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Mahua Lattha Recipe: झारखंड की तरफ महुआ से खास तरह के लड्डू बनाए जाते हैं, जिन्हें महुआ लट्ठा कहते हैं. ये खाने में बेहद स्वादिष्ट होते हैं और मुख्य इंग्रीडिएंट में महुआ के साथ-साथ मक्का और तिल भी मिलाया जाता है. इन्हें बनाने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी और मेहनत भरी है.

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पलामू. झारखंड की पहचान सिर्फ उसके जंगल और पहाड़ ही नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध परंपराएं और स्थानीय व्यंजन भी हैं, जो इस राज्य को एक अलग पहचान देते हैं. हर क्षेत्र की अपनी खास खानपान संस्कृति होती है और झारखंड में यह विविधता साफ नजर आती है. खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में प्रकृति से जुड़ी चीजों का भोजन में विशेष महत्व है. इन्हीं में से एक है महुआ, जो यहां के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है. महुआ सिर्फ एक फल या फूल नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति, परंपरा और आजीविका का प्रतीक है. इससे कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें महुआ लठ्ठा खास तौर पर प्रसिद्ध है.

ऐसे होता है तैयार
लातेहार जिले के छिपादोहर क्षेत्र की रहने वाली सोनी देवी बताती हैं कि वह कई वर्षों से महुआ लठ्ठा बना रही हैं. यह व्यंजन वर्षों से परंपरा में शामिल है. जो कि स्वाद में जितना लाजवाब होता है, इसकी बनाने की प्रक्रिया उतनी ही मेहनत और धैर्य मांगती है. महुआ लठ्ठा तैयार करने के लिए सबसे पहले महुआ के फूलों को अच्छे से सुखाया जाता है.

इसके बाद उन्हें साफ पानी से धोकर कड़ाही में धीमी आंच पर भूना जाता है. यह प्रक्रिया काफी समय लेती है, क्योंकि महुआ को सही स्वाद और खुशबू देने के लिए उसे लंबे समय तक भूनना जरूरी होता है.

मक्का और तिल का भी इस्तेमाल
इस पारंपरिक व्यंजन में मक्का और तिल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देता है. एक किलो महुआ के साथ लगभग आधा किलो मक्का लिया जाता है. मक्का को पहले नमक के साथ कड़ाही में 5 से 7 मिनट तक भूना जाता है, जब तक वह अच्छे से फूट न जाए. इसके बाद भूने हुए मक्का को खल या जांता में कूटकर महीन किया जाता है. इसी तरह भुने हुए महुआ को भी कूटकर तैयार किया जाता है.

लंबे समय तक रहता है सुरक्षित
जब दोनों सामग्री तैयार हो जाती हैं, तब इन्हें आपस में अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को भी ओखली में कूटकर मिलाया जाता है. इसके बाद छोटे-छोटे लड्डू बनाए जाते हैं, जिन्हें महुआ लठ्ठा कहा जाता है. यह लठ्ठा न सिर्फ स्वाद में मीठा और पौष्टिक होता है, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है. गांवों में इसे खास अवसरों और मेहमानों के स्वागत में भी परोसा जाता है.

महुआ लठ्ठा झारखंड की पारंपरिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आज भी ग्रामीण इलाकों में अपनी पहचान बनाए हुए है. आधुनिक दौर में जहां फास्ट फूड का चलन बढ़ रहा है, वहीं ऐसे पारंपरिक व्यंजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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