राजस्थान की रजवाड़ी थाली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और शाही मेहमाननवाजी का प्रतीक है. इस थाली में दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी, गट्टे की सब्जी, पंचमेल दाल, कढ़ी, बाजरे की रोटी, पापड़, अचार और पारंपरिक मिठाइयों का अनूठा संगम देखने को मिलता है. हर व्यंजन राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों और लोकजीवन की कहानी बयां करता है. घी से सजी बाटी और बार-बार परोसने की परंपरा अतिथि सत्कार की मिसाल मानी जाती है. आज यह शाही थाली देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए राजस्थान के असली स्वाद और विरासत को करीब से जानने का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी है.
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