British Royal Family Diet: दुनिया भर में ब्रिटिश रॉयल फैमिली की शाही लाइफस्टाइल हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है. उनके महलों, परंपराओं और खानपान से जुड़ी कई दिलचस्प बातें समय-समय पर सामने आती रहती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे पॉपुलर डिशेज भी हैं जिन्हें ब्रिटिश राजघराना खाने से परहेज करता है? इसके पीछे केवल स्वाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सेफ्टी और शाही प्रोटोकॉल से जुड़े खास कारण हैं. विदेश यात्राओं से लेकर आधिकारिक कार्यक्रमों तक, रॉयल फैमिली के सदस्यों के भोजन को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं. इनमें कुछ समुद्री खाद्य पदार्थ, कच्चे भोजन और विशेष मसालेदार व्यंजन भी शामिल हैं. आइए जानते हैं ब्रिटिश रॉयल फैमिली किन सात खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखती है और इसके पीछे क्या वजहें हैं…
सीप
छुट्टियों में झींगा या सीप की थाली कितनी भी लुभावनी क्यों ना हो, लेकिन रॉयल फैमिली में सीप को लेकर लंबे समय से सावधानी बरती जाती रही है. पूर्व शाही बटलर ग्रांट हैरोल्ड ने बताया कि फूड पॉइजनिंग के खतरे के कारण इसे अक्सर टाला जाता है, खासकर यात्रा के दौरान. हालांकि, पूर्व शाही शेफ डैरेन मैकग्राडी ने याद किया है कि उन्होंने कई बार महारानी को स्कैलप्स और झींगा परोसा था, जिससे पता चलता है कि यह नियम पूरी तरह से बैन नहीं बल्कि एक एहतियाती उपाय था.
कच्चा या अधपका मांस
कच्चे या अधपके मांस से बने व्यंजन, जैसे स्टेक टार्टारे या रेयर बर्गर, आमतौर पर नहीं परोसे जाते हैं. डैरेन मैकग्राडी, जिन्होंने 15 सालों से अधिक समय तक महारानी एलिजाबेथ सेकेंड और प्रिंसेस डायना के लिए खाना बनाया, ने अपनी पुस्तक ईटिंग रॉयली में लिखा है कि महारानी को पूरी तरह से पका हुआ मांस पसंद था. सार्वजनिक नजरों में रहने वाले परिवार के लिए, पूरी तरह से पका हुआ व्यंजन ही सबसे सेफ विकल्प माना जाता है.
लहसुन और प्याज
रॉयल फैमली के लोग खाने में कभी भी प्याज और लहसुन नहीं खाते. साल 2018 में मास्टरशेफ ऑस्ट्रेलिया में कैमिला, जो अब महारानी हैं, ने पुष्टि की कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान मुंह की बदबू से बचने के लिए रॉयल सेरेमनी में लहसुन से परहेज किया जाता है. मैकग्राडी ने हेलो! पत्रिका को दिए इंटरव्यू में यह भी बताया है कि इसी कारण से महल के किचन में कच्चे प्याज का इस्तेमाल बहुत कम होता था.
फोई ग्रास
कुछ बैन स्वास्थ्य संबंधी नहीं बल्कि नैतिक कारणों से भी हैं. वेल्स के राजकुमार रहते हुए किंग चार्ल्स ने रॉयल रेसीडेंस में फोई ग्रास परोसने पर बैन लगा दिया था. पशु अधिकार समूहों द्वारा जारी एक बयान के बाद साल 2008 में क्लेरेंस हाउस ने इसकी पुष्टि की. बत्तखों या हंसों को जबरदस्ती खिलाकर बनाया जाने वाला यह व्यंजन लंबे समय से विवादों में रहा है और किंग चार्ल्स का निर्णय पशु कल्याण और टिकाऊ खेती में उनकी व्यापक रुचि के अनुरूप था.
बेमौसम फल
लेट क्वीन एलिजाबेथ मौसमी भोजन को बहुत पसंद करती थीं. उदाहरण के लिए, दिसंबर में स्ट्रॉबेरी उन्हें स्वीकार्य नहीं थीं. फल और सब्जियां प्राकृतिक रूप से पकने पर ही खानी चाहिए, ना कि ग्रीनहाउस या आयात द्वारा जबरन पकाई गई हों. सैंड्रिंघम और बालमोरल की जागीरों में अधिकांश उपज स्वयं उगाई जाती है, इसलिए मौसमी उत्पादों पर जोर देना स्वाभाविक है.
रिफाइंड शुगर और आर्टिफिशियल मिठास
किंग चार्ल्स के बारे में व्यापक रूप से कहा जाता है कि वे रिफाइंड शुगर और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स से परहेज करते हुए, ताजे, मौसमी अवयवों और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता देते हैं, जो हेल्दी रहते हैं. द इंडिपेंडेंट और स्काई न्यूज के आर्टिकल में बताया गया है कि वे शहद या फलों जैसे प्राकृतिक मिठास का चुनाव करते हैं, और अक्सर बैलेंस्ड न्यूट्रिशन के लिए इन्हें साबुत अनाज, सब्जियों और कम वसा वाले प्रोटीन के साथ मिलाकर खाते हैं. इसके विपरीत, महारानी एलिजाबेथ को चॉकलेट बहुत पसंद थी.