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अक्सर आपने गुलाब जामुन को चाशनी में डूबे हुए मिठाई की दुकान पर देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी पेड़ पर ‘गुलाब जामुन’ लटकते देखे हैं? चौंकिए मत! जबलपुर के बगीचों में इन दिनों एक खास ‘बांग्लादेशी फल’ की धूम है. स्वाद ऐसा कि जैसे मुंह में गुलकंद घुल जाए और खुशबू गुलाब जैसी…

जबलपुर. दरअसल, जबलपुर के बागानों में इन दिनों एक अनोखे विदेशी फल की चर्चा हर तरफ है. इसे बांग्लादेशी फल, रोज एप्पल या ‘गुलाब जामुन फल’ भी कहा जाता है. देखने में यह फल हल्के पीले रंग का और बेहद आकर्षक होता है. इस फल की सबसे बड़ी खूबी इसका स्वाद हैं, जो पूरी तरह से गुलकंद जैसा महसूस होता है. यह फल फरवरी माह में लगना शुरू होता है और मई महीने तक खाने के लिए तैयार हो जाता है.

कैसे तैयार होती है यह ‘कुदरती मिठाई’?
जबलपुर के चरंगवा, हिनौता गांव के किसान संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि इस पेड़ पर सबसे पहले खूबसूरत फूल आते हैं, जो बाद में छोटे कलियों में तब्दील हो जाते हैं. धीरे-धीरे ये कलियां बड़े आकार के पीले फलों का रूप ले लेती हैं. जबलपुर की जलवायु में यह फल बेहतरीन तरीके से पनप रहा है. इसके खाने के भी कई फायदे हैं, जो शुगर कंट्रोल के लिए भी काफी मदद करता है और खून को भी गाढ़ा बनाता है. यह रोज एप्पल का आकार गोल अमरूद की तरह होता है. जो हल्के पीले और हल्के हरे रंग का होता है.

4 सौ रुपए प्रति किलो है बांग्लादेशी फल की कीमत
इस फल की डिमांड और इसके औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसका ‘रेट’ काफी ऊंचा रहता है. खास किस्म का और कम उत्पादन होने की वजह से यह 3 सौ रुपए से 4 सौ रुपए प्रति किलो तक बिकता है. किसान संकल्प सिंह परिहार के पास इसके करीब 4 से 5 पेड़ हैं, जिनसे हर सीजन में प्रति पेड़ 5 से 6 किलो फल की पैदावार हो रही है. उन्होंने बताया रोज एप्पल के इस फल में अंदर एक बीज भी होता है. जिसे हिलाने पर आवाज भी सुनाई देती है, जहां बीज को अलग कर आसानी से इस गुलाब जामुन को खाया जा सकता है.

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Mohd Majid

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