाना जरूर हो जाता है, लेकिन इसी के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी और मौसमी परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं. ऐसे में गरमा-गरम सूप या काढ़े की याद आना स्वाभाविक है. महाराष्ट्र के कई घरों में मानसून के दौरान एक पारंपरिक पेय तैयार किया जाता रहा है, जिसे Hulga Madga कहा जाता है.
कुलिथ यानी हॉर्स ग्राम से बनने वाला यह गर्म और हल्का मसालेदार सूप स्वाद के साथ शरीर को गर्माहट देने वाला माना जाता है. गुड़ की मिठास, सोंठ और काली मिर्च की गर्म तासीर इसे बारिश के मौसम के लिए खास बनाती है. दिलचस्प बात यह है कि इसे बनाने का तरीका बेहद आसान है और सामग्री भी घर की रसोई में आसानी से मिल जाती है.
महाराष्ट्र का पारंपरिक Hulga Madga क्या है?
Hulga Madga को महाराष्ट्र की पारंपरिक मानसूनी रेसिपी में गिना जाता है. इसका मुख्य आधार कुलिथ या हॉर्स ग्राम है, जिसे महाराष्ट्र में ‘हुलगा’ के नाम से भी जाना जाता है. पारंपरिक तौर पर कुलिथ का आटा, गुड़ और कुछ गर्म मसालों को मिलाकर यह पतला सूप तैयार किया जाता है. बारिश के दिनों में जब मौसम ठंडा और नम हो जाता है, तब कई परिवारों में गर्म पेय और पारंपरिक व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाती है. Hulga Madga भी इसी घरेलू खानपान की परंपरा का हिस्सा है. हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर यह एक पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प हो सकता है.
बनाने के लिए चाहिए ये सामग्री
Hulga Madga की आसान सामग्री- इसे बनाने के लिए आपको 4 बड़े चम्मच हुलगा यानी कुलिथ का आटा, 3 से 4 बड़े चम्मच गुड़, 1 चम्मच सोंठ पाउडर, आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर और आधा चम्मच जायफल-इलायची पाउडर चाहिए. इसके अलावा 2 से 3 कप पानी और 1 बड़ा चम्मच घी लें. चाहें तो कटे हुए काजू और बादाम भी इसमें डाल सकते हैं. गुड़ की मात्रा आप अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं. अगर आपको बहुत ज्यादा मीठा पसंद नहीं है तो 2 बड़े चम्मच गुड़ से भी शुरुआत की जा सकती है.
ऐसे बनाएं महाराष्ट्र का पारंपरिक सूप
सबसे पहले एक कटोरी में कुलिथ का आटा लें. इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं और एक पतला, चिकना घोल तैयार कर लें. ध्यान रखें कि इसमें आटे की गांठें न रहें. यह छोटा सा कदम बाद में सूप को स्मूद बनाने में काफी मदद करता है. अब एक पैन में 2 से 3 कप पानी गर्म करें. पानी हल्का गर्म होने पर इसमें गुड़, सोंठ पाउडर और काली मिर्च डालें. इसे तब तक चलाते रहें, जब तक गुड़ पूरी तरह घुल न जाए. इसके बाद मिश्रण को हल्की आंच पर उबाल आने दें.
घोल डालते समय रखें ध्यान
अब गैस की आंच धीमी कर दें. कुलिथ के तैयार घोल को धीरे-धीरे पैन में डालें और साथ-साथ लगातार चलाते रहें. अगर इस दौरान चम्मच चलाना बंद कर दिया तो आटे की गांठें बन सकती हैं. इसलिए इसे लगातार हिलाते हुए पकाना बेहतर है. करीब 3 से 4 मिनट तक धीमी आंच पर पकाने के बाद सूप थोड़ा गाढ़ा होने लगेगा. अब इसमें जायफल और इलायची का पाउडर डालें और गैस बंद कर दें.
ऊपर से डालें घी, स्वाद हो जाएगा दोगुना
गरमा-गरम Madga को कटोरी में निकालें और ऊपर से एक चम्मच घी डालें. अगर आप इसे थोड़ा रिच बनाना चाहते हैं तो कटे हुए काजू और बादाम से गार्निश कर सकते हैं. गर्मागर्म परोसा गया यह सूप बारिश की शाम के लिए एक अलग ही अनुभव देता है. कुलिथ को पारंपरिक खानपान में प्रोटीन और फाइबर वाले अनाज के तौर पर महत्व दिया जाता है. वहीं सोंठ और काली मिर्च जैसे मसाले इसके स्वाद को खास बनाते हैं. हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ के स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की स्थिति और मात्रा पर निर्भर करते हैं.
आज जब मानसून में लोग तरह-तरह के इंस्टेंट सूप और पैकेज्ड ड्रिंक्स की ओर बढ़ रहे हैं, Hulga Madga जैसी पुरानी रेसिपी हमें याद दिलाती है कि हमारी रसोई में मौसम के हिसाब से खाने-पीने की कितनी दिलचस्प परंपराएं रही हैं. अगली बार बारिश की ठंडी शाम हो, तो चाय से कुछ अलग बनाने का मन करे, यह पारंपरिक महाराष्ट्रीयन कुलिथ सूप आजमाया जा सकता है.