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Dholpur Traditional Malida Recipe: धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी मलीदा का क्रेज बरकरार है. ग्रामीण इलाकों के लोग मानते हैं कि मलीदा से भरपुर ऊर्जा मिलती है. मलीदा रात की बची रोटियों से बनाया जाता है. रोटी को बरीक कर काजू, बादाम और मखानों को देसी घी में हल्का भूनकर उन्हें भी बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद इसमें बुरा डाला जाता है. इसके बाद देसी घी डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिला दिया जाता है. कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट और ताकत से भरपूर देसी मलीदा तैयार हो जाता है.

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धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी देसी खान-पान की परंपरा जीवित है. यहां बची हुई रोटियों को फेंकने की बजाय उनसे स्वादिष्ट और पौष्टिक मलीदा बनाया जाता है. यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद के साथ-साथ शरीर को भरपूर ऊर्जा भी देता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में सिर्फ 5 मिनट का समय लगता है और इसकी रेसिपी भी बेहद आसान है. गृहिणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि जब रात की रोटियां बच जाती हैं तो उन्हें खराब होने के लिए नहीं छोड़ा जाता.

सबसे पहले बची हुई रोटियों को बड़े-बड़े टुकड़ों में तोड़कर मिक्सी में डालकर बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद काजू, बादाम और मखानों को देसी घी में हल्का भूनकर उन्हें भी बारीक पीस लिया जाता है. अब पिसी हुई रोटियों में काजू, बादाम और मखानों का मिश्रण मिलाया जाता है. इसके बाद स्वादानुसार बूरा डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. आखिर में इसमें देसी घी डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिला दिया जाता है. कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट और ताकत से भरपूर देसी मलीदा तैयार हो जाता है.

धौलपुर में मलीदा को माना जाता है ऊर्जा देने वाला पारंपरिक भोजन

ग्रामीण परिवारों में मलीदा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि ऊर्जा देने वाला पारंपरिक भोजन माना जाता है. सुबह खेतों में काम करने जाने वाले किसान अक्सर नाश्ते में मलीदा खाते हैं. उनका मानना है कि इससे लंबे समय तक शरीर में ताकत बनी रहती है और खेतों में मेहनत करने के दौरान जल्दी थकान महसूस नहीं होती. मलीदा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंदीदा डिश है. स्कूल जाने वाले बच्चों के टिफिन में भी इसे रखा जा सकता है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है. घर में अचानक कोई मेहमान आ जाए तो मलीदा मीठे के रूप में भी परोसा जा सकता है.

कम खर्च में पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन है मलीदा

आज के समय में जब फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है, तब धौलपुर के गांवों में मलीदा जैसी पारंपरिक रेसिपी लोगों को अपनी संस्कृति और देसी स्वाद से जोड़कर रखे हुए हैं. बची हुई रोटियों का इस तरह उपयोग न केवल भोजन की बर्बादी रोकता है, बल्कि कम खर्च में परिवार को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन भी उपलब्ध कराता है. यही वजह है कि मलीदा आज भी धौलपुर के ग्रामीण जीवन और देसी खान-पान की पहचान बना हुआ है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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