बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई अपने सादे लेकिन पौष्टिक व्यंजनों के लिए देशभर में अलग पहचान रखती है. बरसात का मौसम आते ही हल्का, सुपाच्य और स्वादिष्ट भोजन खाने की इच्छा बढ़ जाती है. ऐसे में मूंनगा (सहजन), लौकी और दाल से तैयार होने वाली यह देसी रेसिपी एक बेहतरीन विकल्प है. ग्रामीण इलाकों में पीढ़ियों से बनने वाला यह व्यंजन स्वाद के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देता है. प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर यह डिश बदलते मौसम में शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती है. आइए जानते हैं इस पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रेसिपी की खासियत और इसे बनाने का आसान तरीका.
छत्तीसगढ़ की रसोई की पारंपरिक पहचान
मूंनगा, लौकी और दाल से बनने वाला यह व्यंजन छत्तीसगढ़ के गांवों में वर्षों से बनाया जाता रहा है. मौसम के अनुसार स्थानीय सब्जियों का उपयोग इस डिश को स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी बनाता है.
बरसात के मौसम के लिए बेहतरीन विकल्प
बारिश के दिनों में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर के लिए बेहतर माना जाता है. मूंनगा, लौकी और दाल का संतुलित मिश्रण शरीर को ऊर्जा देने के साथ ताजगी भी बनाए रखता है.
पोषण से भरपूर देसी रेसिपी
मूंनगा में विटामिन सी, आयरन और कैल्शियम, लौकी में भरपूर पानी और फाइबर जबकि दाल में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है. यही वजह है कि यह व्यंजन संतुलित और पौष्टिक भोजन का अच्छा विकल्प माना जाता है.
बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
एक कटोरी अरहर या मूंग दाल, एक मध्यम आकार की लौकी (कटी हुई), 2–3 मूंनगा (सहजन) की फलियां (टुकड़ों में कटी हुई), एक प्याज (बारीक कटा), एक टमाटर (कटा हुआ), 5–6 लहसुन की कलियां, दो हरी मिर्च, आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, जीरा, राई, तेल, नमक और हरा धनिया.
ऐसे बनाएं स्वादिष्ट मूंनगा-लौकी दाल
सबसे पहले दाल को अच्छी तरह धो लें. मूंनगा और लौकी को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें. कुकर में तेल गर्म कर राई और जीरे का तड़का लगाएं. इसके बाद प्याज, लहसुन और हरी मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें. फिर टमाटर डालकर मसालों के साथ अच्छी तरह पकाएं. अब पहले लौकी और फिर मूंनगा डालकर कुछ मिनट भूनें. इसके बाद दाल, नमक और आवश्यकतानुसार पानी डालकर कुकर का ढक्कन बंद करें और लगभग पांच सीटी आने तक पकाएं.
परोसने का सही तरीका
कुकर का प्रेशर निकलने के बाद ऊपर से हरा धनिया डालें. यह गर्मागर्म दाल सादे चावल, जीरा राइस, रोटी या बाजरे की रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है.
स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल
यह पारंपरिक छत्तीसगढ़ी डिश स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल है. खासकर बरसात के मौसम में यदि आप हल्का, पौष्टिक और घर जैसा देसी भोजन खाना चाहते हैं, तो मूंनगा-लौकी दाल आपकी थाली के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है.